उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण के दौरान कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। अभ्यर्थियों को मेडिकल में फिट घोषित करने के नाम पर रुपये मांगने के आरोप में दो डॉक्टरों और उनके चालक को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में करीब तीन लाख रुपये की कथित वसूली की बात सामने आई है। मौके से नकदी मिलने के साथ तीन बैंक खातों में एक लाख रुपये के ऑनलाइन लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं। वहीं, कोर्ट में पेशी से पहले मेडिकल परीक्षण के दौरान आरोपितों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद तीनों को उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले के सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। उधर, प्रशासन ने पहले दिन का मेडिकल परीक्षण निरस्त कर दोबारा कराने का फैसला लिया है। अब अभ्यर्थियों को नई तारीख का इंतजार है।
कानपुर पुलिस लाइन में 15 अक्टूबर को होमगार्ड भर्ती के लिए चयनित अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण किया जा रहा था। पहले दिन करीब 200 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि मेडिकल जांच में उनकी नाक टेढ़ी होने या आंखों में समस्या होने की बात कहकर उन्हें अनफिट घोषित करने की धमकी दी जा रही थी। आरोप है कि मेडिकल में फिट घोषित करने के नाम पर उनसे रुपये मांगे जा रहे थे।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, कथित तौर पर नाक से जुड़ी कमी बताकर 10 से 15 हजार रुपये और आंखों में समस्या बताकर 50 हजार रुपये तक की मांग की जा रही थी। कुछ अभ्यर्थियों को एक पर्ची पर मोबाइल नंबर लिखकर दिया गया और उस पर संपर्क करने को कहा गया। जब अभ्यर्थियों को शक हुआ तो उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते पुलिस लाइन में हंगामा होने लगा।
यह भी पढ़ें: ड्रग ऐक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा को गोली मारने वाला शख्स राजस्थान से गिरफ्तार
3 लाख की वसूली, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के साक्ष्य
पुलिस की शुरुआती जांच में करीब 40 से 45 अभ्यर्थियों से लगभग तीन लाख रुपये की वसूली किए जाने की आशंका सामने आई है। मौके से करीब 30 हजार रुपये नकद बरामद होने की जानकारी है। इसके अलावा तीन अलग-अलग बैंक खातों में लगभग एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। बाकी रकम कहां गई और बैंक खाते किन लोगों के हैं, इसकी जांच की जा रही है। जांच के दौरान चालक के पास से अभ्यर्थियों के नाम और कथित तौर पर उनसे ली गई रकम का हिसाब दर्ज होने वाली सूची मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस इस सूची, अभ्यर्थियों के बयानों और बैंक खातों के लेनदेन के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
यह भी पढ़ें: लखनऊ: ऑक्सीजन सिलेंडर लदी पिकअप डिवाइडर से टकराई, 2 की मौत
दो डॉक्टर और चालक गिरफ्तार
मामले में उर्सला अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार सक्सेना, डॉक्टर महेश द्विवेदी और चालक अजीत को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि अभ्यर्थियों से रुपये लेने के लिए डॉक्टरों की कार का इस्तेमाल किया जा रहा था। विवाद बढ़ने पर अभ्यर्थियों ने विरोध किया और मौके पर मौजूद लोगों के साथ मारपीट भी हुई। इसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर आरोपितों को हिरासत में लिया। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अभ्यर्थियों से कथित तौर पर रुपये लेने और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
कोर्ट ले जाने से पहले बिगड़ी तबीयत, आईसीयू में भर्ती
गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को पुलिस तीनों आरोपितों को कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल परीक्षण के लिए उर्सला अस्पताल लेकर पहुंची। इसी दौरान डॉक्टर प्रवीण कुमार सक्सेना ने सीने में परेशानी होने की शिकायत की। डॉक्टर महेश द्विवेदी ने चक्कर आने की बात कही, जबकि चालक अजीत ने सिर में चोट लगने की शिकायत की।
तीनों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें आईसीयू में रखे जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपितों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे। पुलिस अधिकारियों ने मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने की बात कही है।
पहले दिन का मेडिकल निरस्त, अब नई तारीख का इंतजार
मामले का असर होमगार्ड भर्ती की मेडिकल प्रक्रिया पर भी पड़ा है। जिला होमगार्ड कमांडेंट प्रीति शर्मा के मुताबिक, पहले दिन की मेडिकल परीक्षण प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है और इसे दोबारा कराया जाएगा। होमगार्ड भर्ती के लिए चयनित 1,947 अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण और चरित्र सत्यापन 15 से 29 अक्टूबर के बीच कराया जाना निर्धारित था। पहले दिन करीब 200 अभ्यर्थियों को मेडिकल के लिए बुलाया गया था। कथित वसूली और हंगामे के बाद पहले दिन की प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी।फिलहाल दोबारा मेडिकल परीक्षण शुरू करने की नई तारीख की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को अगले कार्यक्रम का इंतजार करना पड़ रहा है। नई तारीख घोषित होने के बाद ही उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा।
यह भी पढ़ें: बुलंदशहर: पेड़ से टकराई ईको वैन, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत; 3 घायल
भर्ती की पारदर्शिता पर उठे सवाल
होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में मेडिकल परीक्षण कराने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप है कि शारीरिक कमियां बताकर उन्हें अनफिट करने की धमकी दी गई और फिट घोषित करने के नाम पर रुपये मांगे गए। अब पुलिस के सामने कथित वसूली में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने, ऑनलाइन लेनदेन की जांच करने और अभ्यर्थियों की शिकायतों की पड़ताल करने की चुनौती है। यह भी जांच का विषय है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों के पास मोबाइल फोन और अन्य सामान कैसे पहुंचा, जबकि प्रक्रिया के दौरान इन पर रोक होने की बात सामने आई है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है।
