हिमाचल की वादियों में अब एनसीसी कैडेट्स के लिए आसमान छूने का सपना हकीकत में बदलने की राह खुल गई है। करीब तीन दशक से जिस सुविधा का इंतजार किया जा रहा था, वह बुधवार को उस समय साकार होने की दिशा में बढ़ी। हिमाचल प्रदेश का पहला एनसीसी माइक्रोलाइट विमान कुल्लू हवाई अड्डे पर उतरा। इस विमान के पहुंचने के साथ ही प्रदेश में एनसीसी कैडेट्स के लिए उड़ान प्रशिक्षण की समर्पित सुविधा विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया।
इस उपलब्धि के पीछे 1 हिमाचल प्रदेश एयर एनसीसी यूनिट, कुल्लू के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर कुनाल शर्मा के पिछले ढाई वर्षों के निरंतर प्रयास रहे हैं। विभिन्न विभागों से समन्वय, वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था, हैंगर निर्माण, सुरक्षा प्रबंध, तकनीकी प्रक्रियाओं और आवश्यक अनुमतियों के बीच रास्ता बनाते हुए उन्होंने इस लंबे समय से लंबित योजना को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई।
विमान को 4 पंजाब एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, लुधियाना के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन बलजिंदर सिंह गिल और विंग कमांडर कुनाल शर्मा उड़ाकर कुल्लू लेकर पहुंचे। यह केवल एक विमान का कुल्लू पहुंचना नहीं है, बल्कि हिमाचल के युवाओं को विमानन प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में बुनियादी सुविधा तैयार होने का संकेत भी है।
यह भी पढ़ें: हिमाचल सरकार की आर्थिक मुश्किलें क्या हैं? DA से पेंशन तक समझिए पूरा मामला
ढाई साल की मेहनत, तीन दशक पुराने इंतजार को मिली दिशा
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में विमानन प्रशिक्षण की अपनी अलग चुनौतियां हैं। यहां दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, संकरी घाटियां, मौसम में तेजी से बदलाव और हवाई अड्डे से जुड़ी सुरक्षा आवश्यकताएं किसी भी विमानन गतिविधि को सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में कुल्लू में एनसीसी माइक्रोलाइट विमान के संचालन की व्यवस्था तैयार करना केवल विमान उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं था।
विंग कमांडर कुनाल शर्मा ने पिछले ढाई वर्षों के दौरान इस दिशा में लगातार काम किया। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य शिक्षा विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), जिला प्रशासन और विमानन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। हैंगर के निर्माण से लेकर विमान की सुरक्षित पार्किंग, निगरानी व्यवस्था और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं तक अलग-अलग स्तरों पर तैयारियां करनी पड़ीं।
इस दौरान वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सीसीटीवी निगरानी सहित जरूरी सुरक्षा प्रबंधों को विकसित करना भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहा। करीब तीन दशक से चली आ रही मांग और प्रयासों के बाद विमान का कुल्लू पहुंचना इस बात को रेखांकित करता है कि ऐसी परियोजनाओं को साकार करने के लिए केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए प्रशासनिक समन्वय, तकनीकी तैयारी और निरंतर प्रयासों की जरूरत होती है।
यह भी पढ़ें: हमीरपुर मेडिकल कॉलेज रैगिंग केस, 7 सीनियर छात्र जांच के घेरे में
कुल्लू की घाटी में विमान उतारने से पहले हुई थी तैयारी
कुल्लू में माइक्रोलाइट विमान का संचालन शुरू करने की दिशा में सुरक्षा और तकनीकी तैयारियों को प्राथमिकता दी गई। नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस), नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और एनसीसी अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। विमान के पहुंचने से लगभग तीन महीने पहले ही संचालन से संबंधित प्रक्रियाओं पर काम शुरू कर दिया गया था। घाटी में उड़ान भरने, निर्धारित सर्किट में विमान संचालित करने और पटियाला से कुल्लू तक विमान लाने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की गईं।
अनुमतियों, निरीक्षणों, स्वीकृतियों और समझौता ज्ञापनों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया। विमान के कुल्लू पहुंचने से पहले विंग कमांडर कुनाल शर्मा और ग्रुप कैप्टन पंकज भारद्वाज ने परीक्षण लैंडिंग भी की थी। इन परीक्षणों से घाटी में विमान संचालन की व्यवहार्यता का आकलन करने और आगे की तैयारियों को दिशा देने में मदद मिली। इस तरह विमान की लैंडिंग से पहले ही सुरक्षा, संचालन और तकनीकी पहलुओं को लेकर जरूरी तैयारियां की गईं, ताकि कुल्लू में विमानन प्रशिक्षण की व्यवस्था को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।
