अलप्पुझा में जो जीता वह सरकार बनाएगा, LDF को कैसे हरा पाएगा UDF?
केरल का अलप्पुझा जिला ऐसा हैं जहां जीते बिना राज्य की सत्ता में लौटना मुश्किल है। पिछले चुनाव में यहां की 9 में से 8 सीट पर लेफ्ट गठबंधन ने जीत हासिल की थी।

अलप्पुझा, Photo Credit: Khabargaon
समुद्र के किनारे बसा यह केरल का यह जिला भरपूर बारिश और बहुत सारी नहरों, नदियों, झीलों और अन्य कई तरह के जलाशयों की वजह से जाना जाता है। नहरों के शानदार नेटवर्क के चलते ही इसे 'पूरब का वेनिस' भी कहा जाता है क्योंकि यहां के पानी में खूब नाव चलती हैं। इस जिले के पूरब में कोट्टायम और पथनमथिट्टा जिले हैं। कोट्टायम और अलप्पुझा जिले के बीच में ही वेम्बनाड झील आती है जिसके चलते यह जिला हमेशा पानी से भरा रहता है। इस जिले के उत्तर में कोच्चि शहर पड़ता है जो केरल की एक बिजनेस सिटी है।
अलेप्पी के नाम से भी जाना जाने वाले इस शहर को ब्रिटिश सरकार के वायसरॉय लॉर्ड कर्जन ने ही 'वेनिस ऑफ द ईस्ट' नाम दिया था। उनके ऐसा कहने की वजह यही है कि इस शहर के एक तरफ समुद्र है, दूसरी तरफ बड़ी झील है, शहर में नदियां और नहरें हैं और बैकवॉटर आधारित फलती-फूलती इकॉनमी है। कोट्टायम और कोल्लम से काटकर बना यह जिला 17 अगस्त 1957 में बना था लेकिन ऐतिहासिक स्तर पर यह काफी अहमियत रखता है। मशहूर पत्रकार और आंदोलनकारी रहे टी के माधवन ने इसी जिले से साल 1925 में अछूत प्रथा के खिलाफ आंदोलन किया था।
इस जिले के इतिहास को देखकर यह कहा जा सकता है कि जिसे सत्ता में आना हो उसे यहां तो जीत हासिल ही करनी होगी। लेफ्ट ने पिछले दो बार से यहां जीत हासिल की है और इस बार कांग्रेस जोरदार कोशिश कर रही है। धान की खेती यहां इतनी अहम है कि कांग्रेस ने धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 35 रुपये प्रति किलो दिलाने का वादा किया है। पिछले साल हुए निकाय चुनावों में लेफ्ट की बढ़त थोड़ी कम हुई है। पहले इस जिले की 72 में से 56 ग्राम पंचायतों पर लेफ्ट का कब्जा था लेकिन इस बार UDF ने यहां से 23 सीटें जीत लीं और लेफ्ट सिर्फ 36 सीटों पर ही रह गया। नगर पालिकों में UDF ने जबरदस्त बढ़त हासिल की और 6 में से 5 में जीत हासिल की । 12 ब्लॉक पंचायतों में से 4 पर LDF और 4 पर UDF को जीत मिली जबकि पिछली बार 11 में लेफ्ट ने जीत हासिल की थी।
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2021 में क्या हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव में इस जिले में भी यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) को बुरी हार मिली थी। जिले की कुल 9 में से सिर्फ एक सीट पर UDF को जीत मिली थी, वह भी रमेश चेन्निथला की सीट थी। इस बार इसी जिले की एक सीट पर कांग्रेस ने लेफ्ट के बाकी का समर्थन किया है और अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। कई सीटों पर पिछले चुनाव में रोमांचक मुकाबला था लेकिन कांग्रेस को हार मिली थी। यही वजह है कि इस बार कांग्रेस ने अपने हारे उम्मीदवारों के टिकट काटकर नए उम्मीदवारों को उतारा है। वहीं, बीजेपी ने कई सीटों पर अपने सहयोगी दलों को मौका दिया है।
विधानसभा सीटों का इतिहास
अरूर- दशकों से लेफ्ट के कब्जे में चल रही यह सीट कांग्रेस ने 2019 के उपचुनाव में जीत ली थी। हालांकि, 2021 में जब चुनाव हुए तो कांग्रेस के शनीमुल उस्मान चुनाव हार गए थे। तब चुनाव जीतने वाली लेफ्ट की दलीमा ही एक बार फिर से यहां उम्मीदवार हैं और उनका मुकाबला एक बार फिर से कांग्रेस के शनीमुल उस्मान से ही होना है।
