पश्चिम बंगाल के चोरबागान हादसे में अब तक 19 लोगों ने जान गंवा दी है, 25 से ज्यादा लोग घायल हैं। भगदड़ के घायलों में एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने हादसे की वजहों के बारे में अब बताया है कि पंडाल के पास की संकरी सड़क पर भीड़ ज्यादा उमड़ आई थी। बारिश होने की वजह से वह पंडाल के अंदर जाना चाहते थे। वहीं, अंदर मौजूद लोग भी बारिश की वजह से बाहर नहीं आना चाहते थे। पीछे जब भीड़ बढ़ी तो पंडाल में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इसी दौरान कुछ लोग बाहर निकलने के रास्ते के पास सीढ़ियों पर गिर गए। पीछे से आ रहे लोग भी संभाल नहीं पाए और कई लोग भीड़ के नीचे दब गए।
दम घुटने की वजह से ज्यादातर लोगों की जान चली गई। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि गलत अनाउंसमेंट और निजी सुरक्षा गार्डों की सीटी से भी लोगों में भ्रम और अफरा-तफरी बढ़ने की आशंका है। हालांकि, हादसे की असली वजह की जांच अभी जारी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह पीड़ितों के साथ हैं। उन्होंने मृतक पाए गए 19 लोगों में से 13 परिवारों से वन टू वन बात की है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा किया कि मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी पश्चिम बंगाल की सरकार देगी। सरकार घायलों को 5 लाख रुपये देगी और उनके पसंद के किसी भी अस्पताल में इलाज कराने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने घटना की जांच कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित की विशेष जांच टीम करेगी। इस टीम में STF, CID और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
बारिश और भीड़ से कैसे बिगड़े हालात?
हादसे के समय पंडाल के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अचानक बारिश शुरू होने के बाद बाहर खड़े लोग अंदर आना चाह रहे थे। पंडाल में एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों के एंट्री की व्यवस्था थी। जब भीड़ बढ़ी तो पंडाल पर दबाव बढ़ा और उसका एक हिस्सा टूट गया। इसके बाद भगदड़ मच गई। भगदड़ के बाद कुछ लोग नीचे दब गए और उनका दम घुटने लगा। भगदड़ के बाद स्थानीय लोगों ने पीड़ितों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की लेकिन ताजा खबर लिखे जाने तक 19 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। संकरी सड़क और भीड़ ना संभालने की वजह से व्यवस्था पर भी सवाल उठे रहे हैं।
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क्या गलत अनाउंसमेंट है वजह?
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि पंडाल में एंट्री, बाहर निकलने और भीड़ को आगे बढ़ाने से संबंधित अनाउंसमेंट ठीक से नहीं कराए गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब पंडाल में भीड़ बढ़ने लगी तो किसी ने अनाउंसमेंट किया कि इतनी भीड़ होने की वजह से पंडाल गिर सकता है। यह सुनते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। इसके बाद भगदड़ हुई जिसके वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी गलत अनाउंसमेंट को एक संभावित कारण बताया है।
आयोजकों की भूमिका की जांच
आयोजकों पर यह आरोप लगाया जा रहा कि उन्होंने बच्चों को वॉलंटियर के रूप में नियुक्त किया था। जब भगदड़ हुई तो यह बच्चे भीड़ को संभाल नहीं सके। कोलकाता पुलिस यह पता लगा रही है कि भीड़ को संभालने में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। स्थानीय लोगों ने पंडाल में पुलिस की तैनाती को भी कम बताया है। पुलिस ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। आयोजकों और सुरक्षा व्यवस्था में लगे लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
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दूसरे पंडालों की सुरक्षा भी जांचेगी सरकार
हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है। इसमें भीड़ को संभालने, बाहर निकलने के रास्तों, रोशनी और पंडाल की बनावट की जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आयोजकों से सुरक्षा नियमों का पालन करने और रास्तों में भीड़ जमा होने से रोकने की अपील की है।