अब प्रशिक्षण के लिए पटियाला जाने की निर्भरता होगी कम
अब तक हिमाचल प्रदेश के एनसीसी कैडेट्स को विमानन संबंधी प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए पटियाला जाना पड़ता था। इससे प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त समय, यात्रा और संसाधनों की जरूरत होती थी। कुल्लू में एनसीसी फ्लाइंग नोड विकसित होने से कैडेट्स को अपने ही प्रदेश में विमानन गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हिमाचल के युवाओं को विमानन प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर जाने पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध होने से प्रशिक्षण गतिविधियों के आयोजन और कैडेट्स की भागीदारी को बेहतर बनाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। हालांकि, कैडेट्स को वास्तविक उड़ान प्रशिक्षण कब और किस कार्यक्रम के तहत मिलेगा, यह संबंधित एनसीसी इकाई की संचालन योजना और निर्धारित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
यह भी पढ़ें: अफवाहों पर भड़के अनुराग ठाकुर, बोले- 'देशहित में करेंगे काम'
पहाड़ी परिस्थितियों में प्रशिक्षण बनेगा खास अनुभव
हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां विमानन प्रशिक्षण को विशेष महत्व देती हैं। ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां और मौसम की बदलती स्थितियां विमानन क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए अलग तरह का अनुभव प्रस्तुत करती हैं। कुल्लू में एनसीसी माइक्रोलाइट विमान की उपलब्धता से कैडेट्स को विमानन से संबंधित तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। इससे उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, तकनीकी समझ और विमानन क्षेत्र के प्रति रुचि विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एनसीसी के माध्यम से युवाओं को भारतीय वायुसेना और नागरिक विमानन से जुड़े करियर विकल्पों की जानकारी देने का भी अवसर मिलेगा। हालांकि, माइक्रोलाइट विमान से प्रशिक्षण प्राप्त करना अपने आप में पायलट लाइसेंस या विमानन करियर की गारंटी नहीं है, लेकिन यह क्षेत्र को समझने और आगे की संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
राज्य शिक्षा विभाग, एएआई और जिला प्रशासन का सहयोग
इस परियोजना को आगे बढ़ाने में राज्य शिक्षा विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और जिला प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। राज्य शिक्षा विभाग की ओर से भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई गई। वहीं, एएआई और जिला प्रशासन के सहयोग से बुनियादी ढांचे तथा अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तैयार करने में मदद मिली। इसके साथ ही विमानन सुरक्षा और संचालन से जुड़ी एजेंसियों के बीच समन्वय ने इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। परियोजना से जुड़े विभिन्न पक्षों के सहयोग ने लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा को स्थापित करने की दिशा में रास्ता तैयार किया।
युवाओं के लिए नए अवसरों की शुरुआत
कुल्लू हवाई अड्डे पर हिमाचल प्रदेश का पहला एनसीसी माइक्रोलाइट विमान पहुंचना राज्य के विमानन प्रशिक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल प्रदेश के युवाओं को विमानन गतिविधियों से जोड़ने और उनके सामने नए करियर विकल्पों की जानकारी पहुंचाने में सहायक हो सकती है। करीब तीन दशक से प्रतीक्षित इस सुविधा को साकार करने की दिशा में विंग कमांडर कुनाल शर्मा के ढाई साल के प्रयासों और विभिन्न सरकारी विभागों तथा विमानन एजेंसियों के सहयोग की अहम भूमिका रही है।
अब अगली चुनौती इस सुविधा का नियमित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना होगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र एनसीसी कैडेट्स को इसका लाभ मिल सके। यदि प्रशिक्षण गतिविधियों को योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाता है, तो कुल्लू में स्थापित यह फ्लाइंग नोड हिमाचल के युवाओं के लिए विमानन की दुनिया से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। तीन दशक का इंतजार खत्म होने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि कुल्लू पहुंचा यह माइक्रोलाइट विमान हिमाचल के कितने युवाओं के उड़ान भरने के सपने को नई दिशा देता है।
