हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में 38 साल पहले चाइल्ड एक्टर के तौर पर शफीक सैयद ने काम किया था। आज वही रुपये कमाने के लिए ऑटो रिक्शा चला रहे हैं। शफीक सैयद को बेहतरीन एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। जिन फिल्मों में उन्होंने काम किया था, वह फिल्म ऑस्कर अवॉर्ड के नॉमिनेशन तक पहुंची थी। इसके बावजूद भी वह हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में टिक नहीं पाए। इंडस्ट्री में काम न मिलने के कारण शफीक सैयद ने 2 बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी।
शफीक सैयद ने सलाम बॉम्बे नाम की फिल्म में काम किया था, जो दर्शकों को बहुत पसंद आई थी। 1989 में रिलीज हुई यह फिल्म बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी के लिए ऑस्कर में नॉमिनेट हुई थी। इसी फिल्म में शानदार एक्टिंग के लिए शफीक सैयद को राष्ट्रपति के हाथों नेशनल अवॉर्ड मिला था। हालांकि आगे शफीक सैयद को अच्छी फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिला।
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सलाम बॉम्बे फिल्म में किया था काम
शफीक सैयद ने सलाम बॉम्बे में बतौर अभिनेता बेहद शानदार काम किया था। जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई थी, तब कई दर्शकों को उनकी एक्टिंग बहुत अच्छी लगी थी।
शफीक सैयद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने सलाम बॉम्बे में 52 दिनों तक काम किया था। इस फिल्म में एक्टिंग करने के लिए उन्हें 15 हजार रुपये मिले थे। शफीक और उनके परिवार को लगा था कि वह आगे बेहतरीन फिल्मों में काम करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सलाम बॉम्बे में काम करने के बाद उन्हें ज्यादा फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिल पाया, जिससे वह बेहद हताश हो गए थे। करियर की चुनौतियों और आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश भी की थी।
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दो बार की सुसाइड की कोशिश
जब शफीक सैयद ने सलाम बॉम्बे में काम किया था, उसके 4 साल बाद उन्हें पतंग फिल्म में काम करने का मौका मिला था। इसके बाद उन्हें हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया, जिसके बाद उन्होंने एक्टिंग का करियर छोड़ दिया और मुंबई से बैंगलोर चले गए। शफीक ने बैंगलोर में ऑटो चलाना शुरू कर दिया। पूरा दिन ऑटो चलाने के बाद शफीक 150 रुपये ही कमा पाते थे। इसी आर्थिक तंगी से परेशान होकर शफीक ने दो बार सुसाइड करने की कोशिश की थी।