महंगाई का असर सिर्फ बाजार में बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका सीधा असर हर महीने के घरेलू बजट पर दिखाई देता है। महीने की शुरुआत में वेतन आते ही परिवार को राशन, घर का खर्च, आने-जाने, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसी जरूरी जरूरतों के लिए पैसे अलग करने पड़ते हैं। इन खर्चों के बीच यह देखना दिलचस्प है कि भारतीय परिवार अपनी कुल खपत की रकम का सबसे बड़ा हिस्सा आखिर किन जरूरतों पर खर्च कर रहे हैं।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी 2026 में निजी अंतिम उपभोग व्यय के आंकड़ों से देश में लोगों के खर्च को लेकर एक तस्वीर सामने आती है। आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारतीय परिवारों ने घरेलू बाजार में रोजमर्रा की जरूरतों और दूसरी चीजों पर कुल 18,132,452 करोड़ रुपये यानी करीब 181.32 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।
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भारतीय परिवार कहां खर्च कर रहे सबसे ज्यादा पैसा?
भारतीय परिवारों के कुल खर्च में खाद्य और गैर-मादक पेय पदार्थों पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च हुआ। 2022-23 में इस पर 42.41 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 2023-24 में यह बढ़कर 47.27 लाख करोड़ रुपये और 2024-25 में 52.88 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी दो साल में खाने-पीने से जुड़े इस खर्च में 10.47 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 24.7% है।
परिवहन अब भारतीय परिवारों के बड़े खर्चों में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। 2022-23 में लोगों ने परिवहन पर 26.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह खर्च 2023-24 में बढ़कर 28.82 लाख करोड़ रुपये और 2024-25 में 31.34 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी दो साल में परिवहन पर होने वाले खर्च में करीब 19.9% की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, घर, पानी, बिजली, गैस और दूसरे ईंधन पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। 2022-23 में इस पर 26.90 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 28.91 लाख करोड़ रुपये और 2024-25 में 30.70 लाख करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इस खर्च में बढ़ोतरी की रफ्तार परिवहन के मुकाबले कम रही। 2023-24 में इसमें 7.5% और 2024-25 में 6.2% की बढ़ोतरी हुई।
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शिक्षा और घरेलू सामान पर खर्च में तेज उछाल
कुछ चीजों पर लोगों का खर्च सामान्य से काफी तेजी से बढ़ा। साज-सज्जा, घरेलू सामान और रखरखाव पर खर्च 2022-23 में 6.03 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.35 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी सिर्फ एक साल में करीब 38.5% की बढ़ोतरी हुई। 2024-25 में यह खर्च बढ़कर 8.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, हालांकि इस बार बढ़ोतरी की रफ्तार घटकर 7.2% रह गई।
शिक्षा पर भी लोगों का खर्च लगातार बढ़ा। 2022-23 में शिक्षा पर 5.20 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जो 2023-24 में बढ़कर 6.38 लाख करोड़ और 2024-25 में 7.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी दो साल में शिक्षा पर खर्च करीब 35.2% बढ़ गया। 2023-24 में इसमें 22.7% की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 10.2% रह गई।
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इलाज और बीमा पर खर्च में 2024-25 में तेज बढ़ोतरी
स्वास्थ्य पर खर्च 2022-23 में 8.09 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में मामूली बढ़कर 8.40 लाख करोड़ रुपये हुआ। 2024-25 में यह तेजी से बढ़कर 9.55 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल में करीब 13.7% की बढ़ोतरी हुई। इसी तरह बीमा और वित्तीय सेवाओं पर खर्च 10.16 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 10.93 लाख करोड़ रुपये और फिर 12.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2024-25 में इस मद की वृद्धि करीब 12.3% रही।
कुछ खर्च पहले घटे, फिर 2024-25 में बढ़े
हर क्षेत्र में खर्च लगातार नहीं बढ़ा है। व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और दूसरी सेवाओं पर लोगों ने 2022-23 में 5.26 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह रकम 2023-24 में घटकर 4.58 लाख करोड़ रुपये रह गई लेकिन 2024-25 में फिर बढ़कर 5.63 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसी तरह, शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थों पर खर्च 2022-23 में 2.44 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में घटकर 2.25 लाख करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, 2024-25 में यह बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया।
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मनोरंजन, खेल और संस्कृति पर भी लोगों का खर्च 2022-23 में 1.46 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में घटकर 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2024-25 में यह बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।