उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को घरेलू हिंसा के मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन और विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू स्थित सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (पीडब्ल्यूडीवी एक्ट) के तहत विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई विशेष अदालत कर सकती हैं।
भानवी कुमारी ने लगाए हैं घरेलू हिंसा के आरोप
राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी ने 7 मार्च 2025 को दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने पति पर घरेलू हिंसा, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। मामले की सुनवाई के दौरान जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि इस प्रकरण का निस्तारण चार महीने के भीतर किया जाए।
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रघुराज प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया था कि सांसदों और विधायकों के लिए नामित विशेष अदालत के पास घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। उनका कहना था कि पीडब्ल्यूडीवी अधिनियम के तहत की जाने वाली कार्यवाही मुख्य रूप से सिविल प्रकृति की होती है इसलिए यह जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश कानून के अनुरूप है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पीडब्ल्यूडीवी अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का लाभ मिलता रहेगा और वह अपने खिलाफ पारित किसी भी आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
समन जारी करने के आदेश में दखल से किया था इनकार
राउज एवेन्यू कोर्ट की एसीजेएम ने 8 जुलाई 2024 को जारी समन आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
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राजा भैया और भानवी कुमारी के बीच वैवाहिक विवाद लंबे समय से चल रहा है। दोनों के बीच नवंबर 2022 से तलाक का मामला भी दिल्ली की अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद घरेलू हिंसा मामले में राजा भैया की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
