स्टार्टअप में पैसा लगाना हमेशा से ही जोखिम का काम माना जाता है लेकिन सभी स्टार्टअप एक जैसे नहीं होते। जिन कंपनियों के पास हर महीने होने वाली स्थिर कमाई होती है जो फालतू के खर्चों से बचती हैं जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत होता है और जिनके पास आगे चलकर मुनाफा कमाने का एक साफ रास्ता होता है उन्हें बाकी कंपनियों के मुकाबले काफी सुरक्षित माना जाता है। आंकड़ों की बात करें तो यह सच है कि लगभग 90 प्रतिशत स्टार्टअप लंबे समय तक बाजार में टिक नहीं पाते हैं।
इनमें से करीब 10 प्रतिशत स्टार्टअप अपने काम के पहले ही साल में बंद हो जाते हैं और लगभग 70 प्रतिशत स्टार्टअप शुरू होने के 5 से 10 साल के अंदर पूरी तरह असफल हो जाते हैं। सीबी इनसाइट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 38 प्रतिशत स्टार्टअप सिर्फ इसलिए बंद हो जाते हैं क्योंकि उनके पास काम चलाने के लिए कैश यानी नकदी खत्म हो जाती है। वहीं 35 प्रतिशत कंपनियां इसलिए फेल होती हैं क्योंकि बाजार में उनके प्रोडक्ट की कोई जरूरत नहीं होती। इसके अलावा 20 प्रतिशत स्टार्टअप बाजार के कड़े मुकाबले के कारण, 19 प्रतिशत गलत बिजनेस मॉडल चुनने के कारण और 18 प्रतिशत अपने प्रोडक्ट की सही कीमत न तय कर पाने की वजह से बंद हो जाते हैं। लेकिन इस बड़े जोखिम के बाद भी कुछ ऐसे मजबूत सेक्टर्स हैं जहां पैसा डूबने का खतरा सबसे कम रहता है।
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इन सेक्टर्स के स्टार्टअप माने जाते हैं सबसे मजबूत
जोखिम के इस माहौल में काम करने के बाद भी मैकिन्से, केपीएमजी, नैसकॉम, गार्टनर और डेलॉयट जैसी दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों की बिजनेस रिपोर्ट बताती हैं कि कुछ अलग-अलग तरह के स्टार्टअप अपने मजबूत बिजनेस मॉडल, बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग और अच्छी कमाई की क्षमता के कारण बहुत भरोसेमंद माने जाते हैं।
B2B SaaS स्टार्टअप: इन्हें सुरक्षा के मामले में सबसे मजबूत माना जाता है। यहां बी2बी का मतलब है 'बिजनेस टू बिजनेस' यानी जो आम ग्राहकों को नहीं बल्कि दूसरी कंपनियों को अपना सामान या सर्विस बेचते हैं। सास का मतलब है 'सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस'। इसका सीधा सा मतलब यह है कि ये कंपनियां कोई सॉफ्टवेयर बनाकर उसे सीधे बेचती नहीं हैं बल्कि इंटरनेट के जरिए अपनी सॉफ्टवेयर सेवाएं इस्तेमाल करने के लिए देती हैं। का काम सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता है यानी ग्राहकों को इसे इस्तेमाल करने के लिए हर महीने या साल में एक तय फीस देनी होती है। इससे कंपनियों को हर महीने एक तय और नियमित आय मिलती रहती है। इनका फालतू खर्च बहुत कम होता है और इंटरनेट के जरिए इनकी पहुंच पूरी दुनिया के बाजार तक होती है।
फिनटेक स्टार्टअप: फिनटेक का मतलब फाइनेंस और टेक्नोलॉजी से मिलकर बना है। ये कंपनियां डिजिटल पेमेंट्स, लोन देने और पैसा निवेश करने जैसी सेवाएं देती हैं। चूंकि यह पूरा के पूरा सेक्टर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के कड़े नियमों के तहत काम करता है, सरकारी नियमों के कारण इन कंपनियों में कामकाज का तरीका बहुत बेहतर और साफ-सुथरा रहता है। हालांकि, इस सेक्टर के उन स्टार्टअप में जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है जो बिना किसी गारंटी के लोगों को लोन बांटने का मॉडल चलाते हैं।
हेल्थटेक स्टार्टअप: यह टेक्नोलॉजी की मदद से स्वास्थ्य और इलाज से जुड़ी सेवाएं देने वाले स्टार्टअप होते हैं। बीमारी और सेहत से जुड़ी चीजों की मांग बाजार में हर परिस्थिति में हमेशा बनी रहती है, चाहे मंदी ही क्यों न हो। यही कारण है कि ऑनलाइन डॉक्टर से सलाह लेना, जांच सेवाएं देना और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रखने वाले स्टार्टअप में लगातार अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है।
एंटरप्राइज एआई स्टार्टअप: ये स्टार्टअप बड़ी-बड़ी कंपनियों जिन्हें एंटरप्राइज कहा जाता है को उनके काम आसान करने के लिए सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सॉल्यूशंस बेचते हैं। चूंकि बड़े क्लाइंट्स इनके साथ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट करते हैं, इनकी होने वाली कमाई का अंदाजा पहले से रहता है और इनकी आय हमेशा स्थिर बनी रहती है।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन स्टार्टअप: लॉजिस्टिक्स का मतलब सामान को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाने और उसकी देखरेख करने का बिजनेस है। ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लगातार बढ़ने के कारण इस सेक्टर की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। इस वजह से इन स्टार्टअप को काम करने के लिए लगातार बड़े और स्थायी बिजनेस क्लाइंट्स मिलते रहते हैं।
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सुरक्षित स्टार्टअप पहचानने के 5 सबसे आसान तरीके
अगर आप एक मजबूत और सुरक्षित स्टार्टअप की पहचान करना चाहते हैं तो एक्सपर्ट्स कुछ बहुत ही आसान बातें देखने की सलाह देते हैं। सबसे पहले तो कंपनी की कुल कमाई हर महीने या हर साल लगातार बढ़नी चाहिए। दूसरी बात यह है कि कंपनी को अपना कोई भी एक सामान या सर्विस बेचने पर सीधे तौर पर फायदा होना चाहिए, न कि अपनी जेब से घाटा उठाना पड़े।
तीसरी बड़ी बात यह है कि कंपनी अपने रोज के काम को चलाने के लिए फालतू में पैसा बर्बाद न कर रही हो। इसके अलावा कंपनी को शुरू करने और चलाने वाले लोगों के पास उस बिजनेस का पुराना और अच्छा अनुभव होना बहुत जरूरी है। सबसे आखिरी बात यह है कि कंपनी के पास भविष्य में मुनाफा कमाने की एक बिल्कुल साफ और सीधी योजना होनी चाहिए। इन आसान बातों को समझकर ही एक सुरक्षित स्टार्टअप की पहचान की जा सकती है।