• NEW DELHI 09 Sept 2026, (अपडेटेड 09 Sept 2026, 6:27 AM IST)
भारत में जूट को गोल्डन फाइबर कहते हैं। जूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत ही है। बेहतर जूट पैदा करने के बाद भी भारत इस इंडस्ट्री का अच्छा निर्यातक नहीं है।
त्रिपुरा के अगरतला में एक जूट फैक्ट्री । Photo Credit: PTI
भारत दुनिया में कच्चे जूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में जूट को 'गोल्डन फाइबर' के तौर पर जाते हैं। देश में सुनहरे रेशे की पहचान लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है। टेक्सटाइल मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 76 लाख गांठ कच्चा जूट और 12.80 लाख मीट्रिक टन जूट सामान का उत्पादन किया।
भारत में दुनिया का 75 प्रतिशत से ज्यादा जूट का उत्पादन होता है। पश्चिम बंगाल, जूट उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। भारत जूट का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। यही वजह है कि अच्छी उपज होने के बाद भी 85 फीसदी जूट की खपत देश के भीतर ही हो जाती है, भारत 14 फीसदी से कम उत्पाद दुनिया को बेच पाता है।
भारत कच्चे जूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत के जूट उद्योग में 3.7 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। दिसंबर 2025 तक, भारत में 120 जूट मिलें काम कर रही हैं। पश्चम बंगाल, जूट उत्पादन का केंद्र है, यहां सबसे ज्यादा जूट मिलें हैं।
भारत में जूट से सजावटी सामान और स्टाइलिश झोले भी बनते हैं। Photo Credit: Textile Ministry
भारत ने दुनिया को कितना जूट बेचा?
भारत में जूट उद्योग से लाखों किसान जुड़े हैं। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 22,700 मीट्रिक टन कच्चा जूट बेचा है, जिसकी कीमत 225.11 करोड़ रुपये के आसपास है। भारत ने 1,71,300 मीट्रिक टन जूट से बनों सामानों को बेचा है, जिससे कुल 3,155.27 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।
भारत जूट विदेश को बेच क्यों नहीं पाता है?
भारत दुनिया में जूट माल बनाने वाला सबसे बड़ा देश है। जुलाई 2026 तक दुनिया के कुल अनुमानित उत्पादन का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत बनाता है। देश में बने माल का सिर्फ 13.36 प्रतिशत हिस्सा ही बाहर बिकता है। वजह यह है कि देश में ही जूट की सबसे ज्यादा खपत भी है।
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में जूट के रेशों को तैयार करता किसान। Photo Credit: PTI
कितना जूट विदेश में हम भेज पाते हैं?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 12.80 लाख टन जूट माल तैयार किया। इसमें से 12.05 लाख टन यानी 94 प्रतिशत माल देश के अंदर ही खर्च हो गया। बाहर सिर्फ 1.71 लाख टन माल गया। इसकी कीमत 3,155.27 करोड़ रुपये थी। कच्चे जूट का निर्यात और भी कम रहा। भारत ने सिर्फ 22,700 टन कच्चा माल विदेश भेजा है। इसकी कीमत 225.11 करोड़ रुपये थी।
कम विदेशी निर्यात की वजह सरकार है?
देश के अंदर इतनी बड़ी खपत की वजह एक सरकारी नियम है। जूट पैकेजिंग कानून के तहत अनाज की 100 प्रतिशत पैकिंग और चीनी की 20 प्रतिशत पैकिंग जूट के बोरे में ही करनी पड़ती है। इससे किसानों और मिलों को पक्का बाजार मिल जाता है। भारत जूट माल में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। देश की जरूरत अपने उत्पादन से पूरी हो जाती है।
पश्चिम बंगाल के नादिया में जूट ढोता एक किसान। Photo Credit: PTI
भारत के जूट उद्योग का 'लीडर' कौन है?
भारत का जूट उद्योग पश्चिम बंगाल पर टिका है। देश में कुल 120 मिश्रित जूट मिलें हैं। इनमें से 89 अकेले पश्चिम बंगाल में हैं। संगठित मिलों और इकाइयों में करीब 3.70 लाख मजदूर काम करते हैं। खेती करने वाले करीब 40 लाख परिवारों की रोजी-रोटी भी इसी से चलती है।
सरकार जूट किसानों के लिए क्या करती है?
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। 2014-15 में यह सिर्फ 2,400 रुपये था। जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया गांवों में सीधे किसानों से खरीद करती है। बाजार भाव गिरने पर किसानों को नुकसान न हो, यही इसका मकसद है।
जूट के तने से रेशा बनाने के लिए तलाब में रखा जाता है। Photo Credit: PTI
जूट की खेती फल-फूल कैसे रही है?
सरकार की मदद से राष्ट्रीय जूट विकास कार्यक्रम के तहत खेती सुधार, नई मशीनें, नए उत्पाद और बाजार बढ़ाने का काम चल रहा है। जूट-आईकेयर योजना से बीज, मशीन और बेहतर गलाने की प्रक्रिया की मदद मिल रही है। छोटे कारीगरों, महिलाओं के समूहों और छोटी इकाइयों को कच्चा माल सस्ते में देने के लिए जूट कच्चा माल बैंक चलाए जा रहे हैं।
जूट अब सिर्फ बोरे तक सीमित नहीं रहा। इससे सड़क, नदी किनारे और पहाड़ियों पर मिट्टी रोकने वाला जूट जियोटेक्सटाइल बन रहा है। कपड़ों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है। 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय टीम ने जूट-विस्कोस मिले कपड़े पहने थे। जूट-स्मार्ट पोर्टल से बोरे की खरीद-बिक्री ऑनलाइन होती है। अब तक इससे 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बोरे खरीदे जा चुके हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) की मदद से फसल की निगरानी सैटेलाइट और मोबाइल ऐप से भी हो रही है।
खास क्यों है जूट?
जूट सस्ता, मजबूत और पूरी तरह सड़ने वाला रेशा है। प्लास्टिक की जगह इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। देश के अंदर इतनी बड़ी मांग होने की वजह से उत्पादन का बड़ा हिस्सा यहीं रह जाता है। दुनिया का 75 प्रतिशत माल बनाने के बावजूद निर्यात का आंकड़ा सीमित दिखता है।