चेरतला- 1996 से 2006 तक इसी सीट से ए के एंटनी चुनाव जीते थे लेकिन जब 2006 में वह यहां से चुनाव नहीं लड़े तो कांग्रेस हार गई और लेफ्ट की वापसी हो गई। 2006 से 2021 तक लेफ्ट के पी तिलोतमन को यहां से जीत मिली। 2021 में लेफ्ट ने उनकी जगह पी प्रसाद को उतारा गया और वह भी आसानी से जीत गए यानी 2006 से यहां पर लेफ्ट का ही कब्जा है। लेफ्ट ने एक बार फिर से पी प्रसाद को ही मौका दिया है और कांग्रेस ने उनके सामने के आर राजेंद्र प्रसाद को मौका दिया है।
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अलप्पुझा- एक समय पर केसी वेणुगोपाल की विधानसभा सीट रही अलप्पुझा अब लेफ्ट का गढ़ बन गई है। के सी वेणुगोपाल के सांसद बनने के बाद 2009 के उपचुनाव में भी कांग्रेस को जीत मिली लेकिन उसके बाद से अब तक कांग्रेस यहां जीत नहीं पाई है। 2021 में लेफ्ट के टिकट पर जीते पी पी चितरंजन एक बार फिर से लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस बार उम्मीदवार बदलकर ए डी थॉमस को मौका दिया है।
अंबलाप्पुझा- इस विधानसभा सीट पर 1991 से लेकर अब तक कांग्रेस को सिर्फ एक बार जीत मिली है। 2006 से लगातार अभी तक लेफ्ट का ही कब्जा है। 2021 में चुनाव जीते एच सलाम ही लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। वहीं, 2006 से 2021 तक जीतते आ रहे जी सुधाकरण इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं और कांग्रेस ने उनका समर्थन किया है।
कुट्टनाड- यह विधानसभा सीट मावेलिक्करा लोकसभा क्षेत्र में आती है और लंबे समय से लेफ्ट के कब्जे में है। यहां से लेफ्ट गठबंधन में शामिल नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) जीतती आ रही है। दो बार थॉम कैंडी यहां से चुनाव जीते और 2021 में एनसीपी ने थॉमस के थॉमस को टिकट दिया। इस बार भी एनसीपी (शरद पवार) ने थॉमस के थॉमस को ही मौका दिया है। वहीं, यूडीएफ की ओर से केरल कांग्रेस के रेजी चेरियन मैदान में हैं।
हरिपाद- यह विधानसभा सीट लंबे समय से कांग्रेस के कब्जे में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं और चौथी बार भी यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं। लेफ्ट की ओर से यहां से टी टी जिमसन उम्मीदवार हैं। वहीं, बीजेपी ने संदीप वाचस्पति को मैदान में उतारा है।
कायमकुलम- इस विधानसभा सीट पर पिछले 20 साल से लेफ्ट का कब्जा है। दो बार लेफ्ट के सी के सदासिवन और दो बार यू प्रतिभा चुनाव जीत चुकी हैं। इस बार भी यू प्रतिभा को यहां से मौका मिला है। कांग्रेस ने यहां से एम लिजू को उतारा है ताकि यहां वह वापसी कर सके।
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मावेलिक्करा- यह सीट भी मावेलिक्करा लोकसभा क्षेत्र में है। 1991 से 2011 तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी लेकिन अब यहां भी लेफ्ट का कब्जा हो चुका है। दो बार आर राजेश जीते थे और 2021 में एम एस अरुण कुमार जीते थे। इस बार भी लेफ्ट ने एम एस अरुण कुमार को ही टिकट मिला था। उनके सामने कांग्रेस ने एडवोकेट एम राज को टिकट दिया है।
चेंगानूर- यह विधानसभा क्षेत्र भी मावेलिक्करा लोकसभा क्षेत्र में है। 1991 में से 2016 तक इस सीट पर जीतती आ रही कांग्रेस के हाथ से यह सीट भी जा चुकी है। पिछले 10 साल से यहां लेफ्ट जीत रही है। केरल सरकार में मंत्री साजी चेरियन 2018 से इसी सीट से विधायक हैं और एक बार फिर से वहीं यहां से उम्मीदवार बने हैं। उनके सामने कांग्रेस ने एबी कुरियाकोस को मैदान में उतारा है।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल-1415 वर्ग किलोमीटर
नगर पालिका-6
ब्लॉक-12
तालुका-6
ग्राम पंचायत-72
विधानसभा सीटें- 9
LDF-8
UDF-1
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