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3 सवर्ण, 2 दलित और 3 OBC, राज्यसभा के बहाने BJP ने ढूंढ ली PDA की काट?

UP विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने राज्य सभा के आठ प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इसमें जातीय संतुलन को साधते पुराने चेहरों की जगह संगठन में काम करने वालों को मौका दिया गया है।

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नितिन नवीन और नरेंद्र मोदी, Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची के जरिए अपने सामाजिक और संगठनात्मक समीकरण का संकेत दिया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में आठ उम्मीदवार उतारे हैं। खास बात यह है कि आठ नामों में तीन ओबीसी, दो दलित, दो ब्राह्मण और एक ठाकुर चेहरे को जगह दी गई है। यानी पांच उम्मीदवार पिछड़े और दलित वर्गों से आते हैं जबकि तीन उम्मीदवार सवर्ण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस सूची में दो महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं।

 

बीजेपी की इस सूची को 2027 की चुनावी तैयारी के सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने एक तरफ लोधी, पाल और कुर्मी जैसे अलग-अलग ओबीसी समूहों को प्रतिनिधित्व दिया है, तो दूसरी तरफ दो दलित चेहरों को जगह देकर सामाजिक आधार को व्यापक करने का संकेत दिया है। साथ ही दो ब्राह्मण और एक ठाकुर चेहरे को शामिल कर पार्टी ने अपने परंपरागत सवर्ण आधार को भी सूची में संतुलित रखा है।यानी राज्यसभा के लिए जारी आठ नामों में सिर्फ उम्मीदवारों का चयन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और संगठन में सक्रिय चेहरों को साथ रखने की तस्वीर दिखाई देती है।

लोधी-पाल-कुर्मी का OBC समीकरण

बीजेपी  की सूची में ओबीसी वर्ग से तीन चेहरे हैं। धर्मपाल सिंह लोधी, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को इस वर्ग के प्रतिनिधित्व के तौर पर देखा जा रहा है।धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला सीट से विधायक और प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। वह लोधी समाज से आते हैं। उनका नाम राज्यसभा सूची में शामिल होना पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लोधी समाज के समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरा नाम प्रकाश पाल का है। वह बीजेपी  के प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष हैं और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में संगठन के स्तर पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। राज्यसभा के लिए उनका चयन संगठन से जुड़े ओबीसी चेहरे को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।

 

तीसरा नाम श्रुति गंगवार का है। बरेली की रहने वाली श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं। उनका नाम कुर्मी समाज के प्रतिनिधित्व से जोड़ा जा रहा है। इस तरह बीजेपी ने ओबीसी के भीतर भी एक ही सामाजिक समूह पर निर्भर रहने के बजाय लोधी, पाल और कुर्मी प्रतिनिधित्व को एक साथ जगह दी है।

 

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दो दलित चेहरों से दूसरा बड़ा संदेश

बीजेपी  की सूची में विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत दो दलित चेहरे हैं। विद्यासागर सोनकर जौनपुर से आते हैं और पूर्व सांसद, पूर्व एमएलसी तथा पार्टी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वहीं प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद रही हैं और बीजेपी  संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। उनके जरिए पार्टी ने दलित प्रतिनिधित्व के साथ महिला चेहरे को भी राज्यसभा सूची में जगह दी है।आठ उम्मीदवारों में दो दलित चेहरों का शामिल होना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े और दलित सामाजिक समीकरण लगातार चुनावी राजनीति के केंद्र में रहे हैं।

दो ब्राह्मण और एक ठाकुर से सवर्ण संतुलन

बीजेपी  ने सूची में सवर्ण समाज को भी नजरअंदाज नहीं किया है। राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय ब्राह्मण समाज से आते हैं, जबकि राम प्रताप सिंह चौहान राजपूत यानी ठाकुर समाज से जुड़े हैं। राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं गोपी कृष्ण पांडेय लंबे समय से बीजेपी  संगठन से जुड़े रहे हैं ।राम प्रताप सिंह चौहान आगरा से हैं और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री के तौर पर संगठन में सक्रिय रहे हैं। उनका नाम पार्टी के संगठनात्मक अनुभव वाले चेहरों में शामिल है।

पुराने चेहरों की जगह संगठन पर भरोसा

इस सूची का एक और बड़ा पहलू यह है कि बीजेपी ने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा समेत कई पुराने नाम इस बार सूची से बाहर हैं। पार्टी ने आठ नए चेहरों को मैदान में उतारा है।इससे यह संकेत मिलता है कि बीजेपी  ने इस बार राज्यसभा के लिए बड़े राष्ट्रीय चेहरों के बजाय प्रदेश की राजनीति और संगठन से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी है। उम्मीदवारों की सूची में मंत्री, पूर्व सांसद, प्रदेश पदाधिकारी, मोर्चा पदाधिकारी और लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेता शामिल हैं।

दो महिला चेहरों को भी जगह

बीजेपी  की आठ सदस्यीय सूची में प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार दो महिला उम्मीदवार हैं। दोनों के राजनीतिक और सामाजिक आधार अलग-अलग हैं। एक तरफ प्रियंका रावत पूर्व सांसद और संगठन में सक्रिय चेहरा हैं, वहीं श्रुति गंगवार बरेली क्षेत्र और कुर्मी सामाजिक समीकरण से जुड़ी हैं।इससे सूची में जातीय प्रतिनिधित्व के साथ महिला भागीदारी और क्षेत्रीय संतुलन का भी मेल दिखाई देता है।

 

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2027 के लिए क्या है संकेत?

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है और ऐसे में बीजेपी  की राज्यसभा सूची को केवल उच्च सदन के चुनाव तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है। पार्टी ने आठ नामों में तीन ओबीसी, दो दलित, दो ब्राह्मण और एक ठाकुर को जगह दी है। पांच नाम पिछड़े और दलित वर्गों से हैं, जबकि तीन नाम सवर्ण समाज से जुड़े हैं।

 

समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण की राजनीति के बीच बीजेपी  की यह सूची अपने सामाजिक आधार को अलग-अलग वर्गों में संतुलित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची से 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम तय नहीं होता, लेकिन उम्मीदवारों के चयन से पार्टी की सामाजिक और संगठनात्मक प्राथमिकताओं का संकेत जरूर मिलता है।आठों नामों को देखें तो बीजेपी  ने लोधी, पाल, कुर्मी, दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समाजों को प्रतिनिधित्व दिया है। साथ ही संगठन में सक्रिय चेहरों को आगे किया गया है। 


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