अक्सर जब आपके हाथ में कोई भी नोट आता है तो उस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लिखा होता। नोटों की छपाई का काम यही बैंक करता है। देश के बाकी बैंकों को लोन देना हो, नियम बनाने हों या फिर देश की मौद्रिक नीति तय करनी हो तो RBI की ही भूमिका अहम होती है। अब इसी RBI ने एक साल में 4 लाख करोड़ रुपये कमा लिए। ना तो आपके पैसे इस बैंक में जमा होते हैं, ना ही यह बैंक आपको लोन देता है, फिर इस बैंक ने इतने पैसे कहां से कमा लिए? रोचक बात है कि नोटों की छपाई पर सिर्फ लगभग 6 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए और सालाना खर्च बहुत कम रहा इसके चलते ज्यादातर पैसे बच ही गए।
RBI देश के बैंकों का बैंक है यानी जैसे हम अपने पैसे बैंकों में जमा करते हैं, वैसे ही ये बैंक अपने पैसे RBI में जमा करते हैं। ये बैंक RBI से लोन भी लेते हैं। इसके अलावा, RBI का काम नोटों की छपाई करना, मनी सप्लाई बरकरार रखना और बैंकों के कामकाज पर नजर रखना है। RBI जगह-जगह निवेश करके भी पैसे कमाता है और यही पैसे वह दूसरे बैंकों को लोन के रूप में भी देता है। बैंकों को दिए लोन और अन्य जगहों पर किए गए निवेश से भी उसकी भरपूर कमाई होती है। अपने मुनाफे के ये पैसे RBI केंद्र सरकार को दे देता है।
कैसे चलता है RBI का कामकाज?
RBI के कई दफ्तर हैं जो देश के अलग-अलग राज्यों में हैं। इसके अलावा, प्रिंटिंग प्रेस हैं जहां नोट छापे जाते हैं। इन सब कामों के लिए RBI को पैसों को जरूरत पड़ती है। अब कमाई के लिए RBI भारी भरकम राशि का निवेश देश और विदेश में करता है। विदेशी मुद्रा के लेनदेन से भी आरबीआई को कमाई होती है। RBI की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा इसी विदेशी मुद्दा का लेन देन से ही आता है।
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RBI का सबसे बड़ा खर्च दूसरे बैंकों को लोन देने पर होता है। इसके अलावा, कर्मचारियों की सैलरी और नोटों की छपाई पर भी पैसे खर्च होते हैं।
कमाई और खर्च का ब्योरा?
अगर साल 2025-26 के ही आंकड़े देखें तो भारतीय मुद्रा में किए गए निवेश से एक साल में RBI को 1,17,740 करोड़ रुपये की कमाई हुई। विदेशी मुद्रे में किए गए निवेश से साल भर में 27,407 करोड़ की कमाई हुई। इसके अलावा विदेशी मुद्रा के लेनदेन से आरबीआई को सालभर में कुल 1,68,906 करोड़ रुपये की कमाई। सालाना कमाई 4,27,684 करोड़ रुपये हुई। इससे पहले 2024-25 में 3,38,308 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी।
अगर खर्च की बात करें तो नोट छापने पर 2025-26 में 4875 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि पिछले साली यानी 2024-25 में 6373 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कर्मचारियों की सैलरी, वेतन और अन्य चीजों पर 2025-26 में 10,136 करोड़ रुपये खर्च हुए। सबसे ज्यादा 1,09,380 करोड़ रुपये देश के बैंकों को लोन देने पर खर्च हुए। इस तरह आरबीआई का सालाना खर्च 1,41,092 करोड़ रुपये खर्च हुए।
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मतलब कमाई हुई 4,27,684 करोड़ की और खर्च हुए 1,41,092 करोड़ रुपये। इस तरह कुल 2,86,588 करोड़ रुपये बच गए। ये सारे पैसे केंद्र सरकार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। 2024-25 में RBI ने केंद्र सरकार को इसी तरह 2,69,590 करोड़ रुपये दिए थे। नियम यही है कि जो भी पैसे बचते हैं वे केंद्र सरकार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। हालांकि, RBI का मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं है लेकिन कमाई ज्यादा और खर्च होने के चलते मुनाफा होता ही है।
बढ़ती जा रही कमाई
कमाई और खर्च के आंकड़ों को देखें तो 2025-26 में RBI की कमाई में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसमें से एक तिहाई पैसे ही खर्च हुए और बाकी के पैसे बच गए। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और इसके लिए RBI विदेश मुद्रा खूब बेची है। अब डॉलर महंगा हो गया इसलिए भी RBI को खूब फायदा हुआ। यही वजह है कि विदेशी मुद्रा के लेनदेन से आरबीआई को जबरदस्त फायदा हुआ है। पिछले साल की तुलना में देखें तो विदेशी मुद्रा के लेनदेन से होने वाली कमाई में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।