ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं, जिनमें से करीब 29% यानी 5,11,196 शिकायतें अकेले ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी थीं। अब केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
नियमों में बदलाव का मकसद है कि ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों के साथ धोखा या गड़बड़ी कम हो, उनके अधिकार सुरक्षित रहें। नए नियम में ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारियां भी साफ होंगी। इसके साथ ही ऑनलाइन कारोबार करने वाले सभी बिजनेस को बराबरी का मौका मिलेगा।
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पहले और अब के नियम में क्या बदला?
भारत सरकार के कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स 2020 में बदलाव किया है। इसके लिए सरकार ने 10 सितंबर को कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स अमेंडमेंट 2026 पेश किया है, जो 1 जनवरी 2027 से लागू हो जाएगा। इसका मकसद ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और कंपनियों के कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता लाना है। सीधे तौर पर कहें तो अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कंपनियों को अपने ग्राहकों को सामान खरीदते समय कीमत, डिस्काउंट और प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी ज्यादा बेहतर और स्पष्ट तौर पर बतानी होगी।
नए नियमों के तहत पहले कंपनियां सर्च रिजल्ट में बदलाव कर ग्राहक को गुमराह कर सकती थीं, वह अब बंद होगा। डिस्काउंट दिखाते समय पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत बतानी होगी। अब खरीद से पहले यह सारी जानकारी देनी होगी। इस तरह से कई ग्राहकों के लिए कई अहम नियम बनाए गए हैं।
क्या बदलेगा, जानें नियम?
- कंज्यूमर शिकायतें: हर ई-कॉमर्स कंपनी ग्राहक को उसकी शिकायत की एक कॉपी देगी।
- सर्च रिजल्ट: कंपनियां सर्च रिजल्ट में ऐसा बदलाव नहीं कर सकेंगी, जिससे ग्राहक गुमराह हो या उसे उसकी जरूरत की सही जानकारी न मिले।
- स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग: पैसे देकर ऊपर दिखाए जाने वाले सामान को साफ तौर पर स्पॉन्सर्ड बताना होगा।
- कीमत में कमी: अगर किसी सामान की कीमत कम की जाती है तो नई कीमत के साथ पुरानी कीमत भी दिखानी होगी। पुरानी कीमत वही होगी, जो पिछले 30 दिनों में उस सामान की सबसे कम कीमत रही हो।
- डार्क पैटर्न: ग्राहकों को भ्रमित करने वाले तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कंपनियों को हर साल इसकी जांच करनी होगी और नियमों का पालन करने का प्रमाण भी दिखाना होगा।
- सेलर और सामान की जानकारी: कंपनियों को सामान की जरूरी जानकारी देनी होगी। इसमें खराब होने की तारीख, सामान वापस करने और पैसे लौटाने के नियम, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट की जानकारी शामिल होगी।
- ग्राहक की जानकारी: कंपनियां ग्राहक की निजी जानकारी का इस्तेमाल उसकी साफ मंजूरी के बिना तय कामों के लिए नहीं कर सकेंगी।
- बंडल फीस: ई-कॉमर्स कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म से जुड़ी नहीं होने वाली दूसरी सेवाओं के लिए एक साथ फीस नहीं ले सकेंगी। हालांकि, लॉयल्टी या मेंबरशिप प्रोग्राम में कुछ छूट रहेगी।
- इम्पोर्टेड सामान: विदेश से आने वाले सामान पर उसे भारत में लाने वाले कारोबारी की जानकारी और सामान किस देश का है, यह बताना जरूरी होगा।

ई-कॉमर्स के नियम होंगे और मजबूत
इन नियमों का मकसद ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को गलत कारोबार और धोखाधड़ी से बचाना है। नए नियमों में बदलते ऑनलाइन कारोबार और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। इससे कंपनियों को अपनी जिम्मेदारियां साफ तौर पर पता रहेंगी। इसके अलावा, ग्राहकों को सामान खरीदते समय सही जानकारी और बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
सरकार का कहना है कि ई-कॉमर्स सेक्टर की तरक्की के साथ ग्राहकों की सुरक्षा, साफ जानकारी और सही कारोबार भी जरूरी है। नए नियमों में ग्राहकों और ई-कॉमर्स कंपनियों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। नया Consumer Protection E-Commerce - Amendment Rules, 2026, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।