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डॉक्टर और इंजीनियर भी खूब बन रहे IAS? UPSC का बदलता ट्रेंड समझिए

एक जमाने में संस्कृत, इतिहास, समाज शास्त्र, राजनीति, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों को लोग सिविल सेवाओं की परीक्षा के लिए चुनते थे। अब यह पैटर्न बदल गया है।

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UPSC Results 2026। AI इमेज। Photo Credit: Sora

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के नतीजे आ गए हैं। राजस्थान के रहने वाले डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने देशभर के प्रतिभागियों में पहला स्थान हासिल किया है। 6 मार्च को नतीजे जारी हुए, तब से ही हर तरफ उनके नाम की शोर मची है। अनुज अग्निहोत्री, राजस्थान के रहता गांव के रहने वाले हैं। साल 2023 में उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) जोधपुर से MBBS की डिग्री हासिल की थी। डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने तय किया कि वह सिविल सर्विसेज में अपना करियर बनाएंगे। AIIMS से पढ़ने के बाद भी UPSC की तैयारी का फैसला लेना, थोड़ा हैरान करने वाला लगता है लेकिन साल 2011 से यह ट्रेंड बन गया है। 

UPSC परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल करने वाली राजेश्वरी सुवे एम, पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर रहीं हैं। उन्होंने अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई से जुड़ी संस्था, वेल टेक मल्टी टेक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। आकांश ढुल तीसरे स्थान पर हैं लेकिन उन्होंने कॉमर्स से पढ़ाई की है। उनसे पहले के IAS और IPS अधिकारी भी खूब चर्चा में रहे हैं। IAS डॉ. अभिषेक पल्लव तो अक्सर चर्चा में रहते हैं। डॉ. प्रियंका, डॉ. रोमन सैनी, नागार्जुन बी गौड़ा, डॉ. रेनू राज जैसे कई नाम हैं, जो अब IAS अधिकारी हैं। 

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अब प्रतियोगी परीक्षाओं में साइंस और मेडिकल बैकग्राउंड के अभ्यर्थी खूब हिस्सा ले रहे हैं और टॉप की रैंकिंग में ह्युमैनिटी की पढ़ाई करने वाले छात्रों को पीछे छोड़ रहे हैं। 

क्यों ज्यादा कामयाब हो रहे साइंस-टेक बैकग्राउंड के छात्र?

USPC एजुकेटर अभिषेक राय IAS वर्ल्ड के सह संस्थापक हैं। उनसे जब यह सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'सिविल सर्विस की परीक्षाओं में अब पारंपरिक विषयों से लोग दूर हो रहे हैं। इसका असर, हिंदी माध्यम के छात्रों पर ज्यादा पड़ा है। हिंदी के नाम पर ऐसे अनुवाद उनके सामने होते हैं, जिन्हें समझने में ही माथे पर बल आ जाएं। कई बार हिंदी इस हद तक उलझी होती है कि वे प्रश्न समझ ही नहीं पाते हैं, उत्तर क्या देंगे। अंग्रेजी माध्यम के छात्रों का प्रदर्शन सुधरा है।'

अभिषेक राय ने कहा, 'एक दौर था जब इतिहास, भूगोल और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों का दबदबा था, लेकिन अब आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों से आने वाले अभ्यर्थी, डॉक्टर और इंजीनियर इस रेस में बाजी मार लेते हैं। हिंदी में किताबें सीमित हैं, मशीन लर्निंग से भी अब लोगों को मदद मिल रही है, जिससे हिंदी माध्यम के बच्चे दूर हैं। इन क्षेत्रों से आने वाले ज्यादा एडवांस हैं, जिसका लाभ उन्हें परीक्षा में भी मिलता है।'

क्यों बदलाव दिखा है?

UPSC एजुकेटर अभिषेक राय ने बताया, 'यह बदलाव, अब एक दशक से ज्यादा पुराना हो गया है। जब साल 2011 में 'सिविल सर्विसेज एप्टीड्यूड टेस्ट' (CSAT) में बदलाव हुए थे, तब हिंदी माध्यम के छात्रों ने विरोध जताया था। यह उनके लिए बिलकुल नया था।'

अभिषेक राय ने कहा, 'CSAT की वजह से गणित, रीजनिंग और डेटा इंटरप्रिटेशन के सवाल होते हैं। भारी विरोध के बाद साल 2015 में इसे क्वालीफाइंग किया गया तो थोड़ी राहत मिली। हालांकि साइंस और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों के लिए इसे पास करना और इसमें ज्यादा आसान है। साइंस और मैथ्य के छात्रों को मेंस की पढ़ाई के लिए ज्यादा मौका मिल जाता है, वे ध्यान भी ज्यादा दे पाते हैं। हिंदी माध्यम के विद्यार्थी यहीं चूकते हैं।'

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IAS वर्ल्ड के संस्थापक उपेंद्र शुक्ल ने UPSC में बढ़ते इंजीनियरिंग और साइंस अभ्यर्थियों पर कहा, 'अभ्यर्थी अब 'मानविकी' के विषयों के बजाय अपने ग्रेजुएशन के विषयों पर जोर दे रहे हैं। जैसे गणित, फिजिक्स, साइंस और मेडिकल साइंस। इनका पाठ्यक्रमों सभी जरूरी विषयों को कवर करने वाला होता है तो तैयारी अच्छी हो जाती है। ऐसी विषयों में उत्तर 'सही' या 'गलत' होते हैं। अगर आपने गणित का सवाल सही हल किया है, तो आपको पूरे अंक मिलेंगे। हिंदी माध्यम और ह्युमैनिटी वाले छात्रों के लिए यह संभावनाएं कम होती हैं।'

उन्होंने कहा, 'अक्सर साइंस में मार्किंग ज्यादा स्कोरिंग मानी जाती है। UPSC के सामान्य अध्ययन के पेपर अब केवल रटने पर आधारित नहीं रहे हैं। अब सवाल विश्लेषण वाले लहजे में पूछे जाते हैं। इंजीनियर, डॉक्टर और साइंस स्टूडेंट्स को शुरू से ही समस्याओं के विश्लेषण के लिए तैयार किया जाता है जो UPSC के पैटर्न में उनके लिए मददगार साबित होता है।'

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अभिषेक राय ने कहा, 'UPSC में साइंस अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या की एक वजह यह है कि सामन्य अध्ययन के तीसरे पेपर में 'साइंस और टेक्नोलॉजी' वाला हिस्सा ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में इस वर्ग से आने वाले छात्रों को ज्यादा बेहतर प्रदर्शन का मौका मिल पाता है।' 

फिर ह्युमैनिटी और हिंदी माध्यम के बच्चों के लिए उम्मीद क्या है?

UPSC एजुकेटर अभिषेक राय ने कहा, 'विषयों की सटीक जानकारी, जिस छात्र के पास रहेगी, वह बेहतर नतीजे दे सकता है। भाषा, आपके राह की रुकावट तब नहीं बन सकती है। एक अधिकारी के तौर पर आपसे यह उम्मीद की जाती है कि स्थानीय भाषा के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों की बेहतर समझ होगी। हिंदी में पेपर लिखिए लेकिन समझ अंग्रेजी की इतनी ठीक रहे कि प्रश्न आप समझ सकें। विषय को लेकर भटकाव जितना कम होगा, आपके उत्तर उतने सटीक होंगे। भाषाई बाधा के बाद भी हिंदी माध्यम के छात्र UPSC में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।'

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