हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दिल्ली यात्रा से वापसी के बीच अचानक बदले कार्यक्रम ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। दिल्ली से लौटकर चंडीगढ़ पहुंचे मुख्यमंत्री को शुक्रवार सुबह शिमला पहुंचना था, लेकिन वह हिमाचल की राजधानी आने के बजाय एक बार फिर दिल्ली रवाना हो गए। मुख्यमंत्री के इस फैसले ने उनके अगले कार्यक्रम और शनिवार को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आए इस बदलाव की आधिकारिक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में उनके दोबारा दिल्ली जाने के कारणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, किसी राजनीतिक बैठक, संगठनात्मक चर्चा या अन्य विशेष कारण को लेकर अभी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस घटनाक्रम को लेकर लगाए जा रहे कयासों की पुष्टि होना बाकी है।

दिल्ली से लौटे, चंडीगढ़ पहुंचे और फिर बदल लिया रास्ता

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू गुरुवार सुबह शिमला से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के बाद वह देर शाम वापस लौटे और रात चंडीगढ़ में बिताई। शुक्रवार सुबह उनका शिमला पहुंचने का कार्यक्रम था, लेकिन अंतिम समय में यात्रा की दिशा बदल गई।

 

शिमला पहुंचने के बजाय मुख्यमंत्री ने दोबारा दिल्ली का रुख कर लिया। कार्यक्रम में इस अप्रत्याशित बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या दिल्ली में मुख्यमंत्री के कुछ कार्यक्रम शेष थे या किसी नए कार्यक्रम के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। फिलहाल इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

राहुल-प्रियंका के साथ धरने में शामिल हुए थे सुक्खू

मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक कार्यक्रम में उनकी भागीदारी भी चर्चा में रही। गुरुवार को वह दिल्ली के राजघाट में चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर आयोजित धरने में शामिल हुए थे।

 

इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी , कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

 

कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा को जरूरी बताया।

उन्होंने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

 

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अब शनिवार की कैबिनेट बैठक पर सबकी नजर

मुख्यमंत्री के दोबारा दिल्ली जाने के बाद प्रदेश सरकार की शनिवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री की शिमला वापसी के कार्यक्रम में बदलाव के कारण बैठक के समय और आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

केवल मुख्यमंत्री के यात्रा कार्यक्रम में बदलाव के आधार पर कैबिनेट बैठक स्थगित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बैठक को लेकर किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है। मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश से जुड़े नीतिगत, प्रशासनिक और विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना रहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री की वापसी और बैठक के निर्धारित कार्यक्रम को लेकर सरकार की ओर से आने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

सियासी हलचल के बीच तीन सवाल अहम

मुख्यमंत्री के अचानक बदले कार्यक्रम के बीच अब तीन सवालों पर सबकी नजर है। पहला, सुक्खू को चंडीगढ़ से दोबारा दिल्ली क्यों जाना पड़ा? दूसरा, वह शिमला कब लौटेंगे? और तीसरा, क्या शनिवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार होगी? फिलहाल मुख्यमंत्री की दोबारा दिल्ली यात्रा का कारण स्पष्ट नहीं है। ऐसे में राजनीतिक चर्चाओं के बीच वास्तविक स्थिति जानने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।