अभिनेता और कॉमेडियन गौरव गेरा इन दिनों फिल्म 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' की सफलता को एन्जॉय कर रहे हैं। उन्होंने फिल्म में आलम भाई का किरदार निभाया है। उनके काम को दर्शकों और क्रिटिक्स का पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है। अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में गौरव ने अपने संघर्षों, करियर ऑप्शन और आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि मेरा परिवार का फिल्मी इंडस्ट्री से कोई लेना-देना नहीं था। किसी को कोई जानकारी नहीं थी।
गोरव ने आगे कहा, 'शुरुआत से ही मेरी दिलचस्पी आर्ट और क्राफ्ट की तरफ थी। हमेशा मेरे ए पल्स आते थे लेकिन पढ़ाई में 72%, 80% और 82% वाला स्टूडेंट था। मुझे लगता था कि मैं जिस चीज में अच्छा हूं, उसको बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। मेरी स्केचिंग अच्छी थी। मैंने कॉलेज ऑफ आर्ट्स में अप्लाई किया था लेकिन नहीं हुआ। फिर फैशन में गया और पर्ल एकेडमी ज्वाइन की। हालांकि मुझे जल्द ही समझ आ गया कि मैं यह नहीं करना चाहता हूं। मैंने पापा से बोल दिया, पैसे बचा लो, बड़ा महंगा कोर्स है। मैं नहीं करूंगा। पापा ने कहा, इसे खत्म करो और आधे साल जॉब कर लेना फिर जो मन आया करना। मैंने आधे साल नौकरी की और फिर थिएटर ज्वाइन कर लिया।'
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क्या परिवार से सपोर्ट मिला?
गेरा ने कहा, मेरे पापा आई बीएचयू से इंजीनियर है, भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। मुझ पर कुछ थोपा नहीं गया। इसलिए मैं शुक्रगुजार हूं।
आर्थिक तंगी पर बात करते हुए गौरव ने कहा, 'जब मैं मुंबई आया था तब मेरे बैंक अकाउंट में 84 रुपये थे। मैं एचडीएफसी बैंक के सामने से गुजरता है और बैंक को देखकर कहता था, मेरा ख्याल रखना। मैं आते-जाते बैंक को माथे टेक के जाता था। मेरे पास पापा के लिखे पत्र आज भी है जिसमें लिखा होता था कि 2000 भेज रहा हूं। इससे ज्यादा नहीं है।'
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क्या धुंरधर के बाद घमंड आया? गौरव ने कहा, 'अब नहीं आता। शायद 10 साल पहले आ जाता। अब लगता है बस एक काम है जो मैंने किया है और लोगों ने पसंद किया है। यह मेरा काम है। आप इंडस्ट्री में बहुत कुछ सीख जाते हैं। उन्होंने आगे कहा, आज आप रॉकिंग हो, कल नहीं हो। मैंने इतने उतार और चढ़ाव देख लिए हैं कोई फर्क नहीं पड़ता है।'