हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रामपुर और रोहड़ू दौरे के दौरान सरकारी कार्यक्रमों के पोस्टर और बैनरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं दिखने पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई थी। इस घटनाक्रम के कुछ ही दिनों बाद वीरभद्र सिंह की जन्मस्थली सराहन में उनकी प्रतिमा के अनावरण के मौके पर 'होली लॉज' गुट से जुड़े नेताओं और समर्थकों का जमावड़ा देखने को मिला। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गलियारों में इस रैली की काफी ज्यादा चर्चा है।

 

इस जमावड़े में वीरभद्र सिंह के बेटे लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आरएस बाली समेत कई नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को महज श्रद्धांजलि समारोह से आगे राजनीतिक महत्व भी दे दिया है। हिमाचल में अगले विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम को वीरभद्र सिंह की विरासत के इर्द-गिर्द कांग्रेस की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव राजा वीरभद्र की राजनीतिक विरासत के ऊपर ही लड़ा गया था। 

 

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कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रामपुर और रोहड़ू दौरे के दौरान वीरभद्र सिंह की तस्वीर और उनके योगदान का उल्लेख नहीं होने पर शुरू हुआ। प्रतिभा सिंह ने सार्वजनिक रूप से इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि वीरभद्र सिंह के निधन को अभी कुछ ही साल हुए हैं और पार्टी इतनी जल्दी उनके योगदान को कैसे भूल सकती है। 

 

प्रतिभा सिंह की नाराजगी केवल तस्वीर तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके बयान में उस राजनीतिक सम्मान का सवाल भी था, जो वीरभद्र सिंह को हिमाचल की राजनीति में हासिल रहा है। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह का प्रदेश के संगठन और चुनावी राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रहा। ऐसे में पोस्टरों से उनकी तस्वीर गायब होना कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, विरासत और सम्मान को लेकर चल रही चर्चाओं का कारण बना। इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप सिंह राठौर ने भी आपत्ति जताई थी, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने इसे चूक मानते हुए भविष्य में ध्यान रखने की बात कही थी।

वीरभद्र गुट हुआ एकजुट

पोस्टर विवाद के बाद सराहन में वीरभद्र सिंह की आठ फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण होली लॉज से जुड़े नेताओं और समर्थकों के लिए एक अहम अवसर बनकर सामने आया। 18 अक्टूबर को रामपुर बुशहर के सराहन स्थित मां भीमाकाली मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह के साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे। आयोजन को वीरभद्र सिंह के प्रति सम्मान जताने के साथ-साथ उनके राजनीतिक आधार और समर्थकों के बीच संबंधों को फिर से प्रदर्शित करने के अवसर के तौर पर भी देखा गया।

 

 प्रतिभा सिंह ने कहा कि सराहन वीरभद्र सिंह की जन्मस्थली है और यहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने की भावना लंबे समय से लोगों के मन में थी। इस तरह जिस विरासत को लेकर कुछ दिन पहले नाराजगी सामने आई थी, उसी विरासत के सम्मान में वरिष्ठ नेताओं का एक मंच पर जुटना महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर बन गया।

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश

प्रतिमा स्थापना की तैयारी में रामपुर उपमंडल की 54 पंचायतों से मिट्टी लाई गई थी। बुशहर स्पोर्ट्स, कल्चर एंड एनवायरनमेंट एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भागीदारी ने वीरभद्र सिंह के क्षेत्रीय जुड़ाव को दिखाने की कोशिस की गई। विक्रमादित्य सिंह ने प्रतिमा अनावरण को परिवार और क्षेत्र के लोगों की सामूहिक भावना से जुड़ा अवसर बताया। वहीं, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने वीरभद्र सिंह को आधुनिक हिमाचल के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला नेता बताया। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर समेत अन्य नेताओं ने भी उनके नेतृत्व और विकास कार्यों को याद किया। 

 

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क्या एकजुट हो रहा होली लॉज गुट?

हिमाचल की राजनीति में राजा वीरभद्र कई दशकों तक कांग्रेस की राजनीतिक के केंद्र में रहे। उनका आवास होली लॉज राजनीतिक गतिविधियों के लिए मशहूर रहा और वीरभद्र के निधन के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनके नाम पर ही 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, चुनाव के बाद उनके बेटे और पत्नी के बजाय पार्टी ने सुखविंदर सिंह सुक्खू को सीएम बनाया। तब से वीरभद्र के समर्थकों को सरकार में असहज माना जा रहा है और अब प्रतिमा और पोस्टर को लेकर शुरू हुए विवाद के कारण गुट फिर से एकजुट नजर आ रहा है। यह गुट अब सिर्फ एकजुट ही नहीं बल्कि और ज्यादा ताकतवर भी नजर आ रहा है। हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए जिनके परिवार को वीरभद्र सिंह का राजनीतिक विरोधी माना जाता था।