लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनेगी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में (LDF) में कुछ भी 'लेफ्ट' नहीं बचेगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के साथ गठजोड़ कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि केरल को सांप्रदायिक ताकतें चला रही हैं, ये ताकतें, संविधान को नहीं मानतीं और देश की जनता पर हमला करती हैं।
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राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा:-
LDF वर्षों तक हमारे विरोधी रहे हैं। हमने उनसे लड़ाई लड़ी है। हम आगे भी उनसे लड़ते रहेंगे। कई साल तक, वे ऐसे विचारों के पक्ष में खड़े रहे जिनसे हम सहमत नहीं थे। LDF का पूरा नाम क्या है? लेफ्ट डोमोक्रेटिक फ्रंट। सच कहूं तो लेफ्ट फ्रंट में लेफ्ट जैसा कुछ नहीं बचा है। चुनाव के बाद लेफ्ट फ्रंट का लेफ्ट जैसा कुछ भी बाकी नहीं रहेगा।
क्या सच में लेफ्ट में अब कुछ 'लेफ्ट' नहीं है, आइए समझते हैं-
केरल वामपंथ का किला, लोकसभा में कमजोर, विधानसभा में मजबूत
केरल वामपंथ का किला है। यहां लेफ्ट डोमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार दशकों से हैं। पिनराई विजयन मुख्यमंत्री हैं। यह किला, कोई नहीं भेद पाया है। राहुल गांधी यहीं लेफ्ट के खत्म होने की बात कर रहे हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है हि CPI(M) और CPI के पास सबसे अधिक विधायक हैं।
केरल में आखिरी बार साल 2011 में कांग्रेस को कामयाबी मिली थी। ओमान चांडी 2011 से 2016 तक मुख्यमंत्री रहे। साल 2016 में पिनराई विजनय आए और टिक गए।
10 साल से वह राज्य की सियासत में टिकटे हुए हैं। 2021 में केरल की 280 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए थे। 62 सीटों पर CPI (M) और 17 सीटों पर CPI को कामयाबी मिली थी। 2024 में लेफ्ट का जनाधार डगमगाया और सिर्फ 1 सीट हाथ आई।
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बिहार में भी 'जिंदा' है लेफ्ट
साल 2020 में हुए विधानसभा चुनावों में लेफ्ट का प्रदर्शन शानदार था। CPI, CPI (M) और CPI (ML) ने करीब 16 सीटें जीती थीं। यह हाशिए पर पहुंच गए लेफ्ट के लिए चौंकाने वाला था। 2025 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट का बुरा हाल रहा। कांग्रेस भी बिखर गई। CPI(ML) के खाते में 2 सीटें आईं, CPI (M) को सिर्फ 1 सीट हासिल हुई।
त्रिपुरा की मुख्य विपक्षी पार्टी है लेफ्ट
त्रिपुरा में 177 सीटें हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी CPI (M) है। बीजेपी के 35 विधायक हैं तो CPI (M) के 16। राज्य में आज भी लेफ्ट मजबूत स्थिति में है। लोकसभा में पार्टी हाशिए पर है।
तमिलनाडु में भी मजबूत है लेफ्ट
तमिलनाडु में वामपंथी दल CPI और CPI(M) सत्तारूढ़ DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा हैं। यहां CPI(M) और CPI दोनों दलों के निर्वाचित विधायक हैं। लोकसभा में लेफ्ट के 4 सांसद हैं, वहीं 2021 में हुए विधानसभा चुनावों में लेफ्ट के खाते में 4 सीटें आईं थीं।
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झारखंड में 2 सीटें हैं लेफ्ट के पास
झारखंड में लेफ्ट के खाते में 2 सीटें आईं हैं। साल 2024 में विधानसभा चुनाव हुए थे। 2 सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन में 2 सीटों पर कामयाबी मिली थी।
कहां अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है लेफ्ट?
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में भी वाम दलों के विधायक रहे हैं लेकिन हाल के चुनावों में करारी हार हुई है, जमानत तक नहीं बचा पाए हैं। लेफ्ट का व्यापक जनाधार सिर्फ केरल में बचा है, पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उदय के बाद से लेफ्ट हाशिए पर है। महाराष्ट्र का हाल भी ऐसा ही है। राजस्थान में भी एक भी सीट पर लेफ्ट नहीं काबिज है। यूपी और छत्तीसगढ़ में भी नहीं है।