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सुप्रीम कोर्ट में 3500 वकील AOR, कैसे बनते हैं और क्या होती है ताकत, सब समझिए

सुप्रीम कोर्ट में वैसे तो हजारों वकील प्रैक्टिस करते हैं लेकिन 3500 वकील कुछ खास होते हैं क्योंकि यह एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड होते हैं। इसके लिए वकीलों को परीक्षा देनी होती है।

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सुप्रीम कोर्ट, Photo Credit: PTI

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देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में हजारों वकील प्रैक्टिस करते हैं लेकिन इनमें कुछ वकीलों के पास वह पावर होती है जो दूसरे वकीलों के पास नहीं होती। यह पावर उन्हें बस एक परीक्षा पास करने से मिलती है। वे वकील वह काम कर सकते हैं जो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाला हर एक वकील नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने और आधिकारिक तौर पर किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार सिर्फ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड यानी एओआर को होता है। यही कारण है कि इस पोस्ट को कानूनी फिल्ड में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

 

सुप्रीम कोर्ट में हजारों वकील प्रैक्टिस करते हैं, लेकिन इनमें से सीमित संख्या में ही ऐसे वकील होते हैं जो एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड होते हैं। एओआर बनने के लिए वकीलों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से आयोजित एक खास परीक्षा पास करनी होती है। इस परीक्षा को एओआर परीक्षा कहा जाता है और इसे लॉ के फिल्ड की कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।

 

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एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड क्या है?

एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड वह वकील होता है जिसे सुप्रीम कोर्ट में केस फाइल करने का आधिकारिक अधिकार होता है। कोई भी याचिका, अपील या अन्य कानूनी दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने के लिए एओआर का नाम और हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। दूसरे वकील कोर्ट में बहस कर सकते हैं लेकिन केस की फाइलिंग और औपचारिक जिम्मेदारी एओआर की ही होती है। 

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया काफी तकनीकी और नियमों से भरी होती है। याचिका में दस्तावेज, हलफनामा, समय सीमा और कई कानूनी औपचारिकताएं होती हैं। एओआर सिस्टम इसलिए बनाया गया ताकि कोर्ट में सही और जिम्मेदारी के साथ केस दाखिल हो सकें। 

कौन बन सकता है एओआर?

एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी राज्य बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन होना जरूरी है। यानी वकील के पास बार काउंसिल से प्रैक्टिस का लाइसेंस होना जरूरी है।  इसके बाद कम से कम चार साल तक वकालत का अनुभव होना चाहिए।

 

चार साल की प्रैक्टिस पूरी होने के बाद उम्मीदवार को कम से कम दस साल के अनुभव वाले किसी एओआर के साथ एक साल की जरूरी ट्रेनिंग करनी होती है। यह ट्रेनिंग सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया और फाइलिंग प्रणाली को समझने के लिए जरूरी माना जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही वकील एओआर परीक्षा देने के लिए एलिजिबल होता है।

कैसी होती है एओआर परीक्षा?

एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड परीक्षा सुप्रीम कोर्ट ही आयोजित करवाता है। यह परीक्षा आमतौर पर चार दिनों तक चलती है और इसमें चार पेपर होते हैं। हर एक पेपर 100 नंबरों का होता है और तीन घंटे का समय दिया जाता है। इसमें कुछ विषयों पर जोर दिया जाता है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट की प्रैक्टिस और प्रक्रिया, ड्राफ्टिंग, प्रोफेशनल एथिक्स और कोर्ट के प्रमुख फैसले। परीक्षा पास करने के लिए हर पेपर में कम से कम 50 प्रतिशत  नंबर और कुल मिलाकर 60 प्रतिशत नंबर प्राप्त करना जरूरी होता है। इस वजह से इसका पास प्रतिशत अक्सर 20 से 30 प्रतिशत के आसपास ही रहता है। 

कितनी बार दे सकते हैं परीक्षा?

एओआर परीक्षा देने के मौके सीमित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार अधिकतम पांच बार ही यह परीक्षा दे सकता है। अगर कोई उम्मीदवार सभी पेपर में असफल हो जाता है तो वह अगले परीक्षा चक्र में बैठने के लिए भी पात्र नहीं होता। 

 

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फायदे समझिए

एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बनने के बाद वकील को सुप्रीम कोर्ट में केस फाइल करने का विशेष अधिकार मिल जाता है। इससे उनके करियर में नई संभावनाएं खुलती हैं और वे सीधे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा एओआर बनने से वकील की पेशेवर पहचान और प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। सुप्रीम कोर्ट के मामलों में उनकी जिम्मेदारी तय होती है और वे देश की सबसे बड़ी अदालत में कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं।


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