केसरिया विधानसभा की सीट संख्या 15 है। पूर्वी चंपारण की केसरिया विधानसभा में मौर्य साम्राज्य के कई निशान, आज भी देखे जा सकते हैं। यहां बौद्ध कालीन कई स्तूप हैं, जो बताते हैं कि किसी जमाने में यह जगह, मगध साम्राज्य की धुरी रही होगी। केसरिया, पटना से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर है, वहीं वैशाली से 30 मील की दूरी पर है। यह शहर, भारत-नेपाल बॉर्डर के पास है। केसरिया में ही, अब तक का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप खोजा गया है।
साल 1998 की खुदाई में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने यह घोषणा की थी कि यह दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप है। स्तूप मौर्य कालीन है। स्तूप 6 तल का है। यह स्तूप, करीब 200 ईस्वी से 700 ईस्वी के बीच कभी बना होगा। चीनी यात्री फाहियान ने लिखा है कि केसरिया के देउरा स्थल पर भगवान बुद्ध अपने महापरिनिर्वाण के ठीक पहले वैशाली से कुशीनगर जाते वक्त एक रात ठहरे थे। यहां हर दिन, सैकड़ों बौद्ध श्रद्धालु आते हैं। विधानसभा के एतिहासिक पहलू से इतर, सियासी तौर पर यह विधानसभा कैसी है, आइए जानते हैं।
केसररिया विधानसभा सीट पर कुल मतादाताओं की संख्या करीब 2,72,432 है। पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,43,255 है, वहीं महिला मतदाताओं की संख्या करीब 1,29,177 है। साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद, केसरिया विधानसभा में उत्तरी बरियरिया, पश्चिम मधुबनी, उत्तरी मधुबनी, दक्षिणी मधुबनी, पूर्वी मधुबनी, भटवलिया, बरवा, बरियारिया तोलाराजपुर, उत्तरी भवानीपुर, दक्षिणी भवानीपुर और डुमरिया जैसे इलाकों को मिलाकर बनी है। विधानसभा की सीट संख्या 15 है। सीट के ज्यादातर हिस्से ग्रामीण हैं। करीब 268 बूथ हैं।
केसरिया बौद्ध स्तूप। (Photo Credit: eastchamparan.nic.in)
मुद्दे क्या हैं?
केसरिया विधानसभा, ग्रामीण विधानसभा है। यहां सड़क, पुल, शिक्षा व्यवस्था और खराब अस्पताल अहम मुद्दा हैं। विधानसभा में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी का मुद्दा भी उठता ही रहा है। पलायन, गरीबी और रोजगार की मांग युवाओं में बढ़ी है। यह सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप है लेकिन इसके विकास की जरूरत है।
जातीय समीकरण क्या हैं?
केसरिया में ब्राह्मण वोटर मजबूत स्थिति में हैं। राजपूत वोटरों की संख्या करीब 8 फीसदी है, तेली समुदाय के वोटरों की संख्या 8 प्रतिशत, कोइरी 11 प्रतिशत, एससी 12 प्रतिशत, यादव 12 प्रतिशत, मुस्लिम 14 प्रतिश और अन्य जातियों की आबादी करीब 35 प्रतिशत है।
शालिनी मिश्रा केसरिया की विधायक हैं। उनका कद जेडीयू में तेजी से बढ़ा है। सोशल मिडिया पर वह बेहद सक्रिय हैं। उनका चुनावी दिशा में अनुभव नया है। वह मोतिहाीर के पूर्व सीपीआई सांसद कमला मिश्र मधुकर की बेटी हैं। उनके खिलाफ एक 1 आपराधिक केस दर्ज है। उनकी कुल संपत्ति 3 करोड़ से ज्यादा है, 1 करोड़ से ज्यादा कर्ज है। उन्होंने NIMT गाजियाबाद से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वह बीआरएसएम कॉलेज पूसा, समस्तीपुर से ग्रेजुएट हैं।
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में शालिनी मिश्रा ने शानदार जीत हासिल की थी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को कुल 9,227 वोटों से हराया था। संतोष कुशवाहा को 40,219 वोट पड़े थे। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार राजेश कुमार ने 62,902 वोट हासिल किया था। उन्होंने बीजेपी के राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 15,947 वोटों से हराया था। CPI के राम सरण प्रसाद यादव को कुल 11,767 वोट मिले थे।
2025 में क्या समीकरण बन रहे हैं?
जेडीयू से शालिनी मिश्रा, इस सीट की प्रबल दावेदार हैं। बीजेपी के मंकेश्वर सिंह और रजनीश पाठक भी इस सीट से चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अब एनडीए की किस पार्टी के खाते में यह सीट जाएगी, यह तय ही नहीं हुआ है। जन सुराज से सुबोध कुमार तिवारी और रविंद्र प्रताप यहां सक्रियता दिखा रहे हैं।
साल 1952 में पहली बार इस विधानसभा सीट पर चुनाव हुए। कांग्रेस उम्मीदवार प्रभावती गुप्ता इस विधानसभा से विधायक चुनी गईं। दूसरी बार साल 1957 में भी उन्हें जीत मिली। साल 1962 और 1967 में कम्युनिस्ट पार्टी से पीतांबर सिंह चुने गए। साल 2015 में आरजेडी के राजेश कुमार और 20200 के विधानसभा चुनाव में शालिनी मिश्रा ने चुनाव जीता। वह जेडीयू से विधायक हैं।
1952 विधानसभा चुनाव: प्रभावती गुप्ता, कांग्रेस
1957 विधानसभा चुनाव: प्रभावती गुप्ता, कांग्रेस
1962 विधानसभा चुनाव: पितांबर सिंह, CPI
1967 विधानसभा चुनाव: पीतांबपर सिंह, CPI
1969 विधानसभा चुनाव: इजाज हुसैन खान, कांग्रेस
1972 विधानसभा चुनाव: पितांबर सिंह, CPI
1977 विधानसभा चुनाव: पीतांबर सिंह, CPI
1980 विधानसभा चुनाव: राय हरि शंकर शर्मा, जनता पार्टी