विराट कोहली और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 16 साल, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की ट्रॉफी के लिए तरसना पड़ा। 2013 में विराट कोहली को कप्तान बनाया गया और वह 9 साल तक टीम की कमान संभाले। यह उनका करियर का पीक टाइम था, लेकिन कप्तानी में कोई ट्रॉफी नहीं जीत सके।
कप्तानी छोड़ने के बाद विराट कोहली की किस्मत बदली। उन्होंने भारत के साथ दो बड़ी ट्रॉफियां जीतीं- 2024 टी20 विश्व कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी। वहीं RCB के साथ भी दो ट्रॉफियां हाथ लगीं। पिछले सीजन में राजत पटिदार की कप्तानी में RCB ने पहली बार आईपीएल खिताब जीता।
रविवार रात अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उन्होंने दूसरी बार जीत हासिल की। इस जीत के साथ आरसीबी, चेन्नई सुपर किंग्स (2010-11) और मुंबई इंडियंस (2019-20) के बाद लगातार दो बार ट्रॉफी जीतने वाली तीसरी टीम बन गई।
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असली कप्तान विराट कोहली ही हैं?
रजत पटिदार विराट कोहली के बड़े फैन हैं। इस सीजन पटिदार ने कई बार कहा कि विराट कोहली का पीछे से मिला मार्गदर्शन टीम की सफलता में बहुत अहम रहा। कप्तानी छोड़ने के बाद कोहली सिर्फ खिलाड़ी की भूमिका में हैं, जिससे वे टीम को बेहतर तरीके से मदद कर पा रहे हैं।
कप्तान से ज्यादा अच्छे हैं खिलाड़ी विराट
कप्तान रहते विराट कोहली बहुत ज्यादा डिमांडिंग कैप्टन थे, इस स्टाइल से टीम के खिलाड़ी उनसे डरते थे और पूरी तरह साथ नहीं दे पाते थे। अब वह अपनी आक्रामकता को सिर्फ विरोधी टीम पर दिखाते हैं। मैदान पर कोहली का जादू चलता है।
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कैसे GT पर भारी पड़ी RCB?
रविवार को भी विराट कोहली ने अपनी पुरानी स्टाइल दिखाई। उन्होंने इनफील्ड से गुजरात टाइटंस के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। चोट लगने के बावजूद वे मैदान पर डटे रहे और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
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विराट कोहली अब टीम प्लेयर बन गए हैं। वह अपनी राय जबरदस्ती नहीं थोपते और सही भाषा में सुझाव देते हैं। यही वजह है कि पटिदार और टीम मैनेजमेंट उनकी सलाह को आसानी से मानते हैं। कह सकते हैं कि कप्तानी से दूर रहकर कोहली ने न सिर्फ खुद को बदला, बल्कि टीम को भी ट्रॉफी दिला दी। अब उनकी आक्रामकता विरोधियों के लिए मुसीबत बन रही है।