logo

मूड

ट्रेंडिंग:

क्रेडिट स्कोर क्या है जिससे तय होता है आपका लोन? आज ही समझिए हर बात

क्रेडिट स्कोर तय करता है कि आपको लोन मिलेगा या नहीं और यह नौकरी या घर लेने में भी दिक्कत कर सकता है। अपना स्कोर ठीक रखने के तरीके जानें और आगे की बड़ी परेशानियों से बचें।

AI Generated Image of a man checking his Credit Score

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड यानी CIBIL स्कोर यह बताता है कि आप पैसे के मामले में कितने भरोसेमंद हैं। 'ट्रांसयूनियन सीबीआईएल' (TransUnion CIBIL) नाम की कंपनी भारत की सबसे पुरानी कंपनी है जो आपके लोन और बिल चुकाने के रिकॉर्ड को देखकर 300 से 900 के बीच एक नंबर देती है। यह नंबर ही तय करता है कि आपको लोन मिलेगा या नहीं। ऐसे में आपको ऐसे तरीके जरूर पता होने चाहिए जिससे आप अपना CIBIL स्कोर सही रख सकें।

 

आपका स्कोर ही यह तय करता है कि आपको लोन कितनी आसानी से मिलेगा। अगर आपका स्कोर 300 से 549 के बीच है तो इसे बहुत खराब माना जाता है और इस हालात में लोन मिलना लगभग नामुमकिन होता है। वहीं 550 से 649 के बीच का स्कोर खराब कैटेगरी में आता है जहां लोन मिलने की उम्मीद बहुत कम रहती है। स्कोर 650 से 749 के बीच है तो इसे ठीक-ठाक माना जाता है। हालांकिं इस हालात में आपको लोन तो मिल जाता है लेकिन बैंक ब्याज थोड़ा ज्यादा वसूल सकते हैं। सबसे अच्छी स्थिति तब होती है जब आपका स्कोर 750 से 900 के बीच हो क्योंकि इस स्कोर पर लोन बहुत आसानी से और कम ब्याज दर पर मिल जाता है।

 

यह भी पढ़ें: एक ही बॉन्ड में पैसा लगाना पड़ेगा भारी, नुकसान से बचाएगी बॉन्ड लैडर स्ट्रेटजी

खराब स्कोर का असर

जब भी कोई बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से लोन मांगा जाता है तो सबसे पहले क्रेडिट स्कोर चेक किया जाता है। स्कोर कम होने पर बैंक लोन देने से मना कर देते हैं। अगर होम लोन की बात करें तो 500 से कम स्कोर होने पर आवेदन तुरंत रिजेक्ट हो जाता है। अगर किसी तरह लोन मिल भी जाए तो बैंक उसे जोखिम वाला मानकर बहुत ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। इसका मतलब यह है कि जिस लोन के लिए अच्छे स्कोर वाले को 9% ब्याज देना पड़ता है उसी लोन के लिए खराब स्कोर वाले को 15% या उससे ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इसके अलावा बैंक लोन चुकाने का समय यानी इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) का समय भी कम कर देते हैं जिससे हर महीने जाने वाली किस्त की रकम और बढ़ जाती है और कर्जदार पर बोझ और ज्यादा हो जाता है।

घर और बीमा पर असर

अब सिर्फ बैंक ही नहीं बल्कि बीमा कंपनियां जिसमें फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (FinTech) और बीपीओ बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) जो कॉल सेंटर या डेटा का काम करती हैं भी नौकरी देने से पहले आपका स्कोर देखते हैं। दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में मकान मालिक भी घर किराए पर देने से पहले आपका स्कोर मांगते हैं। खराब स्कोर होने पर या तो घर नहीं मिलता या फिर बहुत ज्यादा सिक्योरिटी का पैसा जमा करना पड़ता है। साथ ही बीमा का प्रीमियम भी महंगा हो जाता है।

 

किसी भी ईएमआई के लेट होने का बुरा असर 7 साल तक क्रेडिट रिपोर्ट पर रहता है। अगर किस्त सिर्फ 30 दिन भी लेट होती है तो स्कोर 100 नंबर तक गिर सकता है। इसके अलावा एक साथ कई बैंकों में लोन के लिए आवेदन करना भी बड़ी गलती है। हर बार बैंक द्वारा रिपोर्ट चेक करने पर 'हार्ड इंक्वायरी' होती है जिससे स्कोर 10 से 15 नंबर और गिर जाता है और यह रिकॉर्ड 2 साल तक रिपोर्ट में दिखता है।

RBI के नए नियम

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 2025 में आम लोगों की परेशानियों को देखते हुए बड़े बदलाव किए हैं। पहली बार लोन लेने वाले लोगों जिन्हें 'न्यू-टू-क्रेडिट' कहा जाता है अब उन्हें लोन के लिए क्रेडिट स्कोर की चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा क्रेडिट स्कोर को अपडेट करने के नियमों में भी तेजी लाई गई है। पहले यह स्कोर महीने में सिर्फ एक बार अपडेट होता था लेकिन अब यह हर महीने की 15 तारीख और महीने के आखिरी दिन अपडेट होता है। 1 जुलाई 2026 से यह सुविधा और बेहतर हो जाएगी और स्कोर हर हफ्ते अपडेट होने लगेगा जिससे सुधार जल्दी दिख सकेगा। इसके साथ ही RBI ने एक और बड़ी राहत दी है कि अब बैंक पेनल्टी पर ब्याज नहीं वसूल सकते। पहले बैंक जुर्माने के ऊपर भी ब्याज लगा देते थे जिससे कर्ज का बोझ बढ़ता जाता था लेकिन अब बैंक सिर्फ एक फिक्स जुर्माना ही ले सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: थोक महंगाई 8% के पार, क्या रोटी, कपड़ा और मकान भी महंगे होने वाले हैं?

स्कोर सुधारने के आसान तरीके

सबसे पहले अपनी ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का बिल हमेशा समय पर भरें क्योंकि स्कोर का सबसे बड़ा हिस्सा इसी से बनता है। दूसरी बात क्रेडिट कार्ड की जितनी लिमिट है उसका 30% से ज्यादा इस्तेमाल न करें क्योंकि ज्यादा खर्च करना सही नहीं माना जाता। तीसरी बात यह है कि एक साथ कई बैंकों में लोन के लिए बार-बार चक्कर न काटें क्योंकि इससे स्कोर और कम हो जाता है। साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट खुद चेक करें। अगर बैंक की तरफ से कोई गलती है तो उसे सही समय पर शिकायत करके ठीक करवा लें।

Related Topic:#Business News

और पढ़ें