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चावल, खाद, तेल सब पर होगा असर, होर्मुज बंद हुआ तो रुक जाएगी भारत की रफ्तार

ईरान पर हो रहे चौतरफा हमलों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है। अब भारत समेत तमाम देशों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि ये देश इसी रास्ते आने वाली चीजों पर निर्भर हैं।

ship passing through strait of hormuz

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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ईरान और इजरायल के तनाव का असर अब दुनियाभर के देशों पर पड़ने वाला है। भारत समेत कई एशियाई देश कई जरूरी चीजों के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर हैं और यहां से आने वाला सामान होर्मुज जलडमरूमध्य यानी होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। तनाव और टकराव की स्थिति के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इसका असर यह हो रहा है कि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। भारत की ओर से दुनिया के देशों में जाने वाला बासमती चावल भी रास्ते में अटका है और खाद के लिए दुनिया के देशों पर निर्भर भारत अब संकट में दिख रहा है। इन सबके अलावा कई और भी चीजें हैं जिनका आयात और निर्यात होर्मुज बंद होने के कारण प्रभावित हो रहा है।

 

तमाम जरूरी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर है। ऐसे में इस टकराव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि भारत की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोमवार को एक मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में निर्यातकों, शिप कंपनियों, माल ढुलाई का कारोबार करने वालों और कई अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। दरअसल, इस तरह की स्थिति बनने के बाद देश के निर्यातों ने चिंता जताई है क्योंकि होर्मुज के साथ-साथ बाब एल-मंदेब स्ट्रेट के बंद होने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।

 

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दुनियाभर में जितना निर्यात होता है उसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। खाद, मेथनॉल, क्रूड ऑयल, मिनरल्स, गैस और पेटकोक जैसी चीजों का निर्यात अरब देशों से दुनियाभर के देशों में होता है। कई चीजों में यह हिस्सेदारी एक तिहाई के बराबर है। ऐसे में भारत समेत कई देशों में इन चीजों के दाम बढ़ने वाले हैं।

 

इतना अहम क्यों है होर्मुज?

 

दरअसल, पर्सियन खाड़ी से निकलकर आने वाले जहाज जिस 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से होकर गुजरते हैं उसी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कहते हैं। अरब सागर और पर्सियन गल्फ को जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के पास है। असल में ईरान इस पर एक तरह से कंट्रोल रखता है और वह आसानी से यहां से गुजरने वाले जहाजों को कभी भी रोक सकता है। ईरान के अलावा इराक, कुवैत, बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से दुनिया में जाने वाले जहाज और दुनिया से इन देशों तक आने वाले जहाज इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं।

 

तेल के मामले में भारत अरब देशों, रूस, वेनेजुएला और पश्चिमी देशों पर निर्भर रहा है। भारत में तेल की जरूरतें इतनी ज्यादा हैं कि सप्लाई रुकने से देश की रफ्तार कम हो सकती है। बिजली बनाने से लेकर गाड़ियां, इंजन और फैक्ट्रियां चलाने के लिए भारत को तेल की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा, भारत में दर्जनों रिफाइनरी हैं जो कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करके दूसरे देशों में भेजती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर भारत में तेल का आयात कम होगा तो कई अन्य देशों को मिलने वाले पेट्रोलियम उत्पाद में भी कमी आएगी और इसका वैश्विक असर देखने को मिलेगा।

 

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तेल के अलावा और क्या महंगा होगा?

 

खाद के लिए आयात पर निर्भर भारत हर साल सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से बड़ी मात्रा में खाद खरीदता है। अब होर्मुज के बंद होने का असर यह होगा कि उसे दूसरे रास्तों से खाद का आयात करना होगा। ये वैकल्पिक रास्ते भारत के लिए महंगे पड़ेंगे और खाद के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हो जाएगी। फिलहाल, गेहूं की फसल तैयार होने वाली है और इसके ठीक बाद भारत में धान की फसल लगाई जाएगी। ऐसे में खाद की कीमतें बढ़ने का असर देश की खेती पर पड़ेगा और किसानों के बीच असंतोष की स्थिति पैदा होगी।

 

आयात के अलावा भारत से कई कृषि उत्पादों का निर्यात भी होता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, भारत ने साल 2025 में ही ईरान को 747 मिलियन डॉलर का चावल 61 मिलियन डॉलर का केला, 51 मिलियन डॉलर की चाय बेची। इसके अलावा, ईरान से भारी मात्रा में पेट्रोलियम कोक, सेब और खजूर का आयात भी किया गया। ऐसे में होर्मुज का बंद होना इन दोनों देशों के आपसी कारोबार को भी प्रभावित करने वाला है।

 

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टॉप चावल निर्यातक देशों में शामिल भारत सऊदी अरब, ईरान, इराक, UAE और यमन जैसे देशों को हर साल लाखों टन चावल का निर्यात करता है जिनकी कीमत लगभग 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा होती है। भारत के चावल निर्यातकों की चिंता है कि अगर यह तनाव जल्दी खत्म नहीं होता है तो वे अपना बड़ा बाजार खो देंगे।

 

तेल की कीमतों पहले ही 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई हैं अगर यह तनाव कम नहीं होता है और वैकल्पिक रास्तों से ही तेल का आयात करना पड़ा तो तेल के दाम 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते है। इसका नतीजा यह होगा कि भारत में डीजल, पेट्रोल तो महंगे होंगे ही, घरेलू और कमर्शियल इस्तेमाल वाली गैसों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम भी आसमान छूने लगेंगे।


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