अमेरिका के वॉल स्ट्रीट की जानी-मानी वित्तीय कंपनी गोल्डमैन सैक्स में बड़े स्तर पर बदलाव की नींव रखी जा रही है। अगर सब कुछ प्लान के हिसाब से होता है तो लगभग तीन दशकों से बैंक से जुड़े 57 साल के जॉन वाल्ड्रॉन कंपनी के अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप मे कमान संभालेंगे। जॉन लंबे समय से मौजूदा CEO डेविड सोलोमन के साथ काम कर रहे हैं। बैंक में बडे़ बदलाव को आकार देने में उनकी अहम भूमिका रही है।
जॉन वाल्ड्रॉन का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। एक समय में मैथ्स में कमजोर होने के कारण ही गोल्डमैन ने उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था। लेकिन आज वहीं बैंक के सबसे ताकतवर पदों में से एक पर हैं।
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करियर की शुरुआत
जॉन वाल्ड्रॉन का बचपन क्लीवलैंड और फिलाडेल्फिया में बीता। उन्होंने वर्मोंट के मिडिलबरी कॉलेज से इंग्लिश में बीए की डिग्री ली है। शुरुआत में वह लेखक बनना चाहते थे। कॉलेज पूरा होने के बाद पहली बार उन्होंने गोल्डमैन सैक्स में ही नौकरी के लिए अर्जी डाली थी। यहां उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। वह मैथ्स और अकाउंटिंग स्किल्स में कमजोर होने के कारण वित्तीय मॉडलिंग टेस्ट पास नहीं कर पाए थे।
रिजेक्शन के बाद जॉन ने 'Bear Stearns' नाम की फर्म में काम करना शुरू किया। वहां पर उन्होंने अच्छे से काम सिखा और फिर पीछे कभी भी मुड़ कर नहीं देखा। खास बात यह है कि यहीं पर उनकी मुलाकात डेविड सोलोमन से हुई थी। 2000 से 2018 के दौरान उन्होंने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग डिपार्टमेंट में कई बड़े पदों पर काम किया और धीरे-धीरे टॉप मैनेजमेंट तक पहुंचे।
सोलोमन और वाल्ड्रॉन की जोड़ी
अक्टूबर 2018 में जब डेविड सोलोमन CEO बने। उसी दौरान जॉन वाल्ड्रॉन को प्रेसिडेंट और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) नियुक्त किया गया। जनवरी 2025 में दोनों को 8 करोड़ डॉलर का रिटेंशन बोनस दिया गया। इसके बाद फरवरी में जॉन को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया। इससे पहले उन्होंने एक अन्य एसेट मैनेजर कंपनी 'अपालो' का ऑफर भी ठुकरा दिया था। COO के तौर पर जॉन ने 'OneGS 3.0' नाम से एआई-आधारित योजना बनाई। इसका मकसद ऑटोमेशन के जरिए बैंक की कार्यकुशलता और कमाई को बढ़ाना था।
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जॉन अपनी काम करने के तरीके के लिए जाने जाते हैं। बिजनेस और पारिवारिक समय में संतुलन बनाए रखने के लिए वह अपने कैलेंडर में अलग-अलग कलर का इस्तेमाल करते हैं। वह शादीशुदा हैं और उनके 6 बच्चे हैं। गोल्डमैन सैक्स के अलावा वह अटलांटिक काउंसिल, यूएस-चीन बिजनेस काउंसिल, क्लीवलैंड क्लिनिक, लिंकन सेंटर और मिडिलबरी कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थानों के बोर्ड में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।