उत्तर प्रदेश जिला रामपुर के समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर नई एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसी ने यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च और ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में दर्ज पूंजीगत व्यय के बीच 416.14 करोड़ रुपये का अंतर होने का दावा किया है। इसके अलावा सरकारी ठेकों से जुड़ी निर्माण सामग्री के कथित इस्तेमाल, सरकारी धन से कराए गए निर्माण कार्यों और ट्रस्ट को मिले चंदे के स्रोतों पर भी सवाल उठाए गए हैं। नई एफआईआर के बाद मामले में पुलिस जांच का दायरा बढ़ गया है।

रामपुर के अजीमनगर थाने में 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद पुलिस ने आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, दो निजी संस्थाओं और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक साजिश, आपराधिक न्यासभंग और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं। ईडी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेकों से लाभ पाने वाले कुछ ठेकेदारों के माध्यम से धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने सरकारी धन के उपयोग, ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और निर्माण कार्यों के दस्तावेजों की जांच के आधार पर पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी।

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494 करोड़ की निर्माण लागत, खर्च सिर्फ 78 करोड़

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यूनिवर्सिटी की निर्माण लागत और ट्रस्ट के घोषित खर्च के बीच सामने आए अंतर को लेकर है। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग से प्राप्त जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की विभिन्न इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक अपने आयकर रिटर्न में कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया। दोनों आंकड़ों के बीच 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है। ईडी का कहना है कि ट्रस्ट की घोषित आय और खर्च के आधार पर इस अंतर का स्पष्ट हिसाब नहीं मिला है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में इतनी बड़ी रकम कहां से आई और उसका इस्तेमाल किन माध्यमों से किया गया।

85.81 करोड़ के सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच

ईडी की रिपोर्ट में सरकारी ठेकों और यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए निर्माण कार्यों से जुड़ी तीन प्रमुख मदों का उल्लेख है। इनमें करीब 55.8 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री, 23.41 करोड़ रुपये की सरकारी मंजूरी वाले निर्माण कार्य और विधायक, विधान परिषद सदस्य निधि से कराए गए 6.60 करोड़ रुपये के काम शामिल हैं। इन तीनों मदों को मिलाकर कुल राशि 85.81 करोड़ रुपये होती है।

रिपोर्ट में सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पवन कुमार जैन के बयान का हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक, कंपनी को 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे। ईडी ने आरोप लगाया है कि ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाया गया। इसी आधार पर एजेंसी ने कम से कम 55.8 करोड़ रुपये की सामग्री के कथित इस्तेमाल का अनुमान लगाया है।

ठेकेदारों से मिले चंदे पर भी सवाल

जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे की प्रकृति और स्रोत भी जांच के दायरे में हैं। ईडी की रिपोर्ट में एएस एंटरप्राइजेज का उल्लेख है। आरोप है कि करीब 25 करोड़ रुपये के ठेके मिलने के बाद सितंबर 2015 में इस संस्था की ओर से ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा दिया गया। इसके अलावा मेरठ स्थित केएसडी चैरिटेबल ट्रस्ट और सिटी एजुकेशनल सोशल वेलफेयर सोसाइटी से मिले कुल 6.235 करोड़ रुपये के चंदे का भी जिक्र है।

 

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन चंदों का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या इनका सरकारी ठेकों या अन्य वित्तीय लेनदेन से कोई संबंध था। रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के बयानों के आधार पर उसके प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय फैसलों पर नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

27 पुराने मुकदमों से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला

जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी जांच की पृष्ठभूमि में रामपुर के अजीमनगर और कोतवाली थाने में दर्ज 27 पुराने मुकदमों का भी उल्लेख है। इन मामलों में किसानों की जमीन और केंद्र सरकार की शत्रु संपत्ति पर कथित कब्जे सहित विभिन्न आरोप लगाए गए थे। इन्हीं मामलों से जुड़े पहलुओं के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

 

ईडी ने इस साल 19 अगस्त को रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में आजम खान, उनसे संबंधित परिसरों समेत करीब 10 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने वित्तीय दस्तावेजों, लेनदेन और कथित तौर पर सरकारी ठेकों से जुड़े धन के इस्तेमाल की पड़ताल आगे बढ़ाई। अब नई एफआईआर के जरिए इन आरोपों पर पुलिस कार्रवाई का रास्ता भी खुल गया है।

 

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रामपुर जिला जेल में बंद हैं आजम खान

आजम खान फिलहाल रामपुर जिला जेल में बंद हैं। 13 अक्टूबर को ईडी की टीम ने जेल में उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी। पूछताछ का मुख्य केंद्र जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले चंदे, रकम के स्रोत, विभिन्न संस्थाओं के बीच धन के हस्तांतरण और निर्माण कार्यों में उसके इस्तेमाल से जुड़े सवाल थे।

 

आजम खान को पिछले साल फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामले में सजा होने के बाद जेल भेजा गया था। वह रामपुर से 10 बार विधायक रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसका संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है।