logo

मूड

ट्रेंडिंग:

3.5 साल में पहली बार बढ़ा रेपो रेट, आपकी EMI पर पड़ने वाला असर समझिए 

लंबे समय के बाद RBI ने रेपो रेट में बदलाव करते हुए इसमें बढ़ोतरी कर दी है। अब रेपो रेट 5.5 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे होम लोन और कार लोन महंगा हो सकता है।

रेपो रेट बढ़ाने की जानकारी देते RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा, Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 3.5 साल के बाद के बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। लंबे समय से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा था। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मीटिंग के बाद RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अब रेपो रेट में 0.25 प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया है। इसका असर सीधे-सीधे बैंकों को मिलने वाले कर्ज पर पड़ेगा। नतीजा यह होगा कि आम ग्राहकों को मिलने वाले होम लोन और कार लोन की की किस्तें या तो महंगी हो जाएंगी या फिर उनकी संख्या बढ़ जाएगी। RBI की इस मीटिंग के बाद चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 6.7 प्रतिशत था।  

 

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपने रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘जरूरत के अनुसार सख्त’ करने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि आरबीआई परिस्थितियों के अनुसार जरूरत पड़ने पर नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।अब मुद्रास्फीति के अनुमान को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया गया है।

 

यह भी पढ़ें: रोबोटिक्स या मैन्युफैक्चरिंग, किस सेक्टर पर मेहरबान निवेशक, आंकड़े क्या हैं?

आगे भी रेपो रेट बढ़ने के आसार

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की सोमवार से शुरू तीन दिन की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, ‘मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए एमपीसी ने आम सहमति से नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय किया।’ बता दें कि फरवरी, 2023 के बाद यह पहला मौका है जब रेपो रेट बढ़ाया गया है। इससे पहले पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इस साल फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त की दोमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नीतिगत दरों में आगे कटौती की संभावना नहीं है। इसमें या तो बढ़ोतरी होगी या यह स्थिर रहेगी। बताते चलें कि रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक यानी RBI से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर बढ़ाने से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त बढ़ सकती है।

 

यह भी पढ़ें: 5 राज्यों में आधा उद्योग, तमिलनाडु फैक्ट्री तो गुजरात में कमाई में ज्यादा क्यों?

EMI पर पड़ेगा असर

दरअसल, बैंक उसी हिसाब से EMI बदलते हैं जिस हिसाब से उन्हें लोन मिलता है। अगर उन्हें लोन महंगा मिलेगा तो वे ग्राहकों को भी लोन महंगा देंगे। इसी तरह अगर उन्हें लोन सस्ता मिलता है तो आम ग्राहकों को मिलने वाले लोन की ब्याज दरें घटाई भी जाती हैं। पहले से चल रहे लोन की दरों में भी इसी के हिसाब से बदलाव होता रहता है। 

 

Related Topic:#RBI

और पढ़ें