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बंदरगाहों पर पड़ा है सामान, युद्ध की क्या कीमत चुका रहे भारत के कारोबारी?

ईरान और इजरायल के युद्ध के बीच भारत के कारोबारियों की सांसें अटकी हुई हैं। जो सामान भेजा गया था वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण लौट रहा है और बंदरगाहों पर पड़ा है।

shipping companies are facing loss

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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दुनियाभर के देशों से सामान मंगाने या उन देशों में सामान भेजने के लिए सबसे आसान और सस्ता रास्ता समुद्रों से होकर गुजरता है। यह रास्ता कई देशों से होकर गुजरता है और अगर इन्हीं देशों में ही झगड़ा हो जाए, बम गिरने लगें और मिसाइलें चलने लगें तो समुद्री रास्ता बाधित होता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों पश्चिमी एशिया के देशों में हो रहा है जिसके चलते भारत के ट्रांसपोर्टर, शिपिंग कारोबारी और आयातक-निर्यातक परेशान हैं। सरकार की ओर से लगातार कोशिशें हो रही हैं लेकिन बिना युद्ध रुके इसके जो रास्ते निकलने भी हैं, उनके चलते कारोबारियों की ही जेब ढीली होनी है। अभी भी हर दिन कारोबारियों का नुकसान हो रहा है और उनके सामान रास्ते में ही फंसे हुए हैं।

 

इन दिनों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया गया है जिसके चलते खाड़ी देशों से भारत का संपर्क लगभग टूटा हुआ है। कई देशों के एयरस्पेस भी बंद हैं तो दूसरे रास्ते से भी जरूरी चीजें नहीं पहुंचाई जा सकती हैं। इसका असर भारत के उन कारोबारियों पर पड़ रहा है जो खाड़ी के देशों में अपना सामान बेचते हैं या वहां से कच्चा माल खरीदकर अपना कारोबार चलाते हैं। समस्या यह है कि बड़े-बड़े कंटेनर की ढुलाई करने वाली शिपिंग कंपनियों के जहाज ना तो आ पा रहे हैं और ना ही जा पा रहे हैं। ऐसे में भारत के तमाम शिपिंग कारोबारी परेशान हैं। आइए इनकी समस्या समझते हैं।

अब क्या बदल गया है?

खाड़ी देशों में जारी टकराव के चलते कई शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर से भी गुजरने वाले जहाजों का रास्ता बदला है। अब ये जहाज केप ऑफ गुड होप से होकर गुजारे जा रहे हैं। इसमें कम से कम दो हफ्ते ज्यादा लगते हैं और किराया भी बढ़ जाता है। वहीं, पर्शियन खाड़ी में जाने वाले जहाजों को तो पूरी तरह रोक दिया गया है। इसका असर उन कारोबारियों पर हो रहा है जिनका सामान फंसा हुआ है। उदाहरण के लिए- फ्रांस की शिपिंग कंपनी CMA CGM ने एलान किया है कि जिन लोगों के सामान शिप पर हैं और वे शिप फंसे हुए हैं, उन लोगों को अतिरिक्त किराया देना होगा।

 

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यह किराया 20 यूनिट वाले ड्राई कंटेनर के लिए 2000 डॉलर एक्स्ट्रा और 40 यूनिट वाले कंटेनर के लिए 3000 डॉलर एक्स्ट्रा होगा। वहीं, खास सामानों के लिए यह किराया 4000 डॉलर एक्स्ट्रा तक भी जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर ईरान, बहरीन, कुवैत, यमन, कतर, ओमान, UAE, सऊदी अरब, जोर्डन, मिस्र और सूडान डैसे देशों पर होगा।

क्या झेल रहे कारोबारी?

