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कोल्लम में लेफ्ट के गठबंधन को कैसे पटखनी दे पाएगा UDF? बड़ी है चुनौती

इस जिले में विधानसभा की 11 सीटें हैं लेकिन 2021 के चुनाव में UDF सिर्फ 2 सीटों पर जीत पाया था। कई सीटों पर अभी भी वह कमजोर स्थिति में ही माना जा रहा है।

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कोल्लम जिला, Photo Credit: Khabargaon

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केरल के दक्षिणी हिस्से में आने वाला यह जिला समुद्र तट से शुरू होता है और पूर्व में तमिलनाडु की सीमा तक जाता है। इसके दक्षिण में सिर्फ तिरुवनंतपुरम जिला पड़ता है औ उत्तर में इसकी सीमा अलप्पुझा और पथनमथिट्टा से लगी हुई है। काजू की खेती के लिए मशहूर इस जिले का संबंध अंग्रेजों से भी खूब रहा है जो इसे क्विलोन कहा करते थे। अष्टामुदी झील के लिए मशहूर इस जिले में देश का तीसरा जलमार्ग यानी नेशनल वाटरवे 3 भी है जो कोट्टापुरम को कोल्लम से जोड़ता है। एक तरफ समुद्र और झील के पानी से भीगता यह जिला पूर्व में अपने खूबसूरत जंगलों को पहाड़ों के लिए लिए जाना जाता है। 

 

यह जिला अपने-आप में अनोखा हो क्योंकि अष्टामुदी झील इस जिले में कई सारे छोटे-छोटे टापू बनाती है। सैन थॉम आइलैंड, आवर लेडी फातिमा आईलैंड और मैरीलैंड मैनग्रोव आइलैंड ऐसे ही टापू हैं जिन पर पहुंचने के लिए फेरी से ही जाना होता है। इस झील का विस्तार ऐसा है जिले के लगभग एक तिहाई हिस्से में इस झील का कोई न कोई हिस्सा जरूर दिखता है। इसका एक फायदा यह भी है कि जलमार्ग के जरिए यातायात बेहद आसान हो जाता है।

 

पुर्तगालियों के समय से काजू की खेती के लिए मशहूर रहा यह जिला आज भी काजू उत्पादन में काफी आगे है। देश में काजू का निर्यात करने वाले जिलों में पहला स्थान कोल्लम का है। इसके अलावा बड़े स्तर पर मछली पालन, टूरिजम, खेती और हाउसबोट सर्विस भी लोगों की कमाई का बड़ा जरिया है। इस जिले में काजू के अलावा नारियल, रबर और मसालों की भी खूभ केती होती है।

 

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राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इस जिले की कई सीटों पर रेवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) का प्रभाव कई सीटों पर रहा है। कांग्रेस अपने दम पर भी इक्का-दुक्का सीटें जीतती रही है। RSP के बार-बार गठबंधन बदलने और पार्टी में बिखराव होने का असर यह हुआ है कि अब यह दल कमजोर हो गया है और उन सीटों पर भी जीत नहीं मिल रही हैं जहां एक समय पर उसका गढ़ हुआ करता था। कांग्रेस इस बार कई सीटों पर RSP के ही सहारे है तो दोनों को बहुत पसीना बहाना पड़ रहा है। 

2021 में क्या हुआ था?

RSP के कमजोर होने का फायदा यहां पर सबसे ज्यादा लेफ्ट को हुआ है। उसके हिस्से की कई सीटों पर लेफ्ट ने जीत हासिल की है और इस जिले में लेफ्ट की सीटें बढ़ गई हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में कोल्लम जिले की 11 सीटों में से 9 पर लेफ्ट को जीत मिली थी। सिर्फ 2 सीटों पर कांग्रेस जीत पाई थी। कांग्रेस के सत्ता से दूर रह जाने में यह जिला भी काफी अहम वजह बना था। यही वजह है कि अगर इस बार कांग्रेस को सत्ता में वापसी करनी है तो उसे कोल्लम जिले में तो जीतना ही जीतना होगा।

विधानसभा सीटों का इतिहास


पतनपुरम- कोल्लम जिले की यह विधानसभा सीट मावेलीकारा लोकसभा क्षेत्र में आती है। साल 2001 से ही इस सीट पर केरल कांग्रेस (B) के नेता के. बी. गणेश कुमार चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनकी पार्टी लेफ्ट गठबंधन का हिस्सा है और एक बार फिर से वही इस सीट पर लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के ज्योतिकुमार चमक्काला से होना है। पिछली बार भी ज्योतिकुमार ही कांग्रेस के उम्मीदवार थे लेकिन वह लगभग 15 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस के सामने इस सीट को जीतना बड़ी चुनौती है क्योंकि यहां पर उसे आखिरी जीत साल 1960 में मिली थी।

 

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कोट्टाराक्कारा-मावेलिकारा लोकसभा क्षेत्र में ही आने वाली इस सीट पर भी लंबे समय से लेफ्ट का ही कब्जा है। इसी सीट से बालाकृष्णण पिल्लई लगातार 7 बार चुनाव जीते थे। उसके बाद से यह सीट लगातार चार पार से लेफ्ट के कब्जे में है। 2021 में इसी सीट से चुनाव जीते के एन बालगोपाल एक बार फिर से लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस बार लेफ्ट छोड़कर आईं पी आईशा पोट्टी को चुनाव में उतारा है।  

 

चडयामंगलम- यह विधानसभा क्षेत्र कोल्लम लोकसभा में आता है। 1970 से लेकर अब तक इस सीट पर सिर्फ एक बार कांग्रेस को जीत मिली है बाकी हर बार यहां से सीपीआई ही जीतती आ रही है। 2006 से 2021 तक एम रत्नाकरण यहां के विधायक रहे। 2021 में जे चिंचू रानी को मौका मिला और उन्हें भी जीत मिली। एक बार फिर से लेफ्ट ने उन्हीं को उतारा है। उनका सामना कांग्रेस के एम एम नसीर और बीजेपी के बी एस अरुण राज से है।

 

कुन्नतूर- यह विधानसभा क्षेत्र भी लेफ्ट का गढ़ रहा है। लंबे समय से यहां रेवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) जीतती आ रही है। 1977 से अभी तक सिर्फ एक बार को छोड़कर हर बार उसे ही जीत मिली है। हालांकि, अब यह पार्टी भी दो धड़ों में बंट गई है। 2001 से लगातार जीतते आ रहे के कुंजुमन ने 2016 और 2021 में RSP (लेनिनिस्ट) के टिकट पर जीत हासिल की और अपनी ही मूल पार्टी RSP को हराया। अब वह लेफ्ट के साथ हैं और RSP विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) के साथ है।

 

करुनागापल्ली- अलप्पुझा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इस विधानसभा सीट पर साल 2021 में कांग्रेस ने वापसी कर ली थी। इससे पहले कांग्रेस यहां सिर्फ 1957 में जीती थी। उसके बाद से लेफ्ट के दल या भी निर्दलीय उम्मीदवार जीतते आ रहे थे। 2021 में यहां से जीतने वाले कांग्रेस के सी आर महेश को ही एक बार फिर से मौका दिया गया है। वहीं, लेफ्ट ने एम एस तारा और बीजेपी ने वी एस जितिनदेव को यहां से उतारा है।

 

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चवारा- यह विधानसभा क्षेत्र भी रिवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी का गढ़ रहा है। 2021 में लेफ्ट ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे सुजित विजयनपिल्लई का समर्थन किया था और वह चुनाव जीत गए थे। उनके सामने RSP के शिबू बेबी जॉन थे लेकिन रोमांचक मुकाबले में वह सिर्फ 1096 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इस बार भी इन्हीं दोनों का मुकाबला होना है। एक बार फिर से लेफ्ट के समर्थन से सुजित विजयनपिल्लई निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।

 

कुंडारा- इस विधानसभा सीट पर भी लगातार तीन हार के बाद कांग्रेस ने साल 2021 के चुनाव में वापसी की थी। पी सी विष्णुनाथ ने लेफ्ट की जे एम अम्मा को हराकर चुनाव जीता था। इस बार कांग्रेस ने फिर से पी सी विष्णुनाथ पर भरोसा जताया है। वहीं, लेफ्ट ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए एस एल साजीकुमार को टिकट दे दिया है।

 

कोल्लम-शहर की यह सीट लंबे समय से लेफ्ट का मजबूत किला है। पिछले पांच चुनाव से यहां सीपीआई ने जीत हासिल की है। 2016 और 2021 में यहां से चुनाव जीतने वाले मुकेश की जगह इस बार लेफ्ट ने एस जयमोहन को टिकट दिया है। वहीं, उनके सामने कांग्रेस की ओर से बिंदू कृष्णा को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस ने यहां से अपना आखिरी चुनाव 1991 में जीता था।


एरावीपुरम-यह सीट भी RSP का गढ़ रहा है लेकिन RSP के कमजोर होने के चलते लेफ्ट ने पिछले दो चुनाव जीत लिए हैं। दोनों बार जीतने वाले एम नौशाद को ही एक बार फिर से सीपीआई ने मौका दिया है। आरएसपी ने विष्णु मोहन को उतारा है लेकिन उसकी चुनौती यह है कि उसी के वरिष्ठ नेता रहे साजी डी आनंद इस बार बीडीजेएस के टिकट पर मैदान में उतर गए हैं और एक बार फिर से यहां का चुनाव त्रिकोणीय होता दिख रहा है।

 

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चतन्नूर- इस सीट पर भी कांग्रेस की स्थिति खराब ही रही है और 1965 से लेकर अब तक सिर्फ 3 चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली है। 2006 से लगातार यहां पर CPI जीतती आ रही है। लगातार तीन बार के विधायक रहे जी एस जयलाल की जगह पर लेफ्ट ने इस बार आर राजेंद्रन को उतारा है। उनका मुकाबला कांग्रेस के सूरज रवि से होना है।

 

पुनलूर- इस सीट पर भी कांग्रेस को सिर्फ एक बार जीत मिली है। 1996 से ही यह सीट लेफ्ट के कब्जे में है। 2021 में सीपीआई ने एक बार फिर से अपने पुराने विधायक पी एस सुपल को यहां से उतारा था और वह आसान जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे। इस बार फिर से लेफ्ट ने अपना उम्मीदवार बदला है और अजयप्रसाद सी को मौका दिया है। UDF की ओर यहां से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को मौका मिलता रहा है। पिछली बार बड़े अतंर से हारने वाली IUML ने इस बार नौशाद यूनुस को टिकट दिया है।  


जिला- कोल्लम
विधानसभा सीटें-11
UDF-2
LDF-9


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