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भाविश अग्रवाल के खिलाफ वारंट जारी, समझिए क्या था पूरा मामला?

स्कूटी से जुड़े एक मामले में जिला उपभोक्ता निवारण आयोग ने भाविश अग्रवाल के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है। पहले उन्हें नोटिस भेजा गया था।

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भाविश अग्रवाल । Photo Credit: PTI

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दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के फाउंडर और सीईओ भाविश अग्रवाल के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह वारंट इसलिए जारी हुआ क्योंकि वह एक उपभोक्ता शिकायत के मामले में आयोग के सामने पेश नहीं हुए, जबकि उन्हें पहले नोटिस भेजा गया था।

 

यह मामला एक ग्राहक प्रीतेश चंद्रकांत घाड़ी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने अगस्त 2023 में ओला एस1 प्रो सेकंड जेन स्कूटर ₹1.47 लाख में खरीदा था। स्कूटर खरीदने के थोड़े समय बाद ही स्कूटर के मोटर से अजीब आवाज आने लगी और टचस्क्रीन ठीक से काम नहीं कर रही थी। इसे ठीक करने के लिए उन्होंने वास्को (गोवा) में ओला के डीलर को दिया लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी स्कूटर का पता नहीं चला। कंपनी से कई बार संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला।

 

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स्कूटी हुई गायब

20 जनवरी 2026 को सुनवाई में आयोग ने कहा कि स्कूटर का पता नहीं चल रहा है, इसलिए ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल को खुद पेश होकर बताना चाहिए कि स्कूटर कहां है और ग्राहक को स्कूटर क्यों नहीं लौटाया गया। उन्हें 4 फरवरी को पेश होने को कहा गया था लेकिन वह आयोग के सामने हाजिर नहीं हुई। इसलिए आयोग ने जमानती वारंट जारी किया।

 

वारंट के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस को भाविश अग्रवाल को गिरफ्तार करके 23 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे मार्गाव (दक्षिण गोवा) में आयोग के सामने पेश करना है। चूंकि यह जमानती वारंट है, इसलिए वे ₹1.47 लाख का बॉन्ड और एक जमानतदार देकर रिहा हो सकते हैं। यह राशि स्कूटर की कीमत के बराबर है।

 

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सेवा में लापरवाही का आरोप

आयोग के अध्यक्ष संजय चोडणकर ने आदेश में कहा कि कंपनी ने ग्राहक से पैसे लिए लेकिन सेवा में लापरवाही बरती। गोवा में ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें आई हैं, जैसे सर्विस में देरी, स्पेयर पार्ट्स न मिलना आदि। इस मामले में ग्राहक ने पूरा पैसा वापस और ₹50,000 मुआवजे की मांग की है।

 

अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी। यह घटना ओला इलेक्ट्रिक के लिए एक बड़ा झटका है, हालांकि, उपभोक्ता अधिकारों को लेकर सख्ती बढ़ रही है।

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