हिमाचल प्रदेश के मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग पर डयोड के पास शुक्रवार को सड़क हादसा हो गया। हादसे में तीन लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। हादसे के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। इस हादसे को लेकर इसलिए भी चर्चा है क्योंकि डयोड-हनोगी टनल को आज ही यातायात के लिए खोला गया था। लंबे इंतजार के बाद टनल खुलने से मंडी-कुल्लू मार्ग पर सफर आसान होने की उम्मीद जगी थी लेकिन उसी दिन टनल के नजदीक हादसे ने यातायात सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डयोड के पास वाहनों की आपस में टक्कर हुई, जिसमें तीन लोग घायल हुए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दुर्घटना के पीछे तेज रफ्तार, सड़क की स्थिति या चालक की लापरवाही में से क्या वजह रही, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

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टनल खुलने के दिन हादसे से बढ़ी चिंता

डयोड-हनोगी टनल खुलने के बाद मंडी-कुल्लू NH पर यातायात व्यवस्था में बदलाव आया है। ऐसे में टनल के आसपास वाहनों की आवाजाही, गति नियंत्रण और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी हो गई है। एक तरफ टनल खुलने से सफर सुगम होने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ उद्घाटन के दिन ही हादसा सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान देने का संकेत दे गया।

 

फोरलेन परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से में बनाई गई डयोड टनल करीब 2.8 किलोमीटर लंबी है जबकि हणोगी टनल की लंबाई करीब 650 मीटर है। इन टनलों के शुरू होने से वाहनों को पुराने घुमावदार और संवेदनशील सड़क हिस्से से होकर गुजरने की जरूरत कम होगी। दोनों टनल सेक्शन को खोतीनाला के समीप बने करीब 140 मीटर लंबे और 45 मीटर ऊंचे पुल से जोड़ा गया है। यह पूरा हिस्सा पंडोह बाईपास-टकोली फोरलेन परियोजना का अहम हिस्सा है।

 

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पर्यटन सीजन में जाम से मिलेगी बड़ी राहत

मंडी से कुल्लू-मनाली जाने वाले यात्रियों के लिए डयोड और हणोगी क्षेत्र हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। पर्यटन सीजन में वाहनों का दबाव बढ़ने के साथ यहां कई बार लंबा जाम लग जाता था। इसके अलावा बरसात में भूस्खलन और पहाड़ी से मलबा-पत्थर गिरने से यातायात प्रभावित होता रहा है। नई टनलों के शुरू होने के बाद वाहनों को इन संवेदनशील हिस्सों को बायपास करने का सुरक्षित और अपेक्षाकृत तेज विकल्प मिल गया है। हणोगी टनल के निर्माण के दौरान पहाड़ी की भूगर्भीय स्थिति ने चुनौती पैदा की थी। टनल और इसके आसपास पहाड़ी में हलचल के बाद सुरक्षा और स्थिरता को लेकर विशेषज्ञों से जांच करवाई गई। आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा कार्य पूरा करने के बाद इसे यातायात के लिए खोला गया है।