logo

मूड

ट्रेंडिंग:

उद्योगपति या किसान, किसका ज्यादा कर्ज हुआ Write Off? हो गया खुलासा

केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 5 साल में बड़ी कंपनियों का लोन Write Off किए जाने में कमी आई है और कृषि क्षेत्र में थोड़ा इजाफा हुआ है। छोटे बैंकों के Write Off में बढ़ोतरी हुई है। 

ai generated image of loan write off by banks

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

अक्सर इस बात पर खूब बहस होती है कि उद्योगपतियों का कर्ज तो माफ हो जाता है लेकिन कर्ज के चलते किसान आत्महत्या कर लेते हैं। मौजूदा केंद्र सरकार भी कई बार बड़े उद्योगपतियों के भारी भरकम कर्ज को माफ करने की वजह से आलोचना का शिकार हुई है। अब संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पता चला है कि पिछले पांच साल में जितना किसानों का कर्ज  Write Off किया गया है उससे लगभग 2.7 गुना ज्यादा कर्ज बड़े उद्योगपतियों या कंपनियों का  Write Off किया गया है। पिछले 5 साल में कुल 4.39 लाख करोड़ रुपये का  Write Off माफ किया गया है जिसमें से 3.20 करोड़ का कर्ज बड़ी कंपनियों का ही है। कर्ज माफ करने में सबसे आगे सरकारी बैंक हैं जिन्होंने कुल 3.18 लाख करोड़ का कर्ज  Write Off कर दिया है।

 

यहीं पर यह स्पष्ट क देना जरूरी है कि  Write Off करने और कर्ज माफ करने में अंतर है। कर्ज माफी का अंतर है कि अब वह कर्ज कभी नहीं लौटाना होगा। वहीं, Write Off का मतलब है कि बैंक इस कर्ज को अपनी बैलेंस शीट से हटाकर बट्टा यानी घाटे में डाल देती हैं। अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत इस कर्ज की वसूली भी की जाती है। मई 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि पिछले 9 साल में केंद्र सरकार ने ऐसे 10 लाख करोड़ के कर्ज की रिकवरी भी की थी। 

 

यह भी पढ़ें: 9 शहरों के लिए बंद हुईं फ्लाइट, साल भर में ही हिंडन एयरपोर्ट पर कम हो गई आवाजाही

 

अब इसके बारे में आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह ने संसद में एक सवाल पूछा है। उन्होंने पूछा कि पिछले पांच साल में कितने उद्योगपतियों और किसानों का कर्ज माफ या Write Off किया गया है। उन्होंने इसके राज्यवार और सेक्टर वार आंकड़े भी मांगे थे। हालांकि, संसद में दिए गए जवाब में लिखा गया है कि राज्य और सेक्टर के हिसाब से आंकड़े नहीं रखे जाते हैं। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने बताया है कि साल और बैंकों के हिसाब से डेटा मौजूद है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

भारत का रिजर्व बैंक इस बात के आंकड़े रखता है कि किस बैंक कितना कर्ज Write Off किया। यहां वित्त मंत्रालय ने भी अपने जवाब में दोहराया है कि Write Off का मतलब कर्जमाफी नहीं है और इससे कर्ज लेने वाले को कोई राहत नहीं मिलती है। RBI के मुताबिक, यह सिर्फ अकाउंटिंग की एक प्रक्रिया है जिसके जरिए बैलेंस शीट को दुरुस्त किया जाता है। इतना ही नहीं, ऐसे लोन की रिकवरी के लिए बैंकों की ओर से प्रक्रिया जारी रहती है।

 

अब आंकड़ों की बात कर लेते हैं। आंकड़े दर्शा रहे हैं कि पिछले पांच साल में Write Off किए जाने वाले लोन के मामले में एक बदलाव दिखा है। जहां उद्योगपतियों के Write Off किए जाने वाले लोग में कमी आई है। वहीं, किसानों के Write Off किए जाने वाले लोन में बढ़ोतरी आई है।

 

यह भी पढ़ें: E20 पेट्रोल से किन गाड़ियों में आ सकती है खराबी? नितिन गडकरी ने खुद बताया

 

loan write off data

 

यही रुझान सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंकों में देखने को मिला है। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंकों में लोन Write Off में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। साल 2021-22 में जहां स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने बड़ी कंपनियों का सिर्फ 8 करोड़ का लोन Write Off किया तो 2025-26 में यह राशि 271 करोड़ हो गई। इसी तरह, स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने कृषि क्षेत्र के 515 करोड़ के लोन को साल 2021-22 में Write Off किया था लेकिन 2025-26 में यह राशि 2366 करोड़ रुपये पहुंच गई।

 

bank type wise loan write off data

किसका ज्यादा कर्ज Write Off हुआ?

पिछले 5 साल में सभी बैंकों ने बड़ी कंपनियों का कुल 3,20,481 करोड़ का कर्ज Write Off किया और कृषि क्षेत्र से जुड़े 1,18,984 करोड़ के कर्ज को Write Off किया है। यानी कुल जितना कर्ज Write Off हुआ है उसमें 72 प्रतिशत हिस्सेदारी बड़ी कंपनियों और उद्योगपतियों के कर्ज की है। इसमें से 3.18 लाख करोड़ कर्ज सरकारी बैंकों ने, 1.04 लाख करोड़ प्राइवेट बैंकों ने, 10961 करोड़ स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने और 5908 करोड़ का कर्ज विदेशी बैंकों ने Write Off किया है। 

 

यह भी पढ़ें: कई राज्यों में बजट से ज्यादा है कर्ज, लोन के बोझ तले दबे हैं भारत के सभी राज्य

industry vs farmers write off

      

यही आंकड़े बताते हैं कि विदेशी बैंकों के Write Off में तेजी से कमी आई है और पांच साल में ही इसका आंकड़ा 1800 करोड़ से घटकर सिर्फ 698 करोड़ पर आ गया है।

Related Topic:#Parliament Session

और पढ़ें