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पहले दूध, अब ब्रेड के दाम बढ़े, कितना महंगा हुआ आपका नाश्ता?

पेट्रोल, डीजल, गैस और दूध की कीमतें हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी हैं। अब महंगे ब्रेड की भी मार आम आदमी पर पड़ी है।

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ब्रेड की कीमतें बढ़ गईं हैं। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

पेट्रोल, डीजल और गैस और दूध के बाद अब आपको एक और झटका लगा है। ब्रेड की कीमतें 5 रुपये प्रति पैकेट बढ़ गई हैं। 14 मई को दूध 2 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ, अब ब्रेड की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। प्लास्टिक पैकिंग के आयातित कच्चे माल, ट्रांसपोर्ट पर आने वाले खर्च और रुपए के गिरते मूल्य ने बेकरी उद्योग पर असर डाला है। 16 मई को मॉडर्न ब्रेड ने अपने बेसिक वेरिएंट्स की कीमत में एक साथ पूरे 5 रुपये बढ़ा दिए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।

ब्रिटानिया और विब्स जैसी अन्य कंपनियां भी जल्द ही दाम बढ़ा सकती हैं। मुंबई में ब्रेड के दाम एक बार फिर बढ़ गए हैं। दूध और पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद अब ब्रेड भी आम लोगों की जेब पर बोझ बन गया है। शहर की बड़ी ब्रेड कंपनी मॉडर्न ब्रेड ने अपने कई प्रकार की ब्रेड की कीमतों में 5 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जल्द ही ब्रिटानिया और विब्स जैसी दूसरी बड़ी कंपनियां भी दाम बढ़ा सकती हैं।

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क्यों बढ़े ब्रेड के दाम?

ब्रेड महंगे होने की सबसे बड़ी वजह पैकिंग के प्लास्टिक का बढ़ता दाम है। भारत इस प्लास्टिक सामग्री को विदेश से आयात करता है। रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो गया है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी ज्यादा हो गया है। नमक, प्रिजर्वेटिव्स और दूसरे सामानों की कीमतें भी बढ़ी हैं। इन सभी खर्चों के कारण कंपनियां अब दाम बढ़ाकर बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं।

दुकानदार क्या कह रहे हैं?

मुंबई में हाल ही में कई ब्रेड ब्रांड महेंगे हुए हैं। सैंडविच ब्रेड (400 ग्राम) की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये हो गई है। होल व्हीट ब्रेड 55 से 60 रुपये, मल्टीग्रेन ब्रेड 60 से 65 रुपये, ब्राउन ब्रेड 45 से 50 रुपये, छोटी सफेद ब्रेड 20 से 22 रुपये और छोटी ब्राउन ब्रेड 28 से 30 रुपये हो गई है। 

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बेकरी इंडस्ट्री का क्या कहना है?

बेकर्स एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि पुरानी कीमतों पर ब्रेड बेचना अब घाटे का सौदा हो गया है। बढ़ती लागत के कारण उन्हें भी दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं में नाराजगी है। लोग कह रहे हैं कि ब्रेड और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो रही हैं, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ गया है। घरेलू बजट संभालना अब और मुश्किल हो रहा है।

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