बिहार के पटना जिले में NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए हंगामे के मामले में पुलिस ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार की रात को पुलिस उन्हें नौबतपुर थाने से मजिस्ट्रेट के सामने ले गई, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया। तेज प्रताप के जीवन में यह पहला मौका है जब उन्हें जेल जाना पड़ा है। पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी गांधी मैदान में हुए प्रदर्शन, झड़प और पथराव के मामले में की गई है।

 

पुलिस के मुताबिक विरोध प्रदर्शन वाले दिन तेज प्रताप यादव गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के पास चल रहे प्रदर्शन में शामिल थे। उनके हाथ में तिरंगा झंडा था और वे युवाओं तथा छात्र संगठनों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। इसके बाद वे पूरे दिन कोतवाली और गांधी मैदान थाना इलाके में चल रहे आंदोलनों में भी मौजूद रहे। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हो गई। पथराव की इस घटना में गांधी मैदान के थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा और टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसवाले घायल हो गए। इसी मामले को आधार बनाकर पुलिस ने उनके खिलाफ यह कार्रवाई की है।

 

यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर: वैदिक पाठशाला का मैनेजर यौन उत्पीड़न केस में गिरफ्तार

कैसे हुई गिरफ्तारी?

शुरुआत में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था लेकिन कुछ ही देर बाद वे थाने से बाहर आ गए। इसके बाद पुलिस ने उनकी लोकेशन का पता लगाया। जानकारी मिलने पर पुलिस पटना के सिटी सेंटर मॉल पहुंची और वहां से उन्हें दोबारा पकड़कर नौबतपुर थाने ले गई। थाने में पूछताछ और मेडिकल जांच पूरी करने के बाद उन्हें रात में ही अदालत में पेश किया गया।

 

पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि तेज प्रताप यादव पर दंगा भड़काने और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का आरोप है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई और पुलिसकर्मी घायल हुए जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस कार्रवाई के दौरान पटना पश्चिमी एसपी और लॉ एंड ऑर्डर की एसडीपीओ कोमल मीणा भी वहां मौजूद थीं। गिरफ्तारी के समय उनके साथ उनके कुछ समर्थक भी थे।

 

यह भी पढ़ें: मुजफ्फरपुर में महिला को बचाने पर, दबंगों ने पान दुकानदार को मारी गोली

 

इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि यह कदम राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था। वहीं, राजद और दूसरे सहयोगी दलों ने इसे राजनीतिक बदला बताया है। राजद नेताओं का कहना है कि छात्र और युवा अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरे थे और तेज प्रताप सिर्फ उनका साथ दे रहे थे लेकिन सरकार इस आंदोलन को दबाने के लिए नेताओं को जेल भेज रही है। दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जाएगी और जो भी हिंसा या तोड़फोड़ में शामिल होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।