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भारत के पैसे चूस रहा सेमीकंडक्टर, नीति आयोग ने क्या सलाह दी?

तेजी से बदलती टेक्नॉलजी की दुनिया में सेमीकंडक्टर एक ईंधन बनता जा रहा है। तेल जैसे ईंधन की तरह ही सेमीकंडक्टर के मामले में भी भारत आयात पर ही निर्भर है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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डिजिटल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस युग में सबसे अहम चीज सेमीकंडक्टर बन गया है। भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कई अभियान शुरू किए हैं। अब इसी पर नीति आयोग की एक रिपोर्ट आई है जो यह बताती है कि सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों के आयात पर भारत को भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है और इससे देश की विदेशी मुद्रा पर भी असर पड़ रहा है। पिछले 8 साल में ही भारत ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये से सेमीकंडक्टर उत्पादों का आयात किया है। पिछले दो साल से यह देखा जा रहा है कि हर साल लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा आयात किया जा रहा है।

 

मौजूदा वक्त में इलेक्ट्रिक गाड़ियों, सॉफ्टेवयर आधारित गाड़ियों, AI- बेस्ड डिवाइस, AI बेस्ड कंप्यूटिंग, हाई टेक सर्वर सिस्टम, डेटा प्रोसेसिंग यूनिट, डेटा सेंटर, हेल्थ सेक्टर, खेती और नेटवर्क बेस्ड सिस्टम को चलाने में सबसे ज्यादा जरूरत सेमीकंडक्टर और उससे बनने वाले उत्पादों की होती है। इसी का नतीजा है कि भारत ही नहीं दुनियाभर में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। 2024 में वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर का मार्केट 631 बिलियन डॉलर का था जिसके 2030 तक 1029 बिलियन डॉलर और 2035 तक 1547 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

 

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नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि अडवांस पैकेजिंग, चिपलेट निर्माण, कम बिजली पर चलने वाले चिप की डिजाइनिंग करके और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए GaN और SiC बेस्ड चिप बनाकर भारत आगे बढ़ सकता है। नीति आयोग ने यह भी कहा है कि भारत को तत्काल इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि भारत पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, आने वाले समय में इससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और विदेशी मुद्रा का भंडार प्रभावित हो सकता है।

कितना हो रहा खर्च?

NITI आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, सेमीकंडक्टर के मामले में भारत पूरी तरह से आयात पर आश्रित है इसका असर पिछले कुछ साल में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर अच्छा-खासा पड़ा है। पिछले 8 साल में भारत ने सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों के आयात पर 150 बिलियन डॉलर यानी लगभग 14.34 लाख करोड़ रुपये का आयात किया है। नीति आयोग का अनुमान है कि जिस तरह से सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उससे आगे आने वाले समय में इसका आयात और उस पर होने वाला खर्च और भी बढ़ने वाला है।

 

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अगर पिछले 8 साल के आंकड़े देखें तो हर साल पिछले साल की तुलना में आयात में इजाफा हुआ है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों के आयात में साल 2021 में 11.9 प्रतिशत, 2022 में 21.6 प्रतिशत, 2023 में 19.9 प्रतिशत, 2024 में 28.7 प्रतिशत और 2025 में 30.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अनुमान है कि अगर इसी रफ्तार से बढ़ोतरी होती रही तो 2035 तक सालाना आयात 240 बिलियन डॉलर 23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

क्या है नीति आयोग की सलाह?

नीति आयोग का मानना है कि मौजूदा वक्त में भारत वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसके पास क्षमता भी है। ऐसे में नीति आयोग की सलाह है कि भारत को सबसे पहले इस क्षेत्र में अपनी जरूरत खुद पूरी करने के लिए काम करने की जरूरत है। उसके बाद वह ग्लोबल सप्लाई चेन में अपना योगदान दे सकता है। 

 

नीति आयोग की सलाह है कि भारत को AI के लिए बनने वाले चिप के डिजाइन, ग्लोबल चिप मार्केट में 10-13 पर्सेंट की हिस्सेदारी, साल 2030 तक अपनी जरूरत में से 15-25 पर्सेंट चिप का उत्पादन खुद करने और 5G/6G के लिए चिप बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

 

इस रिपोर्ट में नीति आयोग का मानना है कि अगर भारत ऐसा करने में कामयाब होता है तो वह अपनी जरूरत खुद पूरी करके आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा। हालांकि, नीति आयोग ने यह भी माना है कि संसाधन, पैसे, टैलेंट और टेक्नॉलजी की कमी जैसी बाधाओं के चलते यह सफर आसान नहीं होने वाला है।   

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