बिहार सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना शुरू की है। उद्यान निदेशालय के तहत क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक क्लस्टर का क्षेत्रफल 25 हेक्टेयर होगा। इसमें रबी और खरीफ दोनों मौसम में गेंदा की खेती कराई जाएगी। आवेदन 15 सितंबर से शुरू हो चुका है और यह 31 दिसंबर 2026 तक खुला रहेगा।

 

बिहार सरकार में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। इस योजना से गेंदा फूल की खेती को संगठित रूप देने के साथ इसके परिवहन ( Transportation) और विपणन ( Marketing) को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि मंत्री ने बताया कि गेंदा फूल की मांग साल भर रहती है। शादी-ब्याह, पूजा-पाठ, माला बनाने और सजावट में गेंदा फूल का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। बिहार में गेंदा फूल की मांग ज्यादा है और बाहर से फूल मंगाना पड़ता है। यदि बिहार के किसान ही गेंदा की खेती करेंगे तो उन्हें अच्छा बाजार मिलेगा।

 

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कितना मिलेगा अनुदान?

योजना में गेंदा खेती की इकाई लागत 80 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। इस पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। यानी किसान को अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता दी जाएगी। अनुदान सीधे किसान के खाते में जाएगा। एक किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर (10 डिसमिल) से लेकर अधिकतम 2 हेक्टेयर तक लाभ ले सकता है। एक हेक्टेयर खेती पर 40 हजार रुपये मिलेंगे। दो हेक्टेयर पर 80 हजार रुपये तक मिल सकते हैं। रबी और खरीफ दोनों मौसम में खेती की जा सकती है। दोनों बार अनुदान का लाभ लिया जा सकता है। इससे साल भर आय होगी।

क्लस्टर में ही करना होगा आवेदन

योजना का लाभ सिर्फ निर्धारित क्लस्टर में ही मिलेगा। एक क्लस्टर 25 हेक्टेयर का होगा। इसका चयन एक पंचायत या दो नजदीकी पंचायतों के आधार पर किया जाएगा। जिला उद्यान पदाधिकारी क्लस्टर चिन्हित करेंगे। किसानों को इसकी जानकारी दी जाएगी।

 

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अपनी जमीन नहीं तो इकरारनामा भी चलेगा। लाभ लेने के लिए भूमि उपलब्ध होना जरूरी है। अपनी जमीन हो तो कागजात के साथ आवेदन कर सकते हैं। अपनी जमीन न हो तो इकरारनामा के आधार पर भी लाभ मिल सकता है। जमीन लीज पर लेकर खेती की जा सकती है। भूमि दस्तावेज में नाम साफ न हो तो वंशावली लगानी होगी।

क्लस्टर खेती से क्या होगा फायदा?

क्लस्टर आधारित खेती से उत्पादन बढ़ेगा। व्यापारी सीधे क्लस्टर से फूल खरीदेंगे। किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। बिचौलियों की भूमिका कम होगी। प्रसंस्करण इकाई भी लगाई जाएगी। वहां माला, गुलदस्ता और अन्य उत्पाद बनाए जाएंगे। इससे रोजगार भी बढ़ेगा। मालवाहक वाहन पर भी मिलेगा अनुदान। गेंदा फूल के परिवहन के लिए मालवाहक वाहन पर भी अनुदान मिलेगा। वाहन की अधिकतम लागत 3.25 लाख रुपये मानी जाएगी। वास्तविक कीमत या 3.25 लाख में जो कम हो, उस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। तीन लाख रुपये की गाड़ी पर 1.5 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। वाहन अनुदान सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो इस योजना के तहत गेंदा की खेती कर रहे हैं। आवेदन के समय वाहन का कोटेशन, जमीन के कागजात और खेती से जुड़ा इकरारनामा अपलोड करना होगा। भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र या इकरारनामा जरूरी दस्तावेज हैं।