झीरम घाटी नक्सल अटैक मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया दिया है। अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी। नक्सलियों ने 25 मई 2013 को कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' को निशाना बनाया था। कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से लौट रहा था। तभी घात लगाकर हमला किया गया था।
कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की जान गई थी। इस मामले में 12 अगस्त तक अंतिम दलीलें पूरी हो चुकी थीं। कोर्ट को 31 अगस्त को फैसला सुनाना था। मगर बाद में टाल दिया गया। अब शनिवार यानी 5 सितंबर को 10 आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया है।
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साल 2013 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 31 लोगों की जान गई थी। 101 गवाहियों और 13 साल के इंतजार के बाद जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने शनिवार को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।
इन्हें ठहराया गया दोषी
- प्रमिला मोडियम
- महादेव
- चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना
- सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
- मुक्का मांडवी
- कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
- आयत मरकाम
- मड़कामी देवा
- जोग मड़कामी
- बंजमी सेना उर्फ चमरू उर्फ देंगा
एक आरोपी की हो चुकी मौत
झीरम घाटी अटैक मामले में एनआईए ने नौ आरोपियों के खिलाफ 25 सितंबर 2014 को आरोपपत्र दाखिल किया था। बाद में दो और संदिग्धों को पकड़ा गया तो 28 सितंबर 2015 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली। 101 लोगों ने गवाही दी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। वहीं 33 अन्य नामजद आरोपी फरार है।
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इन दिग्गजों की गई थी जान
झीरम घाटी हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, सलवा जुडूम और पूर्व विधायक मुदलियार समेत 31 लोगों की जान गई थी।
NIA ने की लीपापोती, सही न्याय नहीं हुआ: भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, 'हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन एनआईए की जांच हमेशा विवादित रही। इन जिन लोगों को सजा सुनाई गई, वह कोई प्रथम श्रेणी के नक्सली नेता नहीं थे। जिन नेताओं के नाम एफआईआर में दर्ज थे। उन्हें एनआईए ने हटा दिया। इसमें षड्यंत्रों का कहीं उल्लेख नहीं है। उस समय जो अधिकारी सुरक्षा में तैनात थे, उनके खिलाफ कुछ नहीं हुआ। कुल मिलाकर एनआईए ने लीपापोती की है। सही न्याय नहीं हुआ है।'
भूपेश बघेल के सवाल पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'पांच साल तक उनकी सरकार थी। उन्होंने कुछ क्यों नहीं किया? एनआईए की जांच सही साबित होने के बाद ही कोर्ट ने सजा सुनाई। जब जांच एनआईए को सौंपी गई थी तब केंद्र में यूपीए सरकार थी।'
