उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर खीरी के वरिष्ठ नेता और चार बार विधायक रहे बाला प्रसाद अवस्थी का शुक्रवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अपने पैतृक आवास बेल्तुआ में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से जिले के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। समर्थकों, शुभचिंतकों और राजनीतिक सहयोगियों में दुख का माहौल है। धौरहरा और मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके अवस्थी बीजेपी और बहुजन समाज पार्टी से विधायक रहे थे। उन्होंने बीजेपी के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। क्षेत्र की राजनीति में उनकी एक खास पहचान थी और लोग उन्हें ‘मौसम वैज्ञानिक’ के नाम से भी जानते थे।

बाला प्रसाद अवस्थी लखीमपुर खीरी की राजनीति के जाने-पहचाने चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में अलग-अलग दलों के साथ काम किया और चार बार विधानसभा पहुंचने में कामयाबी हासिल की। धौरहरा विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने पहली बार विधायक बनकर राजनीतिक पारी शुरू की। बाद में उन्होंने मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया। अवस्थी की राजनीतिक पहचान केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रही। वह भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रहे और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन क्षेत्र की राजनीति में उनकी सक्रियता लंबे समय तक बनी रही। उनके निधन को जिले की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

1991 में पहली बार बने विधायक

बाला प्रसाद अवस्थी ने वर्ष 1991 में बीजेपी के टिकट पर धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद वर्ष 1993 में बीजेपी ने उन्हें लखीमपुर खीरी का जिलाध्यक्ष बनाया। संगठन और राजनीति में उनकी भूमिका आगे भी जारी रही।वर्ष 2005 में उन्होंने बीजेपी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया। वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर धौरहरा से चुनाव जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2012 में बसपा ने उन्हें मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया, जहां जीत दर्ज कर उन्होंने तीसरी बार विधायक बनने का मुकाम हासिल किया।वर्ष 2017 में बाला प्रसाद अवस्थी एक बार फिर बीजेपी में लौट आए। उन्होंने धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर चौथी बार विधायक बने। इस तरह उनका राजनीतिक सफर बीजेपी और बसपा के बीच कई अहम पड़ावों से होकर गुजरा।

 

यह भी पढ़ें: बिठूर में BJP की बंपर जीत, राणा समरेन्द्र सिंह जीते; कांग्रेस को सिर्फ 58 वोट

2022 के चुनाव से पहले भी बदला था राजनीतिक रुख

बाला प्रसाद अवस्थी का राजनीतिक सफर दलों के बदलाव को लेकर भी चर्चा में रहा। जनवरी 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। हालांकि, करीब 18 दिन बाद वह फिर बीजेपी में लौट आए। उनके इस फैसले की उस समय राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़ने के बावजूद अवस्थी ने अपने क्षेत्र में राजनीतिक पहचान बनाए रखी। चार बार विधायक बनने का उनका सफर जिले की राजनीति में उनकी पकड़ और चुनावी अनुभव को दर्शाता है।

क्यों कहा जाता था ‘मौसम वैज्ञानिक’?

बाला प्रसाद अवस्थी को लखीमपुर खीरी के गांजर क्षेत्र में ‘मौसम वैज्ञानिक’ के नाम से जाना जाता था। यह नाम उनकी चुनावी राजनीति और राजनीतिक हवा का रुख भांपने की छवि से जुड़ा था। क्षेत्र में उनके बारे में कहा जाता था कि वह चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक माहौल को समझने में माहिर थे। अलग-अलग समय पर बीजेपी और बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने तथा राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपने फैसले लेने के कारण यह उपनाम उनकी पहचान बन गया। धौरहरा से लेकर मोहम्मदी तक उनका राजनीतिक सफर इसी अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए याद किया जाता रहेगा।

 

यह भी पढ़ें: दिव्या मित्तल ने क्यों चुनी मिर्जापुर सदर विधानसभा, समीकरण और रणनीति क्या है?

निधन से समर्थकों और राजनीतिक जगत में शोक

लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे बाला प्रसाद अवस्थी के निधन की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों और परिचितों में शोक छा गया। जिले के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उनके जीवन और राजनीतिक योगदान को याद कर रहे हैं। उनके परिवार और करीबियों के लिए यह बड़ी क्षति है।बाला प्रसाद अवस्थी ने कई दशकों तक लखीमपुर खीरी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। चार बार विधायक, बीजेपी के जिलाध्यक्ष और अलग-अलग राजनीतिक दलों में अपनी पहचान बनाने वाले अवस्थी का निधन जिले के राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त होने जैसा है।