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बागियों की तिगड़ी केरल में लेफ्ट की हैट्रिक में बनी रोड़ा, UDF ने मौका लपक लिया?

केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लेफ्ट के बागियों ने सीएम विजनय की परेशानी बढ़ा दी है। कांग्रेस ने लेफ्ट के बागी नेताओं को समर्थन दे दिया, जिससे अब मुकाबला और भी ज्यादा रोमांचक हो गया है।

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केरल के सीएम पिनराई विजयन, Photo Credit: PTI

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केरल में चुनाव प्रचार के अंतिम कुछ दिन बचे हैं और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की टेंशन लगातार बढ़ती जा रही है। उनकी टेंशन विपक्ष से ज्यादा उनकी पार्टी के बागी नेताओं ने बढ़ा रखी है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के दिग्गनजन नेता जी सुधाकरण ने अब खुली बगावत कर दी है। लेफ्ट के किले में इस तरह की टूट पहली बार हो रही है। इतना ही नहीं, ये नेता छोड़कर कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की ओर जा रहे हैं। जी सुधाकरण ने अपना पूरा जीवन लेफ्ट की विचारधारा को दिया और अब उन्होंने कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के साथ मंच शेयर किया। अकेले सुधाकरण ही नहीं बल्कि करीब एक दर्जन नेताओं ने सीएम विजयन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। 

 

सी सुधाकरण को लेफ्ट फ्रंट ने 2021 के चुनाव में ही साइडलाइन कर दिया था लेकिन वह पार्टी की लाइन पर बने रहे और शांत बैठे रहे। हालांकि, पिछले 5 सालों में राज्य में काफी कुछ बदल चुका है। सीएम विजयन के खिलाफ पार्टी में ही लोग मुखर हो गए। जी सुधाकरण ने भी निर्दलीय चुनाव में उतरने का मन बना लिया। कांग्रेस पार्टी ने मौके का फायदा उठाते हुए सुधाकरण को समर्थन दे दिया। अब वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मंच भी शेयर कर रहे हैं। ऐसे में अब लेफ्ट के लिए अलप्पुझा सीट की लड़ाई काफी मुश्किल मानी जा रही है। 

 

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एक-एक कर छोड़ रहे साथ

जी सुधाकरण ने 63 साल कम्युनिस्ट पार्टी को दिए। उनका एक लंबा राजनीतिक इतिहास है। उन्होंने लगभग अपना पूरा जीवन लेफ्ट को दिया और आमतौर पर केरल में लेफ्ट के नेता अपनी पार्टी के खिलाफ मुखर नहीं होते। हालांकि, इस बार सिर्फ सुधाकरण ही नहीं बल्कि कई अन्य नेता भी लेफ्ट की परेशानी बढ़ा रहे हैं। सीएम विजयन ने लेफ्ट के टूटते गढ़ पर कहा है कि कुछ नेताओं के मन में संसदीय महत्वकांक्षा बढ़ गई है। यानी चुनाव जीतने की प्रवृत्ति बढ़ गई है चाहे फिर उसके लिए कुछ भी करना पड़े। उन्होंने माना कि पहले इस तरह की बगावत नहीं होती थी। 

यह नेता भी कर चुके हैं बगावत

सुधाकरण के अलावा वी कुन्हीकृष्णन और टी के गोविंदन जैसे बड़े नेता भी बगावत कर चुके हैं। वी कुन्हीकृष्ण पय्यानूर से और गोविंदन तालिपारम्बा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। गोविंदन ने तो पार्टी पर टिकट ना देने का आरोप लभी लगाया है। हालांकि, सीएम विजयन का कहना है कि टिकट बंटवारे में एक सुनियोजित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। बता दें कि गोविंदन और कुन्हीकृष्ण को भी कांग्रेस के नेतृ्त्व वाले गठबंधन ने समर्थन दे दिया है और वह भी कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं। 

 

यूडीएफ ने इस बार लेफ्ट के बागियों को या तो टिकट दिया है या फिर उनका समर्थन किया है। जी सुधाकरण तो राहुल गांधी के साथ मंच तक पहुंच चुके हैं। इन तीन नेताओं के अलावा शोरानूर से सीपीआईएक के पूर्व विधायक पी के सासी इस बार ओट्टापलम से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भी यूडीएफ का समर्थन मिला है। यूडीएफ उन्हें कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतारना चाहती थी लेकिन पार्टी नेताओं के विरोध के बाद उन्हें निर्दलीय ही समर्थन देना पड़ा था। 

 

यह भी पढ़ें: 'लेफ्ट को कोई और चला रहा', राहुल गांधी ने BJP और LDF के मिले होने का लगाया आरोप

9 अप्रैल को होगी वोटिंग

केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में लगे लेफ्ट गठबंधन के सामने चुनौती बहुत बड़ी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस कोई सेल्फ गोल नहीं करती है तो यूडीएफ का जीतना तय है। हालांकि, कांग्रेस गठबंधन की परेशानी भी बागियों ने बढ़ा दी है। एलडीएफ ने कांग्रेस और यूडीएफ के करीब 10 नेताओं का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समर्थन किया है। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही फेज में वोटिंग होगी और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 


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