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कैब बुकिंग के टाइम टिप नहीं मांग पाएंगी कंपनियां, सरकार ने दिया बंद करने का आदेश

सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो में कैब बुक करते समय एडवांस टिप देने वाला फीचर बंद कर दिया है। अब लोगों पर जल्दी गाड़ी पाने के लिए ज्यादा पैसे देने का दबाव नहीं रहेगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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कई बार देखा जाता है कि कैब बुक करते समय 10-20 रुपये टिप देकर बुकिंग करने का भी विकल्प आता है। अब सरकार ने इसे बंद करने का आदेश दिया है। इसी को रोकने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) यानी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बड़ी कैब कंपनियों के लिए एक नया नियम बनाया है। सरकार ने इन सभी कंपनियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे अपने ऐप से एडवांस टिप वाला फीचर तुरंत हटा दें। इस नए फैसले का मुख्य मकसद यह है कि जब लोग कहीं जाने के लिए कैब बुक करें तो उनके ऊपर जल्दी गाड़ी पाने के लिए ज्यादा पैसे देने का दबाव बिल्कुल न बने। 

 

सरकार चाहती है कि सभी यात्रियों को बिना किसी परेशानी और दबाव के सही तरीके से कैब मिले और किसी भी ग्राहक से गलत तरीके से पैसे न वसूले जाएं। इस नियम के आने से अब कैब बुक करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और पहले से चली आ रही सभी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।

 

यह भी पढ़ें: कभी कैशबैक तो कभी रिवॉर्ड पॉइंट्स, कंपनियों को ये सब बांटकर क्या फायदा होता है?

एडवांस टिप से जुड़े 5 जरूरी सवाल

1. सरकार ने कैब एप्स को लेकर क्या नया निर्देश दिया है?

 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने आदेश जारी कर सभी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने मोबाइल एप्स से बुकिंग के दौरान टिप मांगने वाले सभी प्रॉम्प्ट्स और ऑप्शंस को हटाने के लिए कहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बुकिंग स्क्रीन पर टिप या एड-ऑन का विकल्प देना नियमों के खिलाफ है।

 

2. सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा, क्या शिकायतें थीं?

 

सरकार को लगातार ऐसी रिपोर्ट मिल रही थीं कि कैब कंपनियां अपनी एप्स पर 'एडवांस टिप', 'एड-ऑन चुनें' और 'जल्दी गाड़ी मिलने के चांस बढ़ाएं' जैसे मैसेज दिखा रही हैं। कुछ एप्स यात्रियों को यह भी कह रही थीं कि अगर वे टिप जोड़ेंगे, तो ड्राइवर के राइड स्वीकार करने की संभावना ज्यादा होगी। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत माना है।

 

3. मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस के नियम इस बारे में क्या कहते हैं?

 

मंत्रालय ने गाइडलाइंस के एक खास नियम का हवाला दिया है जिसके मुताबिक यात्रियों के पास यात्रा पूरी होने के बाद ही ड्राइवर को अपनी मर्जी से टिप देने का अधिकार है। यात्रा शुरू होने या बुकिंग के समय टिप का कोई प्रावधान नियमों में नहीं है।

 

4. क्या ड्राइवर को मिलने वाली टिप में से कैब कंपनियां अपना कमीशन काट सकती हैं?

 

नहीं, सरकार की गाइडलाइंस में स्पष्ट कहा गया है कि टिप की 100% राशि सीधे ड्राइवर के खाते में क्रेडिट होनी चाहिए। कंपनियां इसमें से किसी भी तरह की कटौती नहीं कर सकतीं।

 

5. एडवांस टिप के मामले को सरकार ने किस कानून के तहत गलत माना?

 

एडवाइजरी के मुताबिक, एप में कोई भी ऐसा टिपिंग फीचर या मैकेनिज्म नहीं दिया जा सकता जो भ्रामक हो या ग्राहकों को इन्फ्लुएंस करता हो। यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन है।

 

यह भी पढ़ें: एक ही प्रोडक्ट के कई ऑप्शन, कंपनियों को इससे क्या फायदा है?

दूसरी जरूरी बातें और नियम

सरकार के नए आदेश के बाद अब ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब कंपनियों को अपने ऐप में बड़ा बदलाव करना होगा जिससे कैब बुक करते समय एडवांस टिप देने या अतिरिक्त पैसे जोड़ने का विकल्प पूरी तरह से हटा दिया जाए। अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती है तो सरकार उन पर जुर्माना लगा सकती है और कड़ी कार्रवाई भी कर सकती है। नए नियम के आने के बाद ऐप पर ऐसा कोई भी मैसेज या ऑप्शन नहीं दिखेगा जिसमें यह लिखा हो कि ज्यादा पैसे देने से कैब जल्दी मिल जाएगी या ड्राइवर जल्दी आ जाएगा। 

 

इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी बारिश या ऑफिस के पीक ऑवर्स में कैब बुक करते समय यात्रियों को जो 10 से 100 रुपये तक एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ते थे उससे राहत मिलेगी। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि टिप देना हमेशा के लिए बंद हो गया है,  सफर पूरा होने के बाद यदि आपको ड्राइवर का व्यवहार या सर्विस अच्छी लगती है तो आप अपनी मर्जी से उसे टिप दे सकते हैं और राइड खत्म होने के बाद टिप देने का यह ऑप्शन पहले की तरह चालू रहेगा।

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