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण भारत के जिन कारोबारियों ने खाड़ी देशों के लिए सामान भेजे थे, उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। व्यापारियों को थोड़ी राहत देने के लिए भारत सरकार ने कस्टम्स के नियमों में ढील देने का एलान किया है। यह ढील 15 दिनों तक लागू रहेगी ताकि होर्मुज बंद होने के चलते लौट रहे जहाज वापस आ जाएं। भारत के सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्ट्मस (CBIC) ने कहा है कि लौटने वाले कंटेनर के शिपिंग बिल और सील चेक किए जाएंगे। जिनके सील टूट होंगे उनकी गहन जांच होगी।

 

इससे पहले भारत सरकार ने बंदरगाहों को अनुमति दी थी कि खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले कंटेनर्स को स्टोर करके रख लें। इसका असर यह हुआ है कि कई बंदरगाहों पर ऐसे हजारों कंटेनर जमा हो गए हैं जिन्हें अरब के देशों में भेजा जाना है। अब इनमें फंसे सामान समय से नहीं पहुंचते हैं तो कई सामान खराब भी हो सकते हैं। यही वजह है कि बंदरगाहों को यह भी कहा गया है कि वे ऐसे कंटेनरों को तरजीह दें जिनमें खराब होने वाले सामान भरे गए हों। 

 

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सबसे ज्यादा परेशान फल और सब्जियों के कारोबारी हैं क्योंकि उन्हें एक सीमित समय के लिए स्टोर रखा जा सकता है। कई ऐसे सामान हैं जिन्हें तय समय पर पहुंचना होता है। देरी होने पर कारोबारियों को नुकसान होता है। ऐसे में कई कारोबारी अपना सामान वापस लेकर लोकल मार्केट में बेचने की कोशिश भी कर रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि उन्हें अपना माल औनी-पौनी कीमत पर बेचना पड़ रहा है।

 

इस बारे में एक प्याज निर्यातक अशोक कार्पे कहते हैं, 'प्याज जैसी चीजों को रखने वाले कंटेनर काफी महंगे पड़ते हैं। अब कई दिन से इन्हें यहीं रखने से लागत ही महंगी होती जा रही है। ये बिजली से ही चलते हैं इसलिए हर दिन बिजली का खर्च भी बढ़ जा रहा है।'

कैसे होता है कारोबार?

 

भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिनलाडु समेत तमाम तटीय राज्यों में बड़े-बड़े बंदरगाह बने हुए हैं। देशभर से सामान इन बंदरगाहों तक पहुंचता है। ठीक वैसे ही जैसे आप कूरियर भेजते हैं और कूरियर कंपनी उसे आपसे लेकर इकट्ठा करती है और फिर उसे एक बड़ी गाड़ी में भेज दिया जाता है। इसी तरह बंदरगाहों पर इकट्ठा हुआ सामान बड़े-बड़े कंटनेरों में भरा जाता है और ये कंटेनर भारी-भरकम समुद्री जहाजों पर लादे जाते हैं। अब खाड़ी के देशों में जाने वाला सामान अरब सागर होते हुए ओमान की खाड़ी और फिर पर्शिया की खाड़ी पहुंचता है। वहीं से अलग-अलग देशों के बंदरगाहों तक सामान जाता है।

 

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अगर यही सामान अफ्रीका, यूरोप या अमेरिकी देशों में जाना होता है तो अरब सागर से होते हुए एडेन की खाड़ी पहुंचता है, वहां से लाल सागर और फिर स्वेज की खाड़ी और स्वेज नहर होते हुए भूमध्य सागर पहुंचता है। यहां से ये जहाज स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर का पार करके अटलांटिक महासागर पहुंचता है और अमेरिका दे बंदरगाहों तक जाता है। इन देशों से आने वाला सामान भी इन्हीं रास्तों से होकर आता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है तो अरब देशों से होने वाला कारोबार प्रभावित होता है और अगर किसी भी कारण से स्वेज नहर बंद हो जाए तो अमेरिका और यूरोप के देशों से होने वाला कारोबार प्रभावित होता है। 

 

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