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3 साल में 11% बढ़ गए हिट एंड रन के केस, UP और मध्य प्रदेश सबसे आगे

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने देश में क्राइम का डेटा जारी किया है। हिट एंड रन के मामले चौंकाने वाले हैं, पिछले 3 वर्षों में इन मामलों में 11% की बढ़ोतरी हुई है।

representative image of Hit and Run

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Meta AI Generated Image)

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों ने देश की सड़कों पर सुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 'हिट एंड रन' के मामलों में पिछले तीन वर्षों में निरंतर और चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2024 में यह आंकड़ा 53,230 तक पहुंच गया है, जो यह दर्शाता है कि सड़कों पर होने वाली लापरवाही अब एक बड़े संकट का रूप ले चुकी है।

 

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में हिट एंड रन के 47,806 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 51,780 हो गए। यानी सिर्फ तीन साल के अंदर इन मामलों में करीब 11.3% की बढ़ोतरी देखी गई है। सिर्फ मामलों की संख्या ही नहीं बढ़ी है, बल्कि अपराध की दर भी बढ़ी है। हिट एंड रन की दर 2022 में 3.5 थी, जो 2024 में बढ़कर 3.8 हो गई है।

 

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साल 2024 का डेटा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कानूनी बदलावों की झलक मिलती है। कुल 53,230 मामलों में से 29,169 मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) के पुराने प्रावधानों के तहत दर्ज किए गए, जबकि 24,061 मामले नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज हुए हैं।

हर साल बढ़ती बेलगाम रफ्तार

अगर पिछले तीन सालों के ट्रेंड को देखें तो ये आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। 2022 से 2023 के बीच मामलों में करीब 8.3% की बढ़ोतरी हुई थी, और 2024 में भी यह सिलसिला जारी रहा। ये बढ़ते आंकड़े साफ दिखाते हैं कि हादसे के बाद ड्राइवर कानूनी कार्रवाई के डर से घायलों की मदद करने के बजाय मौके से भागना ज्यादा सही समझ रहे हैं।

 

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किस राज्य में सबसे अधिक मामले सामने आए?

  • उत्तर प्रदेश: 18,536 मामले
  • मध्य प्रदेश: 9,260 मामल
  • बिहार: 4,353 मामले
  • महाराष्ट्र: 3,584 मामले
  • झारखंड: 2,228 मामले

सबसे कम मामले दर्ज करने वाले 5 राज्य

  • सिक्किम: 0 मामले
  • नागालैंड: 11 मामले
  • मिजोरम: 20 मामले
  • गोवा: 25 मामले
  • मेघालय: 27 मामले

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केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति

केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा 642 मामले दिल्ली में दर्ज किए गए, जहां अपराध दर 2.9 रही। वहीं जम्मू-कश्मीर में 208 मामले सामने आए, जिसकी दर 1.5 रही। लद्दाख और लक्षद्वीप ऐसे इलाके रहे जहां हिट एंड रन का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।


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