बिहार की गोविंदगंज विधानसभा सीट, पूर्वी चंपारण का हिस्सा है। आइए जानते हैं इस विधानसभा के मुद्दे क्या हैं, नेता कौन हैं, क्या सियासी समीकरण बन रहे हैं।
पूर्वी चंपारण जिले की गोविंदगंज विधानसभा सीट की अधिकांश आबादी ग्रामीण है। यहां मिली जुली आबादी है। इस विधानसभा से ही गंडक नदी होकर गुजरती है। स्थानीय लोगों की शिकायत रहती है कि हर साल बारिश और बाढ़ से इन्हें जूझना पड़ता है। अस्पतालों की कमी है, स्कूल और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग होती रही है। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन की पकड़ हाल के दिनों में मजबूत हुई है। सड़कों के मामले में यह सीट बेहद उम्दा है। मुजफ्फपुर हो, पटना हो या मोतिहारी, सड़कों के मामले में यह विधानसभा, बिहार की दूसरी विधानसभाओं से बेहतर हैं।
दशकों तक कांग्रेस का दबदबा इस विधानसभा सीट पर रहा है। विधानसभा की सीट संख्या 14 है। साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद इस विधानसभा का विस्तार पहाड़पुर, अरेराज, पूर्वी संग्रामपुर, पश्चिमी संग्रामपुर और संग्रामपुर सीडी ब्लॉक तक किया गया था। इस विधानसभा सीट पर कुल 2,24,048 मतदाता हैं, जिनमें 1,22,553 पुरुष और 1,01,495 महिला मतदाता शामिल हैं।
यह सामान्य सीट है। गोविंदगंज विधानसभा में करीब 263 पोलिंग बूथ है। गोविंदगंज विधानसभा सीट पर 2000 के बाद से एनडीए ने अपनी बढ़त दिखाई है। साल 1990 के दशक में कांग्रेस, जनता दल और निर्दलीयों उम्मीदवार यहां से जीतते रहे हैं। इस विधानसभा सीट से सुनील मणि त्रिपाठी विधायक हैं।
गोविंदगंज में भी पलायन अहम मुद्दा है। उद्योग-धंधों की कमी की वजह से बड़ी संख्या में लोग पलायन करते हैं। यहां बाढ़ का मुद्दा अक्सर उठता है। यह बिहार के सबसे पिछड़ों इलाकों में से एक है। रोजगार के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर अस्पतालों और स्कूलों की मांग लोग अरसे से कर रहे हैं।
कैसा था साल 2020 का चुनाव?
साल 2020 में पहली बार सुनील मणि त्रिपाठी यहां से विधायक बने। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजेश कुमार को करीब 27,924 वोटों से हराया था। उन्हें 65,544 वोट मिले। ब्रजेश कुमार को 37,936 वोट मिले थे। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के राजू तिवारी यहां से विधायक थे। वह एनडीए उम्मीदवार थे। उन्हें कुल 74,685 वोट पड़े थे। कांग्रेस के ब्रजेश कुमार यहां से हार गए थे।
सामाजिक ताना बाना
गोविंदगंज विधानसभा सीट पर ब्राह्मण वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। भूमिहार और क्षत्रिय वोटर भी प्रभावी हैं। यहां मुस्लिम वोटरों की आबादी करीब 14 फीसदी है। 11.42 प्रतिशत के आसपास अनुसूचित जाति के वोटर हैं।
सुनील मणि त्रिपाठी, गोविंदगंज विधानसभा से विधायक हैं। वह पूर्वी चंपारण के अरेराज गांव से आते हैं। सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं। किसान परिवार से आते हैं। वह स्नातक हैं। उन्होंने मुजफ्फरपुर कॉलेज से साल 1984 में स्नातक की पढ़ाई की है। उन्होंने साल 2020 में अपनी कुल संपत्ति करीब 22,79,196 बताई थी। उन पर एक आपराधिक मुकदमा भी दर्ज है।
गोविंदगंज विधानसभा में एनडीए एक बार फिर सुनील मणि तिवारी पर भरोसा जता सकती है। वैसे लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) से राजू तिवारी भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) अभी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में हो सकता है कि यह सीट, लोजपा या जेडीयू के खाते में चली जाए। महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी एक बार बृजेश कुमार पांडेय पर भरोसा जता सकती है। आरजेडी के शशि भूषण सिंह भी यहां से दावेदारी ठोक रहे हैं। जन सुराज पार्टी भी यहां पांव जमाने की कोशिश कर रही है।
साल 1952 में इस विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। लगातार 3 बार कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की थी। साल 1952 में श्योधारी पांडेय विधायक बने। साल 1957 और 1962 के चुनाव में ध्रुव नारायण मणि त्रिपाठी विधानसभा चुनाव जीते। 1969 में हरि शंकर शर्मा जीते। वह जनसंघ से थे। साल 1972, 1977 और 1980 में इस विधानसभा सीट से रमा शंकर पांडेय ने जीत हासिल की। आइए जानते हैं किस विधानसभा चुनाव में, किसे जीत मिले-