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'इक्का' रिव्यू: कमजोर स्क्रिप्ट, सनी देओल और अक्षय खन्ना दोनों पड़े फीके

सनी देओल की कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म 'इक्का' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म देखने से पहले रिव्यू पढ़ लें।

sunny deol ikka movie

सनी देओल, Photo Credit: Sunny Deol Insta Handle

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सनी देओल ने फिल्म 'दामिनी' में वकील गोविंद श्रीवास्तव का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनका डायलॉग 'तारीक पर तारीक' आज भी दर्शकों को याद है। लंबे समय के बाद सनी फिर से फिल्म 'इक्का' में वकील अर्जुन मेहरा का रोल निभा रहे हैं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है।

 

इस फिल्म में सनी के साथ अक्षय खन्ना और तिलोत्तमा शोम ने मुख्य भूमिका में हैं। यह एक कोर्ट रूम ड्रामा मूवी है जिसका ट्रेलर दर्शकों को पसंद आया था। अगर आप भी इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो पहले रिव्यू पढ़ लें।

 

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'इक्का' रिव्यू

कहानी

 

'इक्का' में अर्जुन मेहरा (सनी देओल) एक जाना माना और ईमानदार वकील है। वह मजबूर और निर्दोषों के खिलाफ लड़ता है और आज तक अपना एक भी केस नहीं हारा है जिस वजह से उसे लोग इक्का बुलाते हैं। फिल्म में नेगेटिव रोल में शौर्यमान गौर (अक्षय खन्ना) है जो मशहूर बिजनेसमैन और आम चुनाव में खड़े होने वाले नेता हर्षवर्धन गौर का बेटा है जिस पर एक लड़की के मर्डर का आरोप है। अर्जुन और शौर्यमान के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। वह शौर्यमान का केस लड़ने से मना कर देता है। इसी दौरान उसे पता चलता है कि उसकी बेटी को ब्ल्ड कैंसर है। बेटी की जान बचाने के लिए बायोलॉजिकल पिता का बोन मेरो चाहिए। उसकी बेटी का पिता शौर्यमान है। शौर्यमान अर्जुन की बेटी को तभी बोन मेरो देने का वादा करता है जब वह इस केस से बरी हो जाएगा। अर्जुन अपने बेटी के लिए उसूलों को दाव पर लगा देता है। अर्जुन के खिलाफ कोर्ट में सरकारी वकील मधुरा बनर्जी (तिलोत्तम शोम) होती है। अब अर्जुन कैसे अपनी बेटी को बचाता है? इसके लिए आपको फिल्म देखने होगी।

कलाकारों की ऐक्टिंग

सनी देओल (अर्जुन मेहरा) के रोल में प्रभावशाली नहीं लगे। फिल्म में उनका एक भी ऐसा डायलॉग नहीं है जो आपको याद रहेगा। अक्षय खन्ना ज्यादातर सीन्स में चुप नजर आए। एक या दो सीन्स में उन्हें देखकर अच्छा लगेगा। मधुरा बनर्जी के रोल में तिलोत्तमा को ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं दिया गया। उनके कैरेक्टर को बहुत हल्के तरीके से लिखा गया जिस वजह से वह किरदार को अच्छे से पेश नहीं कर पाईं।

 

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कहां हुई चूक?

इस फिल्म की सबसे बड़ी चूक कमजोर पटकथा है। किसी भी कैरेक्टर को प्रभावी तरीके से नहीं लिखा गया। नेगेटिव रोल में अक्षय खन्ना को ज्यादा गंभीर डायलॉग देने चाहिए थे। उन्हें देखकर आपको एक बार भी नेगेटिव कैरेक्टर वाला फील नहीं आता है। कोर्ट रूम ड्रामा में सरकारी वकील मधुरा को मजबूत तरीके से पेश नहीं किया गया। डिफेंस की दलीलें इतनी फीकी और कमोजर थी कि लगेगा क्या मजाक चल रहा है। इस फिल्म में सिर्फ सनी देओल ही बोलते नजर आ रहे हैं। अर्जुन की बेटी समायरा(दरिया बेदी) ने निभाया है जिन्हें ब्लड कैंसर है। कैंसर की मरीज होने के बावजूद आपको समायरा के कैरेक्टर से सहानुभूति नहीं होती है। समायरा की मां का रोल दीया मिर्जा ने निभाया है। शौर्यमन की बीवी का रोल संजीदा शेख ने प्ले किया है। उनका होना न होना बराबर ही लगा है। वह पूरी फिल्म में एक या दो सीन्स में दिखी हैं।

 


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