बिहार में जमीन अधिग्रहण के कारण अटकी विकास परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की तैयारी है। इसके लिए भू-अर्जन निदेशक कमलेश सिंह ने अधिकारियों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने विकास परियोजनाओं के भू-अर्जन कार्यों में तेजी लाने, लंबित प्रक्रियाओं को समय से पूरा करने और बाधाओं को दूर करने को कहा है।

 

पटना स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में हुई समीक्षा बैठक में PMG, रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों को जमीन अधिग्रहण में आ रही बाधाओं को दूर कर काम में तेजी लाने को कहा गया।

 

बैठक में मुआवजे, जमीन के रिकॉर्ड और कोर्ट में लंबित मामलों पर भी चर्चा हुई। निदेशक ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को लंबित मामलों की सूची तैयार करने और न्यायालय में चल रहे मामलों की पैरवी तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं को दूर किया जाए, ताकि परियोजनाओं के काम में अनावश्यक देरी न हो।

PMG, रेलवे और NHAI की परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में सबसे पहले PMG के तहत चल रही परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में आ रही समस्याओं और लंबित मामलों पर चर्चा हुई। भू-अर्जन निदेशक ने अधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान निकालने को कहा।

 

इसके बाद रेलवे और NHAI की परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि रेलवे की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी लंबित है। इससे परियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है। निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।

 

भू-अर्जन निदेशक ने कहा, 'भू-अर्जन की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। रैयतों को समय पर और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। मुआवजा वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर किसी अधिकारी द्वारा गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रैयतों से संवाद करें। उनकी समस्याओं को सुनें और समाधान करें। कई बार छोटी-छोटी समस्याओं के कारण भू-अर्जन का काम रुक जाता है। संवाद से उन समस्याओं को दूर किया जा सकता है।'

 

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कहीं मुआवजे का इंतजार, कहीं जमीन को लेकर विवाद

बैठक में जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कई तरह की समस्याएं सामने आईं। कुछ मामलों में जमीन का मुआवजा तय नहीं हो पाया है, तो कहीं जमीन मालिकों यानी रैयतों के साथ विवाद है। कई मामले अदालतों में भी लंबित हैं। इन वजहों से विकास परियोजनाओं का काम तय समय पर पूरा करने में दिक्कत आ रही है।

 

भू-अर्जन निदेशक ने सभी जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को अपने-अपने जिले में लंबित मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अदालतों में चल रहे मामलों की तेजी से पैरवी की जाए, ताकि उनका जल्द निपटारा हो सके। अधिकारियों को यह भी कहा गया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों से लगातार संपर्क बनाए रखें।

जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी दूर करने पर फोकस

बैठक में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण का मुद्दा भी उठा। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में जमीन के दस्तावेज स्पष्ट नहीं हैं। कहीं खतियान तो कहीं खेसरा से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस पर निदेशक ने राजस्व विभाग के साथ समन्वय बनाकर रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण तेजी से पूरा किया जाए। इससे जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

 

भू-अर्जन निदेशक ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, 'रैयतों को समय पर उचित मुआवजा मिलना चाहिए और मुआवजा वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को रैयतों से संवाद करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का निर्देश दिया। कई बार छोटी-छोटी समस्याओं के कारण जमीन अधिग्रहण का काम रुक जाता है। ऐसे मामलों में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जानी चाहिए। मुआवजे या अधिग्रहण की प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'

 

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सभी जिलों के अधिकारियों को दिया गया निर्देश

समीक्षा बैठक में राज्य के सभी जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और राजस्व विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में चल रही परियोजनाओं और जमीन अधिग्रहण में आ रही समस्याओं की जानकारी दी। बैठक के अंत में निदेशक ने अधिकारियों को अपने दायित्वों का पालन करते हुए लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने को कहा।

 

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की ओर से भी भू-अर्जन के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को दूर करें, ताकि विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।