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स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल, कितने खर्च हुए, कितनों को काम मिला?

केंद्र सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में जानकारी दी है कि स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल में कुल 21.9 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला।

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स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल पूरे, Photo Credit: Sora AI

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देश में स्टार्टअप इंडिया मिशन की शुरुआत हुए एक दशक यानी 10 साल पूरे हो गए हैं। देश के युवाओं में कारोबारी मानसिकता विकसित करने, नए-नए उत्पाद देश में बनाने, लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और अर्थव्यवस्था मजबूत करने के मकसद से शुरू किए गए इस मिशन के बारे में अब केंद्र सरकार ने संसद में जवाब दिया है। इसी जवाब में केंद्र सरकार ने ब्योरा दिया है कि 10 साल में यह स्टार्टअप इंडिया मिशन कितना कारगर रहा। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी के एक सवाल पर केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि 10 साल में 21.9 लाख से ज्यादा लोगों को काम मिला है।

 

साल 2016 में शुरू हुई इस योजना में छोटे स्टार्टअप्स को सीड फंड या लोन के तौर पर पैसे मिलते हैं, टैक्स में छूट मिलती है, पेटेंट रजिस्ट्रेशन में आसानी होती है और बिजली, जमीन आदि पर सब्सिडी भी मिलती है। कुल मिलाकर ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश है कि अगर कोई कारोबारी कोई नया बिजनेस शुरू करना चाहे तो उसे पैसे भी मिलें और सरकारी कामकाज भी आसानी से हो जाए।

सवाल क्या पूछा गया?

 

मोहिबुल्ला नदवी ने 10 फरवरी को संसद में पूछा था कि क्या सरकार ने पिछले एक दशक में स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के नतीजों की समीक्षा की है? उन्होंने यह भी पूछा था कि इस योजना से सेमीकंडक्टर, AI, बैटरी, डिफेंस, स्पेस और क्वांटर कंप्यूटिंग के क्षेत्र में क्या काम हुआ? 

 

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इसी का लिखित जवाब कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के राज्यमंत्री जितिन प्रसाद की ओर से दिया गया है। जवाब में लिखा गया है, '16 जनवरी 2016 को यह मिशन इस मकसद से शुरू किया गया था कि देश में स्टार्टअप ईकोसिस्टम तैयार किया जाए और निवेश के साथ-साथ इनोवेशन को भी बढ़ावा दिया जाए।'


10 साल में क्या-क्या हुआ?

 

31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 2,07,135 यूनिट ऐसी थीं जिन्हें स्टार्टअप के तौर पर पहचान मिली। इन यूनिट्स ने प्रत्यक्ष तौर पर 21.9 लाख नौकरियां पैदा कीं। इनमें से 14,400 स्टार्टअप ऐसे हैं जो AI, डिफेंस, टेक्नॉलजी हार्डवेयर (सेमीकंडक्टर इसी में शामिल है) आदि से जुड़े हैं और इनमें 1.25 लाख नौकरियां पैदा हुईं।

 

इन स्टार्टअप्स को तीन प्रमुख योजनाओं के जरिए फंडिंग दी गई। ये योजनाए- फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS), स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS) और क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS) हैं। 

 

 

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सेबी में रजिस्टर्ड अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) को स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) की ओर से फंडिंग की जाती है। यही AIFs इन स्टार्टअप्स को पैसे देते हैं। संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, इन AIFs ने टेक, AI और रोबोटिक्स सेक्टर के AIFs ने कुल 48 स्टार्टअप में 916.49 करोड़ की फंडिंग की है।

 

SISFS योजना के तहत उन स्टार्टअप्स को फंडिंग दी जाती है जो शुरुआती दौर में होते हैं। 1 अप्रैल 2021 से शुरू हुई इस योजना के तहत 31 दिसंबर 2025 तक कुल 406 स्टार्टअप चुने गए हैं और उन्हें 73.4 करोड़ रुपये की सीड मनी दी गई है।

 

CGSS योजना 1 अप्रैल 2023 से शुरू की गई है और इसके तहत कंपनियों को कर्ज दिया जाता है। एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की कुल 14 कंपनियों को इस योजना के तहत 31 दिसंबर तक 68.30 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है।

 

इनके अलावा, नेशनल क्वांटम मिशन, इंडिया AI मिशन और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) के जरिए भी स्टार्टअप्स की मदद की जा रही है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनियों को आगे बढ़ाने के लिए 50 प्रतिशत तक की लागत रीइंबर्स की जा रही है। इसके लिए प्रति ऐप्लिकेशन अधिकतम 15 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। कुल 24 प्रोजेक्ट को DLI के तहत मदद दी गई है।


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