उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित बहुचर्चित नीला ड्रम केस में आरोपी साहिल और मुस्कान को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद सौरभ की मां रेणु राजपूत ने खुशी जाहिर की है। में जिला कोर्ट ने सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद सौरभ की मां रेणु राजपूत ने खुशी जाहिर की है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। सौरभ का परिवार इस मामले में लंबे समय से न्याय की मांग कर रहा था और दोनों आरोपियों को फांसी की सजा की मांग कर रहा था।
सौरभ की मां ने कहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी यादें आज भी परिवार के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी रिश्ते में साथ रहना संभव न हो, तो अलग हो जाएं, लेकिन किसी की जान न लें। इस फैसले के बाद वह काफी भावुक भी नजर आई।
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दोनों को फांसी की सजा
मेरठ की जिला अदालत ने बुधवार को मुस्कान और साहिल को सजा सुनाई। दोनों को 30 सितंबर को ही हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि सजा देना भी धर्म का एक हिस्सा है। दोनों दोषी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। सौरभ की मां रेणु राजपूत और उनका भाई भी अदालत में मौजूद थे।
क्या बोली सौरभ की मां?
सौरभ राजपूत की मां, रेनू देवी ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'हमें बहुत अच्छा लग रहा है। इस बात का संतोष है कि उन दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। जो इंसाफ हम चाहते हैं, हमें मिल गया है। हम अपने वकीलों, सहयोगियों और स्टाफ के बहुत आभारी हैं। हम हमेशा उनका धन्यवाद करेंगे और उनके कर्जदार रहेंगे। जेल में बंद बेटी से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। रही बात बड़ी बेटी की तो अगर उसके नाना-नानी उसे बिना किसी शर्त के हमें सौंप देते हैं, तो हम उसे अपने साथ रखेंगे।'
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क्या है पूरा मामला?
मार्च 2025 में मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई थी। सौरभ मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में इसकी चर्चा हुई और इसे नीला ड्रम हत्याकांड कहा जाने लगा।
इस मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। अदालत में 126 बार सुनवाई हुई और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। सरकारी पक्ष ने दोनों आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अदालत ने सबूतों के आधार पर मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।
