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3 दिन अस्पताल में भर्ती रही गर्भवती, प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत

हिमाचल के ऊना जिला में अस्पताल में उपचार पर सवाल उठे हैं। तीन दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद जच्चा और बच्चा की मौत पर हंगामा हो गया है।

Una Hospital Photo Credit-Social Media

ऊना अस्पताल के बाहर शव के साथ प्रदर्शन करते परिजन, Photo Credit-Social Media

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हिमाचल प्रदेश के ऊना स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब तीन दिन से अस्पताल में उपचाराधीन महिला की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उपचार में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में नाराजगी जताई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। अस्पताल प्रबंधन ने मामले से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।

 

मृतका की पहचान अपर अरनियाला निवासी रीना के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में भर्ती करवाया गया था। वह पिछले करीब तीन दिन से अस्पताल में उपचाराधीन थीं। शुक्रवार को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) परिसर स्थित ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। हालांकि, चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को बचाया नहीं जा सका।

तीन दिन से भर्ती महिला की मौत, परिजनों ने उठाए सवाल

महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिवार ने अस्पताल में उपलब्ध करवाई गई चिकित्सा सुविधाओं और उपचार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि उपचार में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह दुखद स्थिति पैदा हुई। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना ने अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं की निगरानी, प्रसव के दौरान आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों और समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने जैसे महत्वपूर्ण सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

अस्पताल परिसर में हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति

जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों की नाराजगी को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। घटना को लेकर परिजनों में रोष रहा और उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई। ऐसे मामलों में प्रसव से पहले गर्भवती महिला की स्थिति, प्रसव के दौरान की गई निगरानी, चिकित्सकीय निर्णय और आपातकालीन उपचार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार के दौरान किन परिस्थितियों में महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हुई।

 

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जांच के बाद स्पष्ट होंगे मौत के कारण

अस्पताल प्रबंधन ने मामले से संबंधित तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों और उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इस बारे में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में उपचार संबंधी किसी तरह की कोताही सामने आती है, तो जिम्मेदारी निर्धारित करना आवश्यक होगा। वहीं, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर उठे सवाल

क्षेत्रीय अस्पताल जैसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि गंभीर परिस्थितियों में मरीजों की निगरानी और समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। फिलहाल, मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि तीन दिन से अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार प्रक्रिया में कोई चूक हुई थी। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


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