उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए बहुचर्चित पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने भर्ती के समय पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव रहे सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। करीब 12 साल पुराने इस मामले में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है।
जांच में योगेश कुमार की भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। वहीं, उस समय पशुधन विकास मंत्री रहे राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी से संबंधित फाइल शासन में लंबित बताई जा रही है। राजकिशोर सिंह मई 2024 में बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
यह पूरा मामला वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारियों की भर्ती से जुड़ा है। तत्कालीन सपा सरकार के दौरान प्रदेश के 17 मंडलों में कुल 1,198 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए दो फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन को लेकर सवाल उठे और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। बाद में मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और भर्ती में अपनाई गई प्रक्रिया की पड़ताल शुरू हुई।
नियमों को दरकिनार करने के आरोप
जांच में भर्ती प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे। आरोपों के मुताबिक, ओएमआर शीट के मूल्यांकन की केंद्रीकृत व्यवस्था अपनाई गई और मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों को दरकिनार किया गया। चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और मूल्यांकन से जुड़ी कथित गड़बड़ियां जांच के प्रमुख बिंदु बने। एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि भर्ती के दौरान किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं और संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
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हाईकोर्ट के आदेश पर भी हुई जांच
मामले में अभ्यर्थियों की ओर से चयन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी प्रकरण की पड़ताल की। एसआईटी की जांच में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका से जुड़े बिंदु सामने आए। इसके बाद मामले में आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। भर्ती से संबंधित प्रकरण में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और अभियोजन की मंजूरी की प्रक्रिया भी चली।
तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह की फाइल शासन में लंबित
भर्ती घोटाले के समय राजकिशोर सिंह पशुधन विकास मंत्री थे, जबकि योगेश कुमार विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। जांच के दौरान राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी से संबंधित फाइल शासन में लंबित बताई जा रही है। राजकिशोर सिंह बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। हालांकि, अभियोजन की मंजूरी लंबित होने का अर्थ अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित निर्णयों और साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
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गिरफ्तारी से फिर चर्चा में आया पुराना मामला
योगेश कुमार की गिरफ्तारी को लंबे समय से जांच के दायरे में रहे इस मामले में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। ईओडब्ल्यू ने विवेचना के दौरान उनकी भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिलने के आधार पर कार्रवाई की है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर नजर रहेगी। इस प्रकरण का अहम पहलू यह है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और तत्कालीन मंत्री सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ लंबित प्रक्रियाओं में आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
