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'टिकट देने में मेरी सलाह नहीं ली', JDU सांसद अजय मंडल ने दिया इस्तीफा

बिहार में टिकट बंटवारे को लेकर मची खींचतान के बीच JDU के सांसद अजय मंडल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के प्रति नाराजगी जाहिर की है।

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अजय मंडल, Photo Credit: Social Media

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बिहार में विधानसभा चुनाव के बीच सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) को बड़ा झटका लगा है। भागलपुर से जेडीयू के सांसद अजय मंडल ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफा दे दिया है। अजय मंडल ने कहा है कि मौजूदा सांसद होने के बावजूद टिकट बंटवारे में उनसे कोई सलाह ही नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि भागलपुर की विधानसभा सीटों के टिकट के बंटवारे में जिला अध्यक्ष और स्थानीय नेतृत्व की राय को नजरअंदाज किया गया है। अजय मंडल ने सांसद पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।

 

बिहार के सीएम और पार्टी के मुखिया नीतीश कुमार को लिखी चिट्ठी में अजय मंडल ने आरोप लगाए हैं कि पार्टी में पिछले कुछ महीनों से ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो पार्टी और उसके भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। 

 

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अजय मंडल की चिट्ठी में क्या है?

 

अपनी चिट्ठी में अजय मंडल ने लिखा है, 'माननीय नीतीश जी, आपके आशीर्वाद से मैं पिछले 20-25 वर्षों से भागलपुर क्षेत्र में विधायक और सांसद के रूप में जनता की सेवा करता आ रहा हूं। मैंने हमेशा पार्टी की मजबूती के लिए काम किया है लेकिन पिछले कुछ महीनों से संगठन में ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जो पार्टी और उसके भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। स्थानीय सांसद होने के बावजूद विधानसभा चुनाव के वितरण में मुझसे कोई सलाह या चर्चा नहीं की जा रही है। जिन लोगों ने कभी पार्टी संगठन के लिए काम नहीं किया, उन्हें टिकट देने की बात सामने आ रही है जबकि जिला अध्यक्ष और स्थानीय नेतृत्ल की राय को पूरी तरह से अनदेखा किया जा रहा है।'

 

 

उन्होंने आगे लिखा है, 'जब मैं 2019 में सांसद बना था, उस समय पूरे बिहार में हुए उपचुनाव में जहां भी जेडीयू लड़ी थी, सिर्फ मेरी ही सीट पर और मेरे नेतृत्व में जीत मिली थी। यह जेडीयू के प्रति मेरी निष्ठा और जनता के विश्वास का प्रतीक है। आज जब पार्टी के कुछ लोग मेरे ही लोकसभा क्षेत्र में टिकट बांटने का काम कर रहे हैं और संगठन की अनदेखी कर रहे हैं, तब यह स्थिति बेहद दुखद है।'

 

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अजय मंडल आगे लिखते हैं, 'मुझे आपसे मिलने नहीं दिया जा रहा है, ऐसे में अपने आत्मसम्मान और पार्टी के भविष्य की चिंता करते हुए सांसद पद पर बने रहने का क्या औचित्य है। इस तरह बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जाती रही तो पार्टी की जड़ें कमजोर होंगी। इसलिए, आत्मसम्मान और संगठन और के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ मैं आपसे विनम्र अनुरोध करता हूं कि मुझे अपने सांसद पद से इस्तीफा देने की अनुमति प्रदान करें।'

 


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