तमिल फिल्म इंडस्ट्री को इन दिनों केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से नई फिल्मों के प्रमाण पत्र मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण फिल्मों की रिलीज अटक गई है और फिल्म निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई फिल्म निर्माताओं ने यह दावा किया। त्योहारों के आसपास तमिलनाडु में फिल्मों का क्रेज अलग ही होता है। सिनेमा घरों के बाहर लंबी कतारें होती हैं। फिल्म निर्माता भी इसका फायदा उठाना चाहते हैं। यही कारण है कि अधिकांश फिल्म निर्माता और अभिनेता अपनी फिल्मों को अक्सर त्योहारों के नजदीक रिलीज करना चाहते हैं, ताकि अधिक से अधिक दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचे और फिल्म अच्छी कमाई कर सके।
तमिल फिल्म 'पराशक्ति' के निर्माता ने भी यही रणनीति अपनाई। पोंगल त्योहार से ठीक एक दिन बाद यानी 10 जनवरी को फिल्म रिलीज करने का प्लान बनाया। मगर केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र मिलने में देरी हुई। लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को बोर्ड ने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दे दिया है। कल से यह फिल्म दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब प्रमाण पत्र मिलने में देरी हुई है। इससे पहले अभिनेता विजय की फिल्म 'जन नायकन' को भी कड़ी मशक्कत के बाद प्रमाण पत्र मिला था। इसका असर फिल्म की कमाई पर पड़ा था।
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फिल्म निर्माताओं की बढ़ी चिंता
किसी भी फिल्म को रिलीज करने के खातिर CBFC का प्रमाण पत्र जरूरी होता है। मगर प्रमाण पत्र मिलने में हो रही देरी के कारण फिल्म निर्माताओं की चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर फिल्म की टिकट बुकिंग और कमाई पर पड़ता है। मिसाल के तौर पर जन नायकन को देर से प्रमाणपत्र मिला। इस वजह से फिल्म की प्री-बुकिंग शुरू नहीं हो सकी। इसका फिल्म के शुरुआती कलेक्शन पर खराब असर पड़ा।
फिल्म निर्माता कार्तिक सुब्बाराज ने प्रमाण पत्र देरी से मिलने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़े और स्वतंत्र दोनों तरह के प्रोडक्शन हाउस मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इसे तमिल सिनेमा के लिए कठिन समय बताया। अपनी एक पोस्ट में सुब्बाराज ने लिखा कि पराशक्ति जैसी बड़ी फिल्म को अब तक प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उसकी बुकिंग शुरू नहीं हो पाई है, जबकि फिल्म के रिलीज में अब कुछ ही दिन बचे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी अव्यवस्था से बचने के लिए फिल्म टीम को कम से कम तीन महीने पहले क्लीयरेंस मिल जाना चाहिए। वरना त्योहारों के दौरान बड़ी फिल्मों को टालना पड़ेगा, नहीं तो फिल्म व्यापार को भारी नुकसान होगा।
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पराशक्ति फिल्म को प्रमाण पत्र मिलने में क्यों हुई देरी?
10 जनवरी को रिलीज होने वाली पराशक्ति फिल्म को प्रमाण पत्र मिलने में देरी के पीछे कई वजह हो सकती हैं। यह फिल्म 1960 के दशक के तमिलनाडु के सामाजिक मुद्दों को दिखाती है, खासकर द्रविड़ आंदोलन से जुड़ी सामाजिक पृ्ष्ठभूमि को। विशेषज्ञों का तर्क है कि फिल्म की कहानी ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है। इस वजह से प्रमाणन बोर्ड गहराई से जांच करने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी करना चाहता था, ताकि किसी सीन से किसी भी वर्ग की भावनाओं को चोट न पहुंचे।