रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का फैसला लिया है। समिति ने अपनी तटस्थ नीति भी जारी रखी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
वित्त वर्ष 27 का दूसरा द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठक 3 से 5 जून तक चली। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर रहेगी। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.5 प्रतिशत पर ही रहेगी।
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महंगाई पर RBI गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण विश्व स्तर पर आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि विकसित देशों के प्रमुख केंद्रीय बैंक अब सख्त मौद्रिक नीति की ओर आगे बढ़ सकते हैं। महंगाई नियंत्रण के लिए दुनियाभर के बैंक, ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
'शेयर बाजार को है AI से उम्मीद'
शेयर बाजार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उम्मीदों से मजबूत हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार महंगाई के डर और कर्ज की चिंताओं के कारण कमजोर बने हुए हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी है। कई उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (EMEs) की मुद्राएं कमजोर हो रही हैं।
'भारत में खुदरा महंगाई लक्ष्य से नीचे'
भारत के संदर्भ में गवर्नर ने कहा कि वैश्विक झटकों के बावजूद देश में खुदरा महंगाई (CPI) अभी लक्ष्य से नीचे है, क्योंकि इसका असर घरेलू कीमतों पर सीमित रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई ऊपरी सहन सीमा की ओर बढ़ सकती है।
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कब सुधार की उम्मीद है?
चौथी तिमाही से आपूर्ति संबंधी दबाव कम होने की उम्मीद है, फिर भी दूसरी दौर की महंगाई का खतरा बरकरार है, इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है। महंगाई के असर से मजदूरी और उम्मीदों पर प्रभाव पड़ सकता है।
रेपो रेट क्या है?
रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर RBI कॉमर्शियल बैंकों को छोटी अवधि के लिए कर्ज देता है। इस दर में बदलाव का असर आम लोगों पर पड़ता है। दर बढ़ने पर होम लोन, वाहन लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं, जबकि दर घटने पर कर्ज सस्ता होकर खपत और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। RBI अब आर्थिक स्थिति पर नजर रखते हुए अगली बैठक में आगे के फैसले लेगा।