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भारत ने चीनी के निर्यात पर क्यों लगाई रोक? अमेरिका और यूरोप के लिए छूट

वैश्विक इकॉनमी में मची खलबली के बीच भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। फिलहाल यह रोक अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के देशों पर लागू नहीं होगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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एक महीने पहले ही भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर बैन लगाने की आशंकाओं को खारिज किया था। अब केंद्र सरकार ने अगले साढ़े चार महीनों के लिए चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि भारत के कारोबारी अब अपनी चीनी दूसरे देशों में नहीं भेज पाएंगे। यह प्रतिबंध अमेरिका और यूरोपियन यूनियन पर लागू नहीं है तो इन देशों में चीनी भेजी जा सकेगी। यह आदेश बुधवार को ही जारी किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। सरकार ने यह भी बताया है कि पहले से तय डिलीवरी को रोका नहीं जाएगा।

 

सरकार ने बताया है कि यह अधिसूचना जारी होने यानी आदेश लागू होने से पहले जो चीनी किसी जहाज पर लोड हो चकी है, उसे नहीं रोका जाएगा। साथ ही, अडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत बेची जाने वाली चीनी का निर्यात जारी रहेगी। केंद्र सरकार ने बताया है कि यह आदेश सफेद चीनी, ब्राउन शुगर और रिफाइन्ड शुगर पर लागू होगी। 

 

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अमेरिका और यूरोप को छूट क्यों?

केंद्र सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अब चीनी को 'सीमित' (Restricted) से हटाकर 'प्रतिबंधित' (Prohibited) कैटगरी में रख दिया गया है और यह आदेश कम से कम 30 सितंबर तक लागू रहेगा। इसमें अमेरिका और यूरोपियन यूनियन को छूट मिलेगी। इसकी वजह है कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच कुछ ऐसे समझौते हैं और इन्हीं समझौतों के तहत एक CXL कोटा निर्धारित है जिसके तहत यूरोप को चीनी देनी ही है। इसी तरह अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत छूट मिली है और अमेरिका के लिए चीनी का निर्यात जारी रहेगा।

 

सरकार का यू-टर्न?

पिछले ही महीने 7 अप्रैल को चीनी के निर्यात पर बैन लगाने की आशंकाओं से जुड़ा एक सवावल पूछा गया था। तब केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा था कि 2025-26 का मार्केटिंग सीजन सितंबर में खत्म होगा और उम्मीद है कि एथेनॉल के लिए गन्ना निकालने के बावजूद 320 से 325 लाख टन चीनी का उत्पादन किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि इस मार्केटिंग इयर में 15 लाख टन चीनी के निर्यात का लक्ष्य है लेकिन उसे पूरा कर पाना चुनौतीपूर्ण होगा।

 

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तब संजीव चोपड़ा ने कहा था कि चीनी के निर्यात पर बैन लगाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि चीनी उद्योग से जुड़े कारोबारी लंबे समय से चीनी का न्यूनतम मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और इस पर विचार भी किया जा रहा है। मौजूदा वक्त में चीनी की कीमत कम से कम 31 रुपये है। 

 

कितना बड़ा है चीनी का बाजार? 

भारत दूसरा सबसे बड़ी चीनी उत्पादक और निर्यातक देश है। वहीं, चीनी की खपत के मामले में भारत सबसे बड़ा उपभोक्ता है। ऑल इंडिया सुगर ट्रेड असोसिएशन की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल औसतन 3.3 करोड़ मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है। वहीं, भारत में चीनी की खपत लगभग 2.8 करोड़ मीट्रिक टन की होती है। यही वजह है कि हर साल कारोबारी चीनी के निर्यात की मात्रा तय करने की मांग करते हैं ताकि उसी के हिसाब से चीनी के निर्यात को लेकर फैसला लिया जा सके।

 

इस साल चीनी के उत्पादन में भी थोड़ी कमी आई है, ऐसे में इस फैसले को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। पहले भी कई बार ऐसा हुआ है जब भारत में उत्पादन कम होने की स्थिति में चीनी के निर्यात पर बैन लगाया जा चुका है।

 

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कहां जाती है भारत की चीनी?

भारत की चीनी का सबसे ज्यादा निर्यात डिजबूती में होता है और सालाना लगभग 1.46 लाख टन चीनी भेजी जाती है। इसी तरह सोमालिया को 1.35 लाख टन और श्रीलंका को 1.34 लाख टन चीनी भेजी जाती है। अफगानिस्तान, यूएई, तंजानिया, बांग्लादेश और चीन जैसे देश भी काफी मात्रा में भारत से चीनी खरीदते हैं।

 

अमेरिका और यूरोप के देशों में चीनी के निर्यात को देखें तो यह काफी कम है। दोनों को मिलाकर सालाना 10 से 15 हजार मीट्रिक टन का ही निर्यात किया जाता है। 